*दशहरा पर कलाकार अमित तंबोली द्वारा निर्मित छोटा रावण की सक्ती शहर में रही खुब चर्चा*

जिला रिपोर्टर सक्ती- उदय मधुकर
सक्ती शहर के सुप्रसिद्ध हुनरमंद अमित तंबोली द्वारा निर्मित छोटा किंतु अनोखा रावण और उसकी गर्जना की चर्चा इस साल दशहरा पर्व पर जनसाधारण के बीच चर्चा का विषय बना रहा। विदित हो कि सक्ती नगर निवासी कलाकार अमित तम्बोली के द्वारा लगातार 35 वर्षो से छोटे से अनोखा रावण की चलित झांकी बनाया जा रहा है।
हर वर्ष एक नये अंदाज में रावण की झलक दिखलाया जाता है। कभी स्केटिंग करता है, तो कभी जूता पेट चश्मा हाथों को हिलाकर डान्स करता है कभी सीढ़ी पर चढ़ जाता है तो कभी रस्सी से लटक कर ऊपर जाता है कभी मोबाईल पकड़ कर डान्स करता है तो कभी दुश्मन के गले काटता है तो कभी सीता सीता चिल्लता है तो कभी राम राम कभी महादेव से बात करता है तो कभी हनुमान जी के पीछे पड़ जाता है। बात श्री तंबोली द्वारा इस साल बनाए गए रावण की करें तो इस वर्ष 10 इंच का बैटरी चलित रावण जो हवा में उल्टा उड़ता हुआ अपने हाथों से 24 इंच साईज के घूमने हुये चंद्रमा को अपने हाथों से दबा कर दोनों टांगो को बार बार फैला कर घूमते हुये चंद्रमा को लंका तक लेके जाते हुये प्रस्तुत किया गया था जहाँ पर चारो तरफ समुद्र नुमा जल के बीच स्वर्ण लंका का दृश्य उनकी कलाकारी और विशेष प्रतिभा को प्रदर्शित कर रहा था। उन्होंने अपनी कलाकारी में रावण एवं चन्द्र देव के संवाद को प्रदर्शित किया था। संवाद का सार रावण कहता है कि मै तीनो लोक को जीत चुका हूं तो चंद्रमा को तो मेरे मस्तक पर शोभा देना चाहिये न कि महादेव के मस्तक पर।
इस अनोखे रावण को देखने सक्ती नगर के अलावा आस पास के गांवों से लोग बाग बच्चे बुजुर्ग परिवार सहित देखने पहुंचे और लगभग 4 मिनट के इस संवाद को ध्यान से सुन कर काफी देर रावण को देख कर प्रसन्नचित्त नजर आए। कलाकार अमित तंबोली ऐसे खास अवसरों पर अपनी कलाकारी को धार्मिक प्रसंगों से जोड़कर प्रस्तुत करते हैं जिसकी जनसाधारण में खूब चर्चा तो होती ही है लोग उसकी सराहना भी करते हैं।





