कुसमुंडा गायत्री मंदिर चौक बना ‘हादसो का चौक’: सड़क किनारे सजी दुकानों से लग रहा जाम, भारी वाहनों के बीच जान जोखिम में डाल रहे राहगीर..
कुसमुंडा गायत्री मंदिर चौक बना ‘हादसो का चौक’: सड़क किनारे सजी दुकानों से लग रहा जाम, भारी वाहनों के बीच जान जोखिम में डाल रहे राहगीर..

कोरबा। कुसमुंडा क्षेत्र अंतर्गत गायत्री मंदिर चौक इन दिनों भारी कुप्रबंधन और प्रशासनिक लापरवाही के कारण हादसों का डार्क स्पॉट बनता जा रहा है। एसईसीएल (SECL) खदान और क्षेत्रीय कार्यालयों को जोड़ने वाले इस मुख्य मार्ग पर सड़क के एकदम किनारे बेतरतीब ढंग से सजने वाली सब्जी दुकानों और ठेलों ने आम जनता की आवाजाही को नारकीय बना दिया है। हर वक्त लगने वाले इस जाम के कारण स्थानीय लोग और राहगीर रोजाना अपनी जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं।
सड़क पर बाजार, मोड़ पर फंस रहे भारी वाहन
यह मार्ग बेहद संवेदनशील और व्यावसायिक रूप से व्यस्त है। दिनभर इस चौक से खदानों की ओर जाने वाले डीजल टैंकर, बारूद वाहन, पानी टैंकर, सफाई वाहन और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के ट्रकों समेत दर्जनों भारी वाहनों का आना-जाना लगा रहता है। गायत्री मंदिर के तीखे मोड़ के पास ही मुख्य सड़क को घेरकर सब्जी और ठेले लगा दिए जाते हैं। नतीजा यह होता है कि भारी वाहन इस मोड़ पर आकर फंस जाते हैं और घंटों तक चक्काजाम की स्थिति निर्मित हो जाती है।
बीते रविवार को टला बड़ा हादसा, सहम गए मासूम
इसी अव्यवस्था के चलते बीते रविवार को एक बड़ा हादसा होते-होते टला। सड़क किनारे सब्जी लेने के लिए खड़ी एक कार (CG 12 BN O608) को सफाई करने वाले भारी वाहन ने ठोकर मार दी। जिससे कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। हादसे के वक्त कार के भीतर महिलाएं और बच्चे सवार थे, जिन्हें मामूली चोटें आई हैं। प्रत्यक्षदर्शियों का साफ कहना है कि यदि भारी वाहन की गति थोड़ी और तेज होती, तो रविवार को इस चौक पर लाशें बिछ सकती थीं। इस पूरी घटना की मुख्य वजह वहां लगा हुआ भीषण जाम था।
ज्ञापन पर ज्ञापन, फिर भी कुंभकर्णी नींद में प्रशासन
ऐसा नहीं है कि इस गंभीर समस्या से जिम्मेदार अनजान हैं। पूर्व में स्थानीय पार्षद, विभिन्न श्रमिक संगठन और क्षेत्र के जागरूक नागरिकों द्वारा शासन-प्रशासन समेत एसईसीएल (SECL) प्रबंधन को कई बार लिखित ज्ञापन सौंपे जा चुके हैं। जनहित में लगातार यह मांग की जा रही है कि इन सब्जी दुकानों और ठेलों को किसी अन्य सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित (शिफ्ट) किया जाए।
इसके बावजूद, प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन दोनों ही इस संवेदनशील मुद्दे पर आंखें मूंदे बैठे हैं। जिम्मेदार अधिकारियों की यह अनदेखी और सुस्ती साफ इशारा करती है कि वे शायद गायत्री मंदिर चौक पर किसी बहुत बड़े और दर्दनाक हादसे का इंतजार कर रहे हैं, जिसके बाद ही उनकी कुंभकर्णी नींद टूटेगी। समय रहते यदि कदम नहीं उठाए गए, तो यहां कभी भी बड़ी जनहानि हो सकती है।





