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छत्तीसगढ़ को मिलेगी पहली राजकीय तितली, तीन प्रजातियां दौड़ में; जानिए कौन-कौन शामिल

रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश की समृद्ध जैव विविधता को नई पहचान देने की तैयारी में है। वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग राज्य की पहली राजकीय तितली का चयन करने जा रहा है। इसके लिए तीन प्रमुख प्रजातियों को अंतिम सूची में शामिल किया गया है। इनमें कॉमन बैंडेड पीकॉक, ऑरेंज ओकलीफ और स्पॉट स्वॉर्डटेल शामिल हैं।

राजकीय तितली के चयन के लिए इन प्रजातियों की उपलब्धता, पारिस्थितिक महत्व, संरक्षण मूल्य, विशिष्ट पहचान और आम लोगों के बीच आकर्षण जैसे मानकों को आधार बनाया जा रहा है।

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तीन प्रजातियां अंतिम सूची में

राज्य में तितलियों की प्रजातियों और उनकी आबादी को लेकर वर्ष 2019 से 2024 के बीच व्यापक सर्वेक्षण किया गया। इस अध्ययन में प्रदेश के सभी 33 जिलों को शामिल किया गया। इसका उद्देश्य जंगलों, घासभूमियों और अन्य प्राकृतिक आवासों में मौजूद तितली प्रजातियों का वैज्ञानिक रिकॉर्ड तैयार करना था।

सर्वेक्षण के दौरान जगदलपुर से जुड़े शोधकर्ताओं और विभिन्न संस्थानों ने भी अहम योगदान दिया। अध्ययन से प्रदेश की तितली विविधता और प्राकृतिक आवासों को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई।

छत्तीसगढ़ में दर्ज हुईं 19 नई तितली प्रजातियां

सर्वेक्षण के बाद छत्तीसगढ़ में अब तक 201 तितली प्रजातियों का आधिकारिक दस्तावेजीकरण हो चुका है। इससे पहले प्रदेश में 182 प्रजातियों का रिकॉर्ड उपलब्ध था।

विस्तृत अध्ययन के दौरान 19 ऐसी तितली प्रजातियां पहली बार दर्ज की गईं, जिनका पहले छत्तीसगढ़ में रिकॉर्ड नहीं था। इन नए रिकॉर्ड से प्रदेश की समृद्ध जैव विविधता की तस्वीर और स्पष्ट हुई है।

जंगलों और प्राकृतिक क्षेत्रों में पाई जाने वाली ये रंग-बिरंगी तितलियां प्रदेश के पर्यावरण और प्राकृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

कांगेर घाटी बना तितलियों का प्रमुख ठिकाना

बस्तर स्थित कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान तितलियों की विविधता के लिहाज से खास क्षेत्र के रूप में सामने आया है। यहां 252 से अधिक तितली प्रजातियों की मौजूदगी दर्ज की गई है।

कांगेर घाटी के घने जंगल, जलस्रोत, घासभूमियां और विभिन्न प्रकार की वनस्पतियां तितलियों के लिए अनुकूल प्राकृतिक वातावरण उपलब्ध कराती हैं। यहां के कुछ इलाकों में एक ही स्थान पर 100 से अधिक प्रजातियां देखी जा सकती हैं।

यहां कॉमन जेम, ऑरेंज ओकलीफ, ब्लू टाइगर, प्लेन टाइगर और कॉमन मैप जैसी प्रजातियां प्रमुख रूप से पाई जाती हैं।

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अक्टूबर से फरवरी तक बढ़ती है गतिविधि

कांगेर घाटी में तितलियों की गतिविधियां अक्टूबर से फरवरी के बीच अधिक देखने को मिलती हैं। इस दौरान बड़ी संख्या में प्रकृति प्रेमी और पर्यटक इन रंग-बिरंगी तितलियों को देखने पहुंचते हैं।

अब छत्तीसगढ़ की पहली राजकीय तितली के चयन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद राज्य की जैव विविधता को एक नई पहचान मिलने की उम्मीद है।

Preeti Singh

Priti Singh is a senior journalist at INN24 News with extensive experience covering crime, governance, public policy, and regional affairs in Chhattisgarh Her reporting focuses on factual accuracy, administrative accountability, and issues of public interest. Areas of Expertise • India and Chhattisgarh politics and governance • State and regional affairs (Chhattisgarh) • Public administration • Investigative reporting Editorial Responsibility Priti Singh follows strict fact-checking and editorial standards and adheres to INN24 News’ Editorial Policy. 📧 Contact: manni200390@gmail.com Profile Last Updated: 20 January 2026