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नवा रायपुर में ‘फिल्म सिटी’ के नाम पर करोड़ों की सरकारी और चराई भूमि नीलाम! नियमों को ताक पर रख निजी कंपनी को सौंपा ठेका

विशेष संवाददाता

रायपुर/कोरबा: नवा रायपुर में कला-संस्कृति के संवर्धन के नाम पर एक बड़े प्रशासनिक और वित्तीय खेल का पर्दाफाश हुआ है। ग्रामीणों के निस्तार और मवेशियों की चराई के लिए आरक्षित करोड़ों रुपये की शासकीय भूमि को कागज़ों की बाज़ीगरी से महाराष्ट्र की एक निजी कंपनी को सौंपने का मामला गरमा गया है।

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क्या है पूरा मामला?
वर्ष 2006 में अपर कलेक्टर रायपुर के आदेश द्वारा ग्राम माना (खसरा नं. 1684/2, 1795, 1882/2), ग्राम तूता (खसरा नं. 408/1) और ग्राम निमोरा (खसरा नं. 815, 817) की कुल 40 हेक्टेयर से अधिक शासकीय घास/चराई भूमि को छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 237(2) के तहत केवल ‘पिकनिक स्पॉट’ के रूप में सुरक्षित करने की शर्त पर पर्यटन विभाग को हस्तांतरित किया गया था।

लेकिन छत्तीसगढ़ पर्यटन मण्डल ने 21 नवंबर 2025 को लेटर ऑफ अवॉर्ड (No: 3686/Plg/649(1)1-A/25) जारी कर इस बेहद कीमती निस्तार भूमि को M/s Inderdeep Infra India Ltd (उल्हासनगर, ठाणे, महाराष्ट्र) को DBFOT मॉडल पर ‘चित्रोत्पला फिल्म सिटी’ बनाने के लिए आवंटित कर दिया।


* माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जगपाल सिंह बनाम पंजाब राज्य (2011) के ऐतिहासिक फैसले में यह स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि ग्रामीण निस्तार, चराई और तालाब की सार्वजनिक भूमि को किसी भी व्यावसायिक या निजी उद्देश्य के लिए परिवर्तित नहीं किया जा सकता। नवा रायपुर में चराई की ज़मीन निजी कंपनी को देना सीधे तौर पर न्यायालय के आदेश का उल्लंघन है।
* वर्ष 2006 के मूल आवंटन आदेश में स्पष्ट उल्लेख था कि भूमि केवल ‘पिकनिक स्पॉट’ के लिए सुरक्षित रहेगी। शर्तों का उल्लंघन कर इसे व्यावसायिक कंक्रीट निर्माण (फिल्म सिटी) के लिए निजी हाथों में सौंपना पूरी आवंटन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
* वर्ष 2006 के आदेश में ग्राम माना के खसरा नं. 1684/2 व 1795 स्थित वन विभाग की नर्सरी और निमोरा खसरा नं. 815 पर स्थित वृक्षारोपण को पूरी तरह सुरक्षित रखने की अनिवार्य शर्त थी। फिल्म सिटी निर्माण से इस हरित क्षेत्र का नष्ट होना तय है।


* स्थानीय ग्रामीणों के मवेशियों का चारागााह छीनने के साथ-साथ छत्तीसगढ़ की समृद्ध माटी, स्थानीय कलाकारों और निवासियों को दरकिनार कर बाहरी कंपनी को व्यावसायिक लाभ पहुँचाने का खेल खेला जा रहा है।
उच्च न्यायालय में जनहित याचिका की चेतावनी
स्थानीय सजग नागरिक एवं आवेदक जितेंद्र कुमार साहू (कोरबा) ने मुख्य सचिव और पर्यटन विभाग के उच्च अधिकारियों को इस पूरे मामले की शिकायत पत्र भेजकर तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर इस ‘लेटर ऑफ अवॉर्ड’ को निरस्त कर भूमि को पुनः ग्रामीणों के पारंपरिक निस्तार अधिकारों के लिए बहाल नहीं किया गया, तो वे माननीय उच्च न्यायालय, बिलासपुर के समक्ष जनहित याचिका दायर करेंगे।

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> बड़ा सवाल: क्या शासन-प्रशासन नियम-कायदों की धज्जियां उड़ाकर जारी किए गए इस अवॉर्ड को तत्काल निरस्त करेगा, या फिर यह मामला उच्च न्यायालय के कटघरे में खड़ा होगा?

Preeti Singh

Priti Singh is a senior journalist at INN24 News with extensive experience covering crime, governance, public policy, and regional affairs in Chhattisgarh Her reporting focuses on factual accuracy, administrative accountability, and issues of public interest. Areas of Expertise • India and Chhattisgarh politics and governance • State and regional affairs (Chhattisgarh) • Public administration • Investigative reporting Editorial Responsibility Priti Singh follows strict fact-checking and editorial standards and adheres to INN24 News’ Editorial Policy. 📧 Contact: manni200390@gmail.com Profile Last Updated: 20 January 2026