*पावन श्रावण मास के आखिरी सोमवार को शिवभक्तों का उत्साह चरम पर*
सक्ती से तुर्रीधाम शिवालय तक निकली विशाल कांवड़ यात्रा में हजारों शिवभक्त हुए शामिल*

जिला रिपोर्टर सक्ती- उदय मधुकर
*जिला पंचायत सदस्य आयुष शर्मा व राजा धर्मेन्द्र सिंह पैदल पहुंचे तुर्रीधाम मंदिर, किया जलाभिषेक*
सक्ती ::पावन श्रावण मास के आखिरी सोमवार के दिन 24 अगस्त को सक्ती जिले में शिव भक्तों का उत्साह अपने चरम पर था। इस दौरान श्रद्धा व भक्ति का जबरदस्त माहौल देखने को मिला। इसी क्रम में अंतिम सावन सोमवार के दिन 24 अगस्त को शिव भक्तों ने सक्ती नगर स्थित प्रसिद्ध मां महामाई मंदिर से पवित्र तुर्री धाम तक विशाल कावड़ यात्रा निकाली । इस दौरान शिव भक्तों ने सुप्रसिद्ध मां महामाया मंदिर में कांवड़ पूजा कर यात्रा की शुरूआत की। इस विशाल कांवड़ यात्रा में जिले भर से हजारों शिवभक्त शामिल हुए। इस दौरान रास्ते में जगह-जगह शिव भक्तों ने कांवड़ यात्रियों के लिए पेयजल व नाश्ते की भी व्यवस्था की हुई थी। पूरा दिन अंचल की फिजा बोल बम और हर-हर महादेव के नारों से गुंजायमान होता रहा। इस विशाल कांवड़ यात्रा में जिला पंचायत सदस्य व सभापति आयुष शर्मा तथा सक्ती राजा धर्मेन्द्र सिंह भी शिवभक्तों के साथ कांवड़ लेकर साथ सक्ती से पैदल चलकर तुर्रीधाम पहुंचे और तुर्रीधाम स्थित जिले के सुप्रसिद्ध शिवालय में भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया। इस मौके पर जिला पंचायत द्वय ने भगवान भोलेनाथ से क्षेत्र वासियों के समृद्धि व खुशहाली के लिए प्रार्थना किया। इस मौके पर जिला पंचायत सदस्य आयुष शर्मा ने कहा कि तुर्रीधाम हमारे सक्ती जिले का बहुत प्रसिद्ध शिवालय है। इसकी ख्याति प्रदेश की सीमाओं को लांघते हुए राष्ट्रीय फलक पर भी पहुंचे इस ध्येय के साथ यह कांवड़ यात्रा हो रही है।
इस अवसर पर जिला पंचायत सदस्य आयुष ने श्रावण मास में निकलने वाली कांवड़ यात्रा को भगवान भोलेनाथ के प्रति श्रद्वालुओं की अटूट आस्था व भक्ति के लिए समर्पण की यात्रा बताया। राजा धर्मेन्द्र सिंह ने कहा पवित्र सावन महीने के आखिरी सोमवार के दिन उमड़ी शिवभक्तों की इस भीड़ को भगवान भोलेनाथ का साक्षात आशीर्वाद मिला है। प्रकृति भोलेनाथ का जलाभिषेक करने रिमझिम फुहारों की वर्षा कर रही है। निश्चित ही भक्तजनों को भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त होगा और सबका जीवन खुशहाल बनेगा। कांवड़ यात्रा में साथ चल रहे वरिष्ठ अधिवक्ता चितरंजय पटेल ने इस कांवड़ यात्रा को ऐतिहासिक बताते हुए इस यात्रा को आध्यात्मिक ऊर्जा और भगवान भोलेनाथ के प्रति भक्तों की गहरी आस्था का प्रतीक बताया। इधर अंतिम सावन सोमवार के दिन सुबह से ही पवित्र तुर्री धाम स्थित शिवालय में शिवभक्तों की लंबी कतारें देखी गयी। भक्तजन ओम नम: शिवाय के जयकारों के बीच भक्तों ने भगवान शिव का जलाभिषेक कर परिवार की सुख, शांति व समृद्धि के लिए मंगल कामना किया।






