Chhattisgarh
पत्रकार सुरक्षा कानून को कड़ाई से लागू करने की मांग को लेकर बस्तर जिला के पत्रकार हुए लामबंद, मुख्यमंत्री के नाम बस्तर कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
एक दिवसीय सांकेतिक धरना प्रदर्शन और ज्ञापन देकर सरकार को चेताया,

जगदलपुर । ( रविन्द्र दास ) छग की पूर्व सरकार द्वारा पारित पत्रकार सुरक्षा कानून के प्रावधानों के क्रियान्वयन न होने और पत्रकारों पर सीधे एफआईआर दर्ज किए जाने के मामलों के विरोध में सोमवार दिनांक 15 / 6 / 2026 को अपरांह 12 बजे से दोपहर 2 बजे तक संभाग मुख्यालय जगदलपुर में बस्तर जिला पत्रकार संघ के बैनर तले धरना-प्रदर्शन किया गया।
धरने के माध्यम से पत्रकारों ने मांग की कि छत्तीसगढ़ में लागू पत्रकार सुरक्षा कानून का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। पत्रकारों का कहना है कि पत्रकार सुरक्षा कानून के तहत किसी भी पत्रकार के विरुद्ध सीधे एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकती। कानून के अनुसार पहले डीएसपी स्तर के अधिकारी द्वारा मामले की जांच की जानी आवश्यक है ।
लेकिन कई मामलों में इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया जा रहा है।
धरना स्थल पर उपस्थित पत्रकारों ने कहा कि छत्तीसगढ़ में पत्रकार सुरक्षा कानून वर्ष 2023 से लागू है । इसका विधिवत नोटिफिकेशन भी जारी हो चुका है। इसके बावजूद कानून के प्रावधानों का पालन नहीं होने से पत्रकारों में असंतोष है। बस्तर जिला पत्रकार संघ ने राज्य सरकार से मांग की है कि पत्रकार सुरक्षा कानून के सभी प्रावधानों का सख्ती से पालन कराया जाए तथा पत्रकारों के अधिकारों और सुरक्षा को सुनिश्चित किया जाए।
धरना प्रदर्शन के विषय में जानकारी देते हुए बस्तर जिला पत्रकार संघ के अध्यक्ष मनीष गुप्ता ने कहा कि पिछली सरकार ने पत्रकार सुरक्षा कानून का ड्राफ्ट तैयार किया था ,और उसे विधानसभा में लागू भी किया गया था। लेकिन उस कानून को लागू करना इस सरकार की ज़िम्मेदारी है । परंतु अभी तक कानून को लागू नहीं किया गया, जिससे पत्रकारों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि बस्तर का पत्रकार जान जोखिम में डालकर पत्रकारिता करता है ,लेकिन बस्तर के नक्सल मुक्त होने के बाद 10 से ज्यादा पत्रकारों के विरुद्ध बिना जांच के FIR दर्ज की गई है।
मनीष गुप्ता ने कहा कि पत्रकार संघ इसका विरोध करता है । उन्होंने कहा कि पत्रकार सुरक्षा कानून के तहत समिति बनाकर पत्रकार के खिलाफ जांच की जानी चाहिए और यदि समिति उसे दोषी पाती है तो कानूनी कर्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि मामले में पत्रकारों को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए और हमारी एक सूत्रीय मांग है कि पत्रकारों के विरुद्ध होने वाले फर्जी मामलों को रोका जाए।





