एसडीएम कार्यालय घेरने पहुंचे सैंकड़ों भुविस्थापित,लिखित आश्वासन में बैठक कर समस्याओं के निराकरण का मिला आश्वासन
ओमकार यादव

एसडीएम कार्यालय घेरने पहुंचे सैंकड़ों भुविस्थापित,लिखित आश्वासन में बैठक कर समस्याओं के निराकरण का मिला आश्वासन
घंटों प्रदर्शन के बाद भी भू-विस्थापितों की पीड़ा सुनने नहीं पहुंचे SDM, तहसीलदार को भेजकर झाड़ा पल्ला
29 मई को चंद्रनगर में होगी महा बैठक, लिखित आश्वासन के बाद आंदोलन स्थगित
मांगें पूरी नहीं हुईं तो जून में होगा कोरबा कलेक्टर कार्यालय का ऐतिहासिक घेराव
कटघोरा//कोरबा:- अपनी जायज मांगों और अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे एसईसीएल (SECL) कुसमुंडा क्षेत्र के भू-विस्थापितों का आक्रोश आज उस समय फूट पड़ा जब एक विशाल रैली और घंटों चले उग्र धरना-प्रदर्शन के बावजूद अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) यानी एसडीएम उनकी सुध लेने नहीं पहुंचे प्रशासन की इस संवेदनहीनता से नाराज ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि एसडीएम ने खुद आने के बजाय तहसीलदार को भेजकर अपना पल्ला झाड़ लिया ।
तहसीलदार के सकारात्मक रुख और लिखित आश्वासन पर थमा आंदोलन
एसडीएम के न पहुंचने पर प्रशासनिक प्रतिनिधि के रूप में तहसीलदार श्री केशकर ने आंदोलनकारियों के बीच पहुंचकर मोर्चा संभाला उन्होंने भू-विस्थापितों के सभी संवेदनशील और प्रमुख मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा की काफी जद्दोजहद के बाद प्रशासन की ओर से एक लिखित आश्वासन दिया गया ।
बड़ी बैठक का निर्णय
लिखित आश्वासन के अनुसार आगामी 29 मई 2026 को ग्राम चंद्रनगर में एक उच्च-स्तरीय बैठक आयोजित की जाएगी इस बैठक में एडिशनल कलेक्टर एसडीएम कटघोरा एसईसीएल कुसमुंडा प्रबंधन और प्रभावित ग्रामीण एक मेज पर बैठकर सभी समस्याओं का स्थाई निराकरण करेंगे इस ठोस आश्वासन के बाद भू-विस्थापितों ने फिलहाल अपना आंदोलन स्थगित करने का निर्णय लिया है ।
जून में महा-आंदोलन की चेतावनी,आर-पार की होगी लड़ाई
भू-विस्थापित नेताओं और ग्रामीणों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि 29 मई की बैठक में उनकी समस्याओं का अंतिम और संतोषजनक निराकरण नहीं हुआ तो यह शांत आंदोलन एक उग्र जन-आंदोलन में बदल जाएगा ।
आगामी रणनीति
कलेक्टर घेराव जून 2026 में कोरबा जिले के सभी प्रभावित क्षेत्रों गेवरा दीपका कुसमुंडा बुडबुड सराईपाली और मानिकपुर के हजारों पीड़ित भू-विस्थापित एकजुट होकर कोरबा कलेक्टर कार्यालय का ऐतिहासिक घेराव करेंगे ।
चरणबद्ध आंदोलन
इसके साथ ही क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों के निवास स्थानों का भी चरणबद्ध तरीके से घेराव किया जाएगा जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन की होगी ।
भू-विस्थापितों का कहना है कि वे वर्षों से अपनी जमीनों के बदले रोजगार पुनर्वास और उचित मुआवजे के लिए भटक रहे हैं लेकिन अब वे आर-पार की लड़ाई के लिए बाध्य हो चुके हैं ।






