
Odisha’s Keonjhar Case: ओडिशा के केंदुझर जिले में अपनी बहन का कंकाल बैंक लेकर जाने वाले आदिवासी व्यक्ति की मदद के लिए लोग आए हैं। जीतू मुंडा को अब सरकार और निजी स्तर पर भी सहायता मिलनी शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की दखल पर जिला प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उसे कई सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ दिलाया। अधिकारियों के अनुसार, जीतू मुंडा और उसके भाई के घर में कुछ ही घंटों के भीतर बिजली कनेक्शन मुहैया कराया गया। साथ ही उसे मासिक वित्तीय सहायता वाली एक सरकारी योजना में शामिल किया गया है और राशन कार्ड जारी कर हर महीने 35 किलो मुफ्त चावल देने की व्यवस्था की गई है। घटना सामने आने के 24 घंटे के भीतर उसकी बहन का मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाकर, उसे कानूनी उत्तराधिकारी मानते हुए बैंक में जमा राशि भी सौंप दी गई।
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जीतू मुंडा अपनी बहन कालरा मुंडा के शव के कंकाल को कब्र से निकालकर करीब 3 किलोमीटर पैदल चलकर ओडिशा ग्रामीण बैंक की शाखा पहुंचे थे, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। उनका आरोप था कि बैंक अधिकारियों ने उन्हें बहन को स्वयं लाने और हस्ताक्षर कराने को कहा था, जबकि वह पहले ही उसकी मृत्यु की जानकारी दे चुके थे। इस मामले पर बैंक ने कहा कि यह घटना प्रक्रिया की जानकारी के अभाव और समझ की कमी के कारण हुई। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया कि बैंक कर्मचारियों ने उसके साथ सहयोग नहीं किया।
जिला कलेक्टर विशाल सिंह ने बताया कि मानवीय नजरिया अपनाते हुए प्रशासन ने उसे रेड क्रॉस फंड से 30,000 रुपये की सहायता दी और बहन के खाते में जमा कुल 19,402 रुपये भी उसे दे दिए गए। इसके अलावा, निजी संस्थाओं और लोगों ने भी मदद का हाथ बढ़ाया है। दिल्ली के एक कोचिंग संस्थान ने उसके नाम 10 लाख रुपये जमा किए, जबकि आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने 50 हजार रुपये की सहायता दी है।






