Chhattisgarhछत्तीसगढ

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग सख्त – 285 कैदियों की मौत और रोपवे हादसे पर छत्तीसगढ़ सरकार से मांगा जवाब

रायपुर : मानवाधिकार से जुड़े दो संवेदनशील मामलों में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने छत्तीसगढ़ सरकार के प्रति कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए प्रदेश की जेलों में हुई कैदियों की मौतों और महासमुंद जिले के रोपवे हादसे पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। इस संबंध में राज्य के मुख्य सचिव और जेल विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को नोटिस जारी कर निर्धारित समय सीमा में जवाब देने के निर्देश दिए गए हैं।

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पिछले चार वर्षों में प्रदेश की विभिन्न जेलों में 285 कैदियों की मौत का मामला आयोग की निगरानी में आया है। सरकारी स्तर पर इन मौतों के कारणों में बीमारी और आत्महत्या का उल्लेख किया गया था, लेकिन आयोग ने इसे सामान्य मानने से इनकार करते हुए पूरे घटनाक्रम की गहराई से जांच की आवश्यकता जताई है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि हिरासत में रहने वाले व्यक्तियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य की जिम्मेदारी राज्य की होती है, ऐसे में हर मृत्यु की परिस्थितियों का निष्पक्ष परीक्षण जरूरी है।

नोटिस में जेलों की व्यवस्थाओं को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आयोग ने जेलों में क्षमता से अधिक बंदियों की संख्या, चिकित्सा सुविधाओं की स्थिति, डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ के रिक्त पदों का पूरा विवरण मांगा है। इसके साथ ही यह भी पूछा गया है कि कैदियों के नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और आपातकालीन उपचार की व्यवस्था किस स्तर पर उपलब्ध है। आयोग ने राज्य प्रशासन को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि बंदियों के मानवाधिकारों का संरक्षण प्राथमिकता के आधार पर किया जाए।

इसी के साथ महासमुंद जिले में हुए रोपवे हादसे को लेकर भी आयोग ने सख्ती दिखाई है। इस दुर्घटना में दो लोगों की मौत और कई लोगों के घायल होने की घटना पर संज्ञान लेते हुए प्रशासन से जवाब मांगा गया है। आयोग ने यह जानना चाहा है कि हादसे के समय सुरक्षा मानकों का पालन किस हद तक किया गया था और जिम्मेदारों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई।

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आयोग ने राज्य सरकार से यह भी पूछा है कि घायलों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई या नहीं, तथा मृतकों के परिजनों और प्रभावित लोगों को कितनी मुआवजा राशि दी गई। साथ ही भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं, इसकी भी जानकारी मांगी गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में आयोग की सक्रियता प्रशासनिक जवाबदेही को मजबूत करती है। यदि रिपोर्ट में गंभीर लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई भी संभव है। आने वाले दिनों में इस पूरे प्रकरण पर आयोग की अगली कार्रवाई प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे के लिए महत्वपूर्ण संकेत साबित हो सकती है।

Preeti Singh

Priti Singh is a senior journalist at INN24 News with extensive experience covering crime, governance, public policy, and regional affairs in Chhattisgarh Her reporting focuses on factual accuracy, administrative accountability, and issues of public interest. Areas of Expertise • India and Chhattisgarh politics and governance • State and regional affairs (Chhattisgarh) • Public administration • Investigative reporting Editorial Responsibility Priti Singh follows strict fact-checking and editorial standards and adheres to INN24 News’ Editorial Policy. 📧 Contact: manni200390@gmail.com Profile Last Updated: 20 January 2026