अचानकमार टाईगर रिजर्व : मानव-हाथी द्वंद्व नियंत्रण हेतु राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित

बिलासपुर,वन चेतना केंद्र, बिलासपुर में आज वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग तथा अचानकमार टाइगर रिज़र्व प्रबंधन द्वारा मानव-हाथी द्वंद्व के नियंत्रण एवं वैज्ञानिक प्रबंधन विषय पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई।
कार्यशाला का शुभारंभ तखतपुर विधायक धर्मजीत सिंह द्वारा किया गया। उन्होंने अपने उद्बोधन में वन एवं वन्यप्राणियों के संरक्षण की आवश्यकता पर बल देते हुए अपराधियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की बात कही। इस अवसर पर अचानकमार टाइगर रिज़र्व की प्रमुख उपलब्धियों एवं स्वैच्छिक ग्राम विस्थापन पर आधारित वीडियो का विमोचन भी किया गया।
कार्यशाला की अध्यक्षता प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) श्री अरुण पांडे द्वारा की गई। उन्होंने जमीनी स्तर के कर्मचारियों के अनुभवों के आधार पर प्रभावी रणनीति विकसित करने पर जोर दिया। मुख्य वन संरक्षक, बिलासपुर वृत्त श्री मनोज कुमार पांडेय एवं वनमंडलाधिकारी कटघोरा श्री कुमार निशांत ने ‘सजग ऐप’ के माध्यम से हाथियों की ट्रैकिंग एवं निगरानी प्रणाली की जानकारी दी।
भारत सरकार की प्रोजेक्ट एलिफेंट मॉनिटरिंग कमेटी के सदस्य श्री मंसूर खान ने वन्यजीव गलियारों (कॉरिडोर) के संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने सुरक्षित आवास, पर्याप्त चारा, स्वच्छ जल एवं जनजागरूकता को मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व का आधार बताया।
हाथी विशेषज्ञ श्री प्रभात दुबे ने छत्तीसगढ़ में जंगली हाथियों के मूवमेंट पैटर्न, मौसमी आवागमन, झुंड संरचना, लोनर एवं मस्थ हाथियों के व्यवहार पर वैज्ञानिक अध्ययन प्रस्तुत किया। उन्होंने सैटेलाइट कॉलरिंग की आवश्यकता पर बल दिया, जिससे बेहतर प्रबंधन संभव हो सके।
सरगुजा वन मंडल अधिकारी श्री अभिषेक जोगावत ने सरगुजा वृत्त में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। एआई तकनीक के माध्यम से ट्रैकिंग एवं मॉनिटरिंग पर भी विस्तृत चर्चा हुई।
WWF-India की ओर से डॉ. नवनीतन सुब्रमण्यम (कोयम्बटूर) ने बताया कि भारत में अधिकांश हाथी संरक्षित क्षेत्रों के बाहर निवास करते हैं, जिससे द्वंद्व की घटनाएं बढ़ती हैं। उन्होंने हॉटस्पॉट मैपिंग, वैज्ञानिक विश्लेषण एवं ‘फील्ड मैनुअल 2022’ के अनुरूप राज्य-विशिष्ट कार्ययोजना बनाने पर जोर दिया।
मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी), रायपुर श्रीमती सतोविशा समाझदार ने संरक्षित क्षेत्रों एवं सामान्य वन मंडलों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता बताई। श्रीमती मीतू गुप्ता ने सत्र में प्रस्तुत सभी बिंदुओं का समेकन करते हुए प्रभावी उपायों पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम का समापन अचानकमार टाइगर रिजर्व के उप संचालक द्वारा आभार प्रदर्शन के साथ हुआ। कार्यशाला में रायपुर, बिलासपुर एवं सरगुजा वृत्तों के अधिकारियों, विशेषज्ञों एवं फील्ड स्टाफ की सक्रिय सहभागिता रही।
यह कार्यशाला मानव-हाथी द्वंद्व के प्रभावी, वैज्ञानिक एवं समन्वित प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुई।





