1 लाख पौधों का मिला था लक्ष्य, अब तक केवल 75 हजार पौधों के लिए बीज बोए गए; पन्नी और मजदूरों की कमी बताई वजह, जबकि मनरेगा से होता है श्रमिकों का इंतजाम
पथरिया।(रिपोर्ट -रवि निर्मलकर )
वन विभाग मुंगेली द्वारा चालू सत्र में पथरिया वन परिक्षेत्र के अंतर्गत पथरिया वन डिपो एवं खरसोला नर्सरी में कुल 1 लाख पौधों के उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इन पौधों का उपयोग वर्षा ऋतु में विभिन्न स्थानों पर पौधरोपण एवं वितरण के लिए किया जाना है। हालांकि, विभागीय लक्ष्य के विपरीत अब तक केवल 75 हजार पौधों के लिए ही बीज बोए गए हैं, जिससे लक्ष्य अधूरा रह गया है।जानकारी के अनुसार पथरिया वन डिपो में लगभग 50 हजार तथा खरसोला नर्सरी में मात्र 25 हजार पौधों का उत्पादन कार्य किया गया है। इस प्रकार विभाग अब तक निर्धारित लक्ष्य से 25 हजार पौधे पीछे है, जिससे पौध उत्पादन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।इस संबंध में पथरिया रेंजर सुरेश कुमार सूर्यवंशी ने बताया कि इस सत्र में विभाग द्वारा पथरिया एवं खरसोला वन नर्सिंरी के लिए 1 लाख पौधों का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। पथरिया डिपो में 50 हजार पौधों के लिए बीज बो दिए गए हैं, जबकि खरसोला में पॉलीबैग (पन्नी) समाप्त हो जाने और मजदूरों की कमी के कारण केवल 25 हजार पौधों का ही उत्पादन हो सका है। उन्होंने बताया कि आवश्यक सामग्री एवं श्रमिक उपलब्ध होने के बाद शेष 25 हजार पौधों का उत्पादन भी किया जाएगा।हालांकि विभाग की इस दलील पर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि वन विभाग में नर्सरी एवं पौध उत्पादन का कार्य सामान्यतः मनरेगा के माध्यम से उपलब्ध कराए गए श्रमिकों से कराया जाता है। ऐसे में मजदूर नहीं मिलने का तर्क कई लोगों के गले नहीं उतर रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब श्रमिकों की व्यवस्था मनरेगा के माध्यम से होती है, तब मजदूरों की कमी बताना विभागीय लापरवाही या कार्य में अनियमितता की ओर संकेत करता है।
गौरतलब है कि पौध उत्पादन का कार्य वर्षा ऋतु प्रारंभ होने से पहले पूरा कर लिया जाता है, ताकि मानसून के दौरान समय पर पौधों का वितरण और वृक्षारोपण किया जा सके। लेकिन वर्तमान में भी कई स्थानों पर बीज बोने का कार्य जारी है, जिससे समय पर पौध उपलब्ध कराने को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है।विभाग द्वारा निर्धारित लक्ष्य के बावजूद 25 हजार पौधों का उत्पादन नहीं होना कई सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक कारणों का खुलासा करने तथा यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई की मांग की है






