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सत्ता में रहते किरकिरी कराते थे पूर्व मंत्री भैयालाल रजवाड़े,सत्ता से उतरने के बाद भी बिहारवासियों के लिए किया अपशब्दों का प्रयोग

  • सत्ता में रहते किरकिरी कराते थे पूर्व मंत्री भैयालाल रजवाड़े,सत्ता से उतरने के बाद भी बिहारवासियों के लिए किया अपशब्दों का प्रयोग
  • क्या इसके बाद भी टिकट देगी पार्टी?
  • कोयलांचल क्षेत्र में अधिकांश निवासी बिहार राज्य के,पड़ेगा चुनाव पर असर।
  • साहू समाज से भी खत्म नही हुई दूरी,जबकि बैकुंठपुर विधानसभा क्षेत्र में 25हजार साहू समाज का वोट*

कहते हैं सत्ता का नशा नेताओं व कार्यकर्ताओं पर सर चढ़कर बोलता है,सत्ता के दम पर वे कुछ भी करने पर उतारू रहते हैं। यह दृश्य वर्तमान में तो देखने को मिल रहा है पूर्व में भाजपा शासन के दौरान भी देखने को मिलता था,और उस सत्ता का नशा बैकुंठपुर विधानसभा से पूर्व विधायक और पूर्व कैबिनेट मंत्री भैयालाल रजवाड़े पर भी देखा गया था,सत्ता में केबिनेट मंत्री रहते उन्होंने कई बार सरकार व पार्टी की फजीहत भी करा दी थी,चाहे जापान की तारीफ हो या पूर्व महिला संसदीय सचिव के साथ खड़े रहकर उटपटांग बयानबाजी का मामला हो या फिर लड़कियों के लिए अपशब्दों का मामला, रजवाड़े हर बार सुर्खियों में रहे हैं।
सत्ता गई तो लगा कि अब उनके बयानों पर काबू होगी लेकिन उसके बाद भी उनके बयान ने खूब सुर्खियां बटोरी और फिर उन्होंने व्यक्तिगत लड़ाई में पहुंचकर बिहार राज्य के व्यवसायी को क्षेत्रवाद को लेकर खूब सुनाया यही नहीं उन्होंने अपशब्दों का प्रयोग भी किया,सोशल मीडिया में इसके तमाम सबूत दिखाई भी देते हैं।
तो वर्ष 2018 के चुनाव के पहले बैकुंठपुर विधानसभा के साहू समाज को लेकर रजवाड़े द्वारा की गई टिप्पणी भी उन्हें भारी पड़ गई और साहू समाज ने उनका बायकाट कर दिया था यह मामला भी अभी तक शांत नही हो सका है।

पूर्व खेल मंत्री रहे हैं रजवाड़े

बैकुंठपुर कोरिया से वर्ष 2008 में 5000 वोट से जीतकर विधायक बने भैयालाल रजवाड़े को पहली बार रमन सरकार में संसदीय सचिव बनाया गया उसके बाद 2013 में मात्र 1000 वोट से उनकी जीत हुई थी,इसके बाद उन्हें खेल मंत्री बनाया गया था। खेल मंत्री रहते उन्होंने अपने क्षेत्र में खेल का बड़ा आयोजन कराया जिसमे सरकार की खूब किरीकिरी हुई थी।
इसके बाद 2018 के चुनाव में सर्वे रिपोर्ट खराब होने और क्षेत्र में विरोध के बाद भी रजवाड़े को टिकट दिया गया और 5000 से अधिक मतों के अंतर से उनकी हार हो गई थी।वर्ष 2003 में पार्टी ने पहली बार उन्हें टिकट दिया था उसमे भी हार का सामना करना पड़ा था। 2 बार उनकी हार और 2 बार जीत हुई है,इस बार फिर वे दावेदारी कर रहे हैं।

बयान को लेकर कराई सत्ता की किरकिरी

पूर्व मंत्री भैयालाल रजवाड़े अपने विवादित बयानों को लेकर हमेशा से सुर्खियों में रहे हैं,उन्होंने सत्ता रहते जापान की यात्रा की थी और वहां से वापिस आकर जापान की तारीफ कर फजीहत कराई थी,तो एक सार्वजनिक कार्यक्रम में लड़कियों के विषय पर भी उटपटांग बयानबाजी की।
यही नहीं एक महिला संसदीय सचिव के शपथ ग्रहण के दौरान भी पत्रकारों के समक्ष भी ऐसे अमर्यादित शब्दो का प्रयोग किया था कि महिला संसदीय सचिव समेत अन्य महिला नेत्रियों को भी शर्मिंदगी झेलनी पड़ी थी। हालाकि विवाद उत्पन्न होने पर हर बार उनके द्वारा खुद को सरगुजिहा बताकर बात टाल दिया जाता है।

वर्तमान बैकुंठपुर विधायक भी हुईं रजवाड़े के अपशब्दों का शिकार

बैकुंठपुर क्षेत्र से वर्तमान में कांग्रेस की श्रीमती अंबिका सिंहदेव विधायक हैं, गत वर्ष बैकुंठपुर कोरिया के जनपद सीईओ को हटाने के लिए आयोजित प्रदर्शन कार्यक्रम में भी उन्होंने अंबिका सिंहदेव को लेकर अपशब्दों का प्रयोग किया था जिसके बाद क्षेत्र में उनके खिलाफ धरना प्रदर्शन भी किया गया,उनके पुतले की यात्रा निकालकर चप्पलों से पिटाई तक की गई थी। कांग्रेसियों ने प्रदर्शन कर भैयालाल रजवाड़े की पोल खोली थी।

साहू समाज नही चाहता भैयालाल को मिले टिकट,विरोध में प्रदेश भर में हुआ था पुतला दहन

भैयालाल रजवाड़े ने मंत्री रहते अपनी बयानबाजी से किसी को नही छोड़ा था,उन्होंने चुनाव के ठीक पहले साहू समाज के खिलाफ भी अपशब्द कह डाले थे जिससे समाज ने भैयालाल के खिलाफ काफी आक्रोश दिखाया यहां तक की राजधानी रायपुर समेत कई इलाकों में भैयालाल का पुतला दहन किया गया था। चुनाव में भी साहू समाज ने उनका विरोध किया जिससे की रजवाड़े की हार हुई। बतलाया जाता है कि कोरिया की बैकुंठपुर सीट में साहू समाज के वोटरों की संख्या 25 हजार के पार है, जबकि रजवाड़े समाज के वोटर 18 हजार हैं। जैसा कि चर्चा है भैयालाल को टिकट मिलने पर एक बार फिर सही साहू समाज उनका विरोध कर सकता है। साहू समाज भी यहां से इस बार नया चेहरा चाहता है।

बिहार राज्य के निवासी भी हैं नाराज

लोगो ने सोचा था कि सत्ता जाते ही भैयालाल रजवाड़े अपने उटपटांग बयानबाजी पर काबू करेंगे लेकिन वह उसमे भी सफल नही हुए,दो साल पहले अपने गृह ग्राम के समीप रेलवे स्टेशन के सामने ठेला लगाकर जीवन यापन कर रहे बिहार राज्य के निवासी को भी उन्होंने खूब फटकार लगाई थी,काफी अपशब्दों का प्रयोग किया था,उक्त घटना का वीडियो सोशल मीडिया में अभी भी तैर रहा है,इस घटना ने कोयलांचल क्षेत्र में निवास करने वाले बिहार के निवासियों को भी भैयालाल से दूर कर दिया,जबकि इनकी संख्या हजारों में है।

संघ भी चाहता है बदले चेहरा

राजधानी रायपुर से जुड़े संघ के सूत्रों का मानना है कि इस बार ऐसे लोगो को उम्मीदवार बनाया जाए जो की निर्विवाद हो, सामाजिक हो और संघ को महत्व देता हो। संघ के एक पदाधिकारी ने बताया कि केबिनेट मंत्री रहते भैयालाल रजवाड़े संघ को तवज्जो नहीं देते थे,संघ कार्यकर्ताओं को मान सम्मान तो दूर उनसे दूरी बनाकर रखते थे यही कारण था कि 2018 के चुनाव में संघ ने भी उनका साथ नहीं दिया था। संघ के उक्त पदाधिकारी का भी मानना है कि कोरिया की बैकुंठपुर सीट से इस बार नए चेहरे को मौका दिया जाना चाहिए,संघ के अनुषांगिक संगठनों ने भी चेहरा बदलने की सिफारिश की है।

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