महाबंद/15 गांव के खदान प्रभावित भूविस्थापित 18 सूत्रीय मांगो को लेकर 28 जुलाई को करेंगे कुसकुंडा खदान बंद…. जाने क्या हैं ये महत्वपूर्ण मांगें..

एसईसीएल कुसमुंडा क्षेत्र के 14 से 15 ग्राम के सैकड़ों भूविस्थापित बीते दिनांक 2 जून 2023 को रैली के माध्यम से जिलाधीश कार्यालय पहुंच कर संयुक्त क्लेक्टर को 18 बिंदुओं में समस्या निराकरण बाबत ज्ञापन सौंपे थे। इस दौरान 10 दिवस के भीतर सीएमडी एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में समस्या का निराकरण कराने हेतु निवेदन किया गया था। दस दिवस का समय गुजर जाने के बाद पुनः दिनांक 12/6/2023 को जिलाधीश एवं अपर कलेक्टर महोदय से मुलाकात कर बैठक करा निराकरण करने का निवेदन किया गया। भूविस्थापितो ने आरोप लगाया है की कुसमुंडा प्रबंधन के अधिकारी दशकों से झूठे आश्वासन गोलमोल जवाब देखकर हमें गुमराह करते आ रहे हैं। जिसके कारण प्रबंधन से विश्वास उठ चुका है, फलस्वरूप प्रशासन से समस्या का निराकरण कराने हेतु निवेदन किए थे। ग्रामीण बैठक में विलंब होने से दुखी हैं परेशानी इतनी ज्यादा है कि एक दिन व्यतीत कर पाना मुश्किल हो रहा है। प्रबन्धन के अधिकारियो के गुमराह करने से कई परिवार तबाह हो गए है। यही हाल रहा तो भविष्य में कई परिवार तबाह होंगे एवम यह सिलसिला चलता रहेगा । भूविस्थापित ग्रामीणों ने समस्या का निराकरण नहीं होने से उत्पादन बंद आन्दोलन करने का निर्णय लिया है। दिनांक 28/072023 को कुसमुंडा खदान पूरी तरह से बंद किया जाएगा। यह आन्दोलन तब तक जारी रहेगा जब तक सी एम डी एवम वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा उपरांत सकारात्मक निर्णय नही आ जाता। आंदोलन के दरमियान किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति निर्मित होने पर कुसमुंडा प्रबंधन जवाबदार रहेगा।

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प्रभावित भूविस्थापितो ग्रामीण जनों की मांगे निम्नानुसार है:-

1. कोल इंडिया पॉलिसी 2012 को रद्द कर राज्य की पुर्नवास नीति के तहत रागो ग्रामों की निवासी प्रत्येक खातेदार को रोजगार प्रदान किया जाए। माननीय उच्च न्यायालय ने रत्या बाई प्रकरण में सीआईएल पॉलिसी 2012 को वैधानिक नहीं माना है।

2. पुराने रोजगार प्रकरण में अर्जन के बाद जन्म लिए, एक ही खातेदार की भूमि का अलग-अलग में अजन खाता संयोजन एवं अविवादित रोजगार प्रकरण जो वर्षों से लंबित है, समय सीमा तय कर शीघ्र रोजगार प्रदान किया जाए। ग्राम जटराज के रूप से पट चुके खेत का पुनः सर्वे करवाकर अन्य लाभार्थियों की तरह मध्य प्रदेश पुर्नवास नीति के अनुसार रोजगार प्रदान किया जाए। अभी तक केवल सात व्यक्तियों को रोजगार प्रदान किया गया है, जबकि अनेक लोग

3.अभी भी रोजगार से वंचित है। ग्राम रिसदी, खोडरी, पनिया सोनपुरी, पाली, जटराज चुरैल, अमगाव, गंदरा एवं खैरभावना की भूमि एवं मकान का वर्तमान दर 2022-23 के अनुसार मुआवजा निर्धारण कर मुआवजा प्रदान किया जाए एवं रोजगार की प्रकिया शीघ्र प्रारंभ किया जाए। रोजगार देने में विलंब करने पर प्रत्येक खातेदार को एकमुश्त मासिक राशि के 1 के अनुसार प्रदान किया जाए।

4. शासकीय भूमि दूसरे व्यक्ति की भूमि एवं पारिवारिक सदस्यों की भूमि पर बने मकान का मुआवजा भुगतान 100 प्रतिशत सोलेसियन के साथ किया जाए एवं बसाहट का लाभ प्रदान किया जाए। सोलेसियम नहीं मिलने पर प्राप्त राशि से दूसरे स्थान पर समान क्षेत्रफल का निर्माण करना संभव नहीं है। बसाहट हेतु न्यूनतम 15 डिसमिल भूमि प्रदान किया जाए एवं आवंटित प्लाट का पट्टा प्रदान किया जाए।

5.महगाई को देखते हुए बसाहट के बदले न्यूनतम 25 लाख रूपये प्रदान किया जाए।

6.बसाहट की व्यवस्था पूर्ण होने एवं ग्रामीणों को पूर्ण रोजगार मिलने के उपरांत भूमि एवं मकान का गुआवजा भुगतान

7.प्रदान किया जाए जिससे कि मुआवजा राशि का सदुपयोग हो सके एवं बसाहट स्थल में मकान निर्माण के समय राशि की कमी न हो।

8.जिन ग्रामों में नामांकन सत्यापन की प्रक्रिया चल रही हैं। गांव में शिविर लगाकर पूर्ण कराया जाए।

9.रोजगार, पुर्नवास, मुआवजा भुगतान संबंधी नियमावली एवं परिसंपत्तियों के मुआवजा निर्धारण दर प्रत्येक अर्जित ग्राम में भू विस्थापितों को उपलब्ध कराया जाए।

10. खदान में आउटसोर्सिंग कंपनी में अर्जित एवं प्रभावित ग्राम के बेरोजगार युवकों को अनिवार्यत काम में रखा जाए। खदान में कार्यरत जिन कंपनियों में 12 घंटे कार्य लिया जाता है, उसे निम्नानुसार 8 घंटे किया जाए एवं एचपीसी रेट प्रदान किया जाए।

11.ठेका कर्मियों को उनके कार्य का पेमेंट भुगतान प्रत्येक गाह के निवारित समय में अनिवार्यतः कराया जाए।

12.नगर निगम क्षेत्र की जमीन एवं परिसंपत्तियों का मुआवजा भुगतान नगर निगम की दर से किया जाए।

13. खदान के कारण फसल नुकसान हुआ है, उन व्यक्तियों को भुगतान के नाम पर कई वर्षों से घुमाया जा रहा है जिसमें ग्राम खोडरी, रिसदी, जटराज शामिल है क्षतिपूर्ति शीघ्र भुगतान किया जाए।

14.खदान के कारण जल स्तर नीचे चला गया है। मास्टर प्लान बनाकर पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

15. ब्लास्टिंग से खदान के किनारे स्थित गांव के मकानो में दरार पड़ रही है, बोर रहे हैं छप्पर गिर रहे हैं. प्लास्टर उखड़ रहे है, पत्थर उड़कर छप्पर में गिर रहे हैं जिसके कारण लोगों को अपने मकान में रहने पर भय व्याप्त हो गया है खान सुरक्षा महानिदेशालय (DGMS) के मापदंडों का पालन नहीं किया जा रहा है। मेजर जोन में 20 से 50 मीटर दूरी पर मकान स्थित होने के उपरांत ब्लास्टिंग किया जा रहा है, जबकि नए दिशा निर्देश के अनुसार 500 मीटर के दायरे के भीतर ब्लास्टिंग प्रतिबंधित है।

16. खदान के अंदर सैकड़ों सड़क है इन सड़कों में पानी छिड़काव मात्र औपचारिक होने से प्रदूषण से पूरा क्षेत्र ढका रहता है जिससे आम लोगों, पशु पक्षी एवं जीव जन्तुओं के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ रहा है। मास्टर प्लान तैयार कर प्रदूषण के रोकथाम के लिए तत्काल पहल किया जाए।

17.कुसमुंडा क्षेत्र के भूविस्थापितों के लिए स्थाई रूप से एम्बूलेंस की व्यवस्था की जाए ताकि आपातकालीन स्थिति में चिकित्सालय पहुँचाने की व्यवस्था हो सके।

18.विभिन्न ग्रामों के मूविस्थापितों के इलाज हेतु सोनपूरी स्वास्थ्य केन्द्र में स्थाई रूप से डाक्टर की व्यवस्था की जाए। आस पास स्वास्थ्य केन्द्र न होने के कारण इन ग्रामों के ग्रामीण शासकीय जिला चिकित्सालय कोरबा पर निर्भर रहते है,जिसकी दूरी अत्यधिक है।

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