दलपत सागर की सफाई में पुनः उतरे नगरवासी…तालाब की दयनीय स्थिति को देख हुए विचलित..

 

रविन्द्र दास

 

जगदलपुर inn24  छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े तालाब की सफाई करने के लिए एक बार फिर अभियान छेड़ा गपा है।

 

आप को बतादें यह तालाब सालों से उपेक्षित में पड़ी थी 5 नवंबर 2019 से 26 जनवरी 2020 तक 90 दिन दलपत सागर बचाओ अभियान के सदस्यों एवं नगरवासियों के सहयोग से बड़ा आन्दोलन छेड़ा गया था तब प्रशासन की नींद टूटी थी  और तलाब का सौंदर्यीकरण किया गया.

परन्तु पुनः तालाब गन्दा होने लगा है ।जिसे देख दलपत सागर बचाओ अभियान के सदस्य विचलित हो  उठे और बैठक कर पुनः सफाई अभियान प्रारंभ करने का निर्णय लिया ।

 

अभियान के सदस्यों ने सफ्ताह के दो दिन शनिवार और रविवार को दलपत में श्रमदान करने का निर्णय लिया है।

 

इसी के तहत शनिवार को अभियान के सदस्य सुबह 7 बजे इकट्टा हुये.पहले तो सदस्यों ने दलपत सागर में बने गार्डन की सफाई की फिर तालाब के नीचे उतरे और जलकुम्भी तथा घास आदि को बाहर निकाला।तालाब में बड़ी संख्या में लोगों के द्वारा फेंकें गये शराब की बोतलें,झिल्ली पन्नी,दवाई की शीशियाँ प्लास्टी बोतलें बाहर निकाली गई।अभी भी बड़ी संख्या में जल को दूषित करने वाली सामग्री लोग तलाब में फेंक रहें है।उचित रखरखाव और नगर निगम जगदलपुर द्वारा सफाई की सही क्रियान्वयन नहीं होने के कारण तालाब एक बार फिर से विलुप्त होने की कगार पर आने गया है।शहर के लोगों ने इस तालाब को वापस मूल स्वरूप में लाने के लिए एक वृहद अभियान की थी जो फलीभूत होती नजर नही आ रही है।

 

यही वजह है की एक बार फिर अभियान की शुरुवात शनिवार से प्रारम्भ की गई है । सुबह 7 बजे से 9 बजे तक नगरवासी तालाब में फैली गंदगी और जलकुम्भियों को बाहर निकालने में जुट गयें।एकजुटता का ही नतीजा है कि पहले दिन बड़ी तादाद में कचरा खरपतवार तालाब से बाहर निकाला गया.बस्तर की प्राणदायिनी इंद्रावती नदी को बचाने के लिए शुरू हुई मुहिम ने बस्तर मुख्यालय जगदलपुर में स्थित दलपत सागर बचाने के आन्दोलन को जन्म दिया।अभियान से जुड़े सदस्यों और नगरवासियों ने छतीसगढ़ के सबसे बड़े तालाब को सरंक्षित करने के बेड़ा उठाया है।इंद्रावती नदी के सूख जाने से बस्तर के लोगों ने शासन के प्रति काफी आक्रोश थे. 14 दिन तक पदयात्रा कर इंद्रावती बचाने के लिए बड़ा आंदोलन छेड़ा था।छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े तालाब की दुर्दशा को देखते हुए एक नये अभियान की शुरुआत की थी।

 

pp5 नवंबर से शुरू हुए इस अभियान में लगातार लोग जुड़ते जा रहे हैं।प्रतिदिन उत्साह के साथ लोगों का जमावड़ा दलपत सागर में देखने को मिल रहा था।दलपत सागर के इतिहास पर एक नजर दौड़ाई जाए, तो सन 1772 में राजा दलपत देव ने इस तालाब को शहर के वाटर लेवल तथा निस्तारी के लिए बनाया था।समय के साथ साथ यह तालाब उपेक्षित होने लगा।सौंदर्यीकरण के पूर्व इस विशाल तालाब की स्थिति बद से बदतर हो चुकी थी।हालांकि पूर्व की सरकार में इस तालाब को बचाने का प्रयास किया गया।

 

लेकिन, इच्छाशक्ति की कमी के आगे इस विशाल तालाब की कुछ नहीं चली।आज पुनः परिस्तिथियां पहले की तरह हो चुकी हैं. लगभग 400 साल पहले बस्तर रियासत के महाराजा दलपतदेव ने इस तलाब का निर्माण सिंचाई और निस्तारी के लिये किया था. ग्राम मधोता से 1772 में राजधानी जगदलपुर शहर में शिफ्ट किया गया था।उसी दौरान राजा ने इस विशाल तालाब का निर्माण करवाया।आगे जाकर यह तालाब दलपत सागर के नाम से प्रसिद्ध हुआ

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