रानसरगीपाल के सरपंच द्वारा इस लोकतंत्र भारत देश मे सुना रहे तालीबान फरमान हो रहा सविधान का अपमान जिला प्रशासन बना मुख दर्शक – नरेन्द्र भवानी .. पेसा कानून का हवाला देकर सुनाया गया तालिबान फरमान – निवारण तंत्र अनुच्छेद 32 और 226 के तहत लगाएंगे रिट हो जाएगा दूध का दूध पानी का पानी – नरेन्द्र भवानी

 

रविंद्र दास

जगदलपुर inn24 …छत्तीसगढ़ युवा मंच के संस्थापक नरेन्द्र भवानी ने बयान जारी मे कहा है की कई हफ्तों से रानसरगीपाल के सरपंच द्वारा गांव मे शान्ति भंग करने के उद्देश्य ईसाई मानने वालों को परेशान कर रहे थे बैठक करके बैठको मे बुला रहे थे, गांव के हाट बाजार मे कोई भी ईसाई दूकान या व्यापार नहीं करेगा ऐसा फरमान सुनाया जा रहा था मौखिक रूप से और जिसके बाद स्थानीय ग्रामीण मुलभुत सुविधा की समस्या को लेकर शिकायत किये जिसके बाद पता चला की सड़क एवं पेय जल की बड़ी समस्या गांव मे और जब देखा गया की पेयजल सुविधा के नाम लाखों रुपय कब का निकाला जा चूका है, लाखों रुपय का मुरुमिकारण का पैसा निकाला जा चूका है एवं अन्य कार्य पर भुगतान और जबकि ग्रामीणों द्वारा बताया जाना की यह सब काम तो ग्रामीण देखें नहीं इसी मामले का खुलासा के बाद बदला लेने के उद्देश्य से गांव मे हर घर से एक व्यक्ति को भीड़ मे आने को कहा गया और जो नहीं आएंगे तो 500 रुपय जुर्माना रहेगा की बात कह कर गांव के सैकड़ो लोगो को लेकर पहुँचे जिला कलेक्टर दफ़तर एवं अतिरिक्त पुलिस महोदिया जी को पेसा कानून व 5 विं अनुसूची का हवाला देकर पूरी तरह से गैर सविंधानिक आदेश देने जैसा फरमान का ज्ञापन दिया गया और खुल्लमखुल्ला भारतीय सविधान का अपमान किया गया वही किसी भी जिम्मेदार अधिकारियों ने इस आजाद देश के सविंधान का उल्लेख कर उस भीड़ को किसी प्रकार का कोई नियम कानून नहीं बताये जिससे भीड़ को लगेगा वह सब लोग एक अच्छे धर्म जात के काम को कर रहे है और गांव मे वापस जाकर दूसरे ईसाई व हिन्दू मानने वाले लोगो पर यह फरमान थूपेंगे जिससे शान्ति व्यवस्था भंग होगी कानून व्यवस्था बिगड़ेगी और यह बहुत गलत और किसी राजनीति षड्यंत्र का भाग जैसा दिखाई पड़ता है !*

*क्या है पेसा एक्ट?*

*पेसा एक्ट यानि पंचायतों के प्रावधान (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम, 1996 भारत के अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए पारंपरिक ग्राम सभाओं के माध्यम से स्वशासन सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार द्वारा अधिनियमित एक कानून है। दरअसल अनुसूचित क्षेत्र भारत के संविधान की पांचवीं अनुसूची द्वारा पहचाने गए क्षेत्र हैं। यह अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को विशेष रूप से प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन के लिए विशेष अधिकार देता है। पंचायतों से संबंधित संविधान के भाग 9 के प्रावधानों को अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तारित करने के लिए एक अधिनियम है। ना की धर्म जात के नाम पर भारतीय नागरिको को बहिस्कार करने के लिए नहीं है,और ना ही भारतीय नागरिको को जीवन यापन करने हेतु बाजार मे दूकान लगाने से रोक लगाना नहीं है , और ना ही लोगो को पानी, राशन, से वंचित करना,और ना ही कौन गांव मे रहेगा कौन गांव मे नहीं यह फरमान हेतु भी पेसा एक्ट नहीं फिर क्यूं इस कानून को तोड़मड़ौड कर जबरन अमानवीय कृतीय किया जा रहा है जीवित लोगो पर जानवरो जैसा भरताव किया जा रहा आखिर क्यूं !*

*संविधान क्या है?*

*संविधान देश का सर्वोच्च विधी है। यह सरकार/राज्य/संस्थानों के मौलिक संहिता, संरचनाओं, प्रक्रियाओं, शक्तियों और कर्तव्यों का सीमांकन करने वाले ढांचे का विवरण देता है। इसमें मौलिक अधिकार, राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांत और नागरिकों के कर्तव्य भी शामिल हैं।*

*क्या संविधान मानव अधिकारों के दुरुपयोग को रोक सकता है ?*

*यह नागरिकों के मानवाधिकारों की रक्षा के लिए न्यायपालिका का संवैधानिक जनादेश है। सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के पास मौलिक और अन्य अधिकारों को लागू करने के लिए कार्रवाई करने की शक्ति है। यह निवारण तंत्र अनुच्छेद 32 और 226 के तहत प्रदान किया गया है।*

*धर्मनिरपेक्षता क्या है?*

*संविधान के 42वें संशोधन ने प्रस्तावना में यह अभिकथन किया है की भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है। धर्मनिरपेक्षता का अर्थ है सभी धर्मों को समान सम्मान देना और सभी धर्मों की समान तरीके से रक्षा करना।*

*प्रस्तावना क्या है?

भारतीय संविधान की प्रस्तावना यह घोषणा करती है कि भारत एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य है। इसमें कहा गया है कि भारत के लोग अपने नागरिकों को न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व सुरक्षित करने का संकल्प लेते हैं।

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