Chhattisgarhछत्तीसगढ

जांजगीर-चाम्पा: आनंदम धाम में श्रीमद भागवत ज्ञान सप्ताह महोत्सव, आचार्य देशमुख वशिष्ठ जी दे रहे प्रवचन

जांजगीर चाम्पा जिला के आनंदम धाम मे इन दिनों श्रीमद भागवत ज्ञान सप्ताह महोत्सव का आयोजन हो रहा है, इस महोत्सव मे आचार्य देशमुख वशिष्ठ जी महाराज भागवत कथा का प्रवचन कर रहे है, साथ ही भागवत गीता के उपदेशो को आज के परिवेश से जोड़ कर लोगो को जीने की कला सीखा रहे है,, मोटिवेशन स्पीकर के रूप मे प्रवचन कर रहे महाराज को सुनने के लिए महिलाओ और युवाओ मे भारी उत्साह देखा जा रहा है,, आचार्य देशमुख वशिष्ठ जी ने मिडिया से चर्चा करते हुए बताया कि उन्होंने भगवान कृपा से 5 वर्ष की आयु से ही सत्संग करना शुरु कर दिया था और अब देश के कोने कोने मे भागवत कथा, राम कथा और शिव कथा सुनाते है और सभी को पुराणों के गुण रहस्य को आसान शब्दों मे सुना कर सार बताते है,, इससे यदि कुछ लोगो के जीवन मे बदलाव आ जाता है तो बड़ी सफलता होंगी,, उन्होंने अपनी कविता की एक पंक्ति सुनाते हुए आज के जनता और सरकार के क्रिया कलाप को आसान शब्दों मे बताया,, उन्होंने कहा माता पिता के चारो पैर मे चारो धाम है, कही तीर्थ मे जाने की जरूरत नहीं माता पिता और बुजुर्गो की सेवा ही सबसे बड़ा तीर्थ है,,, आचार्य देशमुख वशिष्ठ ने प्रेमानन्द महाराज और जगद गुरु राम भद्राचार्य के विषय मे बड़ी सहजता से कहा दोनों ही विद्वान है और प्रेमानन्द महाराज ईश्वर प्रेम की चरम पर है,दोनों ही सम्मानीय है,,, और दोनों का ज्ञान अपार है,,

Congress-BJP कार्यकर्ताओं में भिड़ंत, लाठी-डंडों से हुई झड़प.. राहुल की रैली में PM Modi के अपमान पर पटना में घमासान

आचार्य देशमुख वशिष्ठ महाराज ने कहा कि प्राचीन ग्रन्थ मे महिलाओ के सम्मान वाले स्थान मे देवताओ का वास होने की संज्ञा दी गई है लेकिन आज महिलाओ ने पश्चिमी करण को अपनाना शुरु कर दिया है और खान पान रहन सहन सभी बदल गया है, उन्होंने कहा कि सनातन धर्म को नष्ट करने के लिए सभी युगो मे दुष्ट प्रवृत्ति के लोग विरोध करते रहे लेकिन सनातन धर्म आज भी चिरस्थाई बना हुआ है,,उन्होंने कहा अपनी कविता की कुछ पक्तियां सुनाते हुए आज के परिवेश पर व्यंग किए और कहा

Vyapam Recruitment: अपेक्स बैंक में भर्ती के लिए 7 सितंबर को होगी परीक्षा

मेरे मुरली वाले श्याम अब तो चाहिए तुझको होगा ,
तेरी ही इन्तजार मे है सारा ही जमाना,,

बोतल मे दूध वी भी कही कही है,,

दही अब तेरे वास्ते कही भी नहीं है,

माखन तो तुझको ही बैकुंठ से है लाना,,,

जिनको तू पूजता है, वो आज क़त्ल होती है,,,

बैठी हुई लीडरो की जान को वो रोती है,,

पर इन्हे रोती देख कर तू आंसू ना बहाना,,

बंशी वाले श्याम अब तो चाहिए तुझको आना,