एसबीआई बैंक परिसर में शौचालय की भारी किल्लत: महिलाओं को उठानी पड़ रही है शर्मिंदगी, जिम्मेदार मौन
सतपाल सिंह के साथ ओम गवेल की खबर
एसबीआई बैंक परिसर में शौचालय की भारी किल्लत: महिलाओं को उठानी पड़ रही है शर्मिंदगी, जिम्मेदार मौन

कुसमुंडा (कोरबा)। छत्तीसगढ़ के ऊर्जाधानी कोरबा जिले अंतर्गत आने वाले कुसमुंडा आदर्श नगर स्थित भारतीय स्टेट बैंक (SBI) परिसर में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव सामने आया है। बैंक में हर दिन सैकड़ों की तादाद में एसईसीएल (SECL) कर्मी, स्थानीय निवासी और दूर-दराज के ग्रामीण अंचलों से लोग अपने वित्तीय कार्यों के लिए पहुंचते हैं। लेकिन बेहद शर्मनाक बात है कि इतने बड़े और व्यस्त बैंक परिसर में आम जनता के लिए शौचालय (टॉयलेट) की कोई व्यवस्था नहीं है।
इस घोर लापरवाही का सबसे खमियाजा महिलाओं को भुगतना पड़ रहा है। बैंक आने वाली महिला उपभोक्ताओं को प्रसाधन के लिए खुले में जाना पड़ता है, जिससे उन्हें भारी मानसिक पीड़ा और शर्मिंदगी से जूझना पड़ रहा है।
‘स्वच्छ भारत’ के दावों की खुली पोल
एक तरफ जहां देश में ‘स्वच्छ भारत अभियान’ और ‘ओडीएफ’ (खुले में शौच मुक्त) के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, वहीं देश के सबसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ‘एसबीआई’ की कुसमुंडा शाखा इन दावों को ठेंगा दिखा रही है। बैंक परिसर में पेयजल और विशेषकर शौचालय जैसी मूलभूत सुविधा का न होना बैंक प्रबंधन की असंवेदनशीलता को उजागर करता है।
ग्रामीण और एसईसीएल कर्मियों का प्रमुख केंद्र
कुसमुंडा क्षेत्र व्यापारिक और औद्योगिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है।
यहां प्रतिदिन: सैकड़ों एसईसीएल कर्मचारी अपने वेतन और अन्य कार्यों के लिए आते हैं।
* दूर-दराज के ग्रामीण अंचलों से बुजुर्ग, पेंशनभोगी और महिलाएं अपनी जमा-पूंजी और सरकारी योजनाओं की राशि निकालने पहुंचते हैं।
* लंबा इंतजार: बैंक के कामकाज के सिलसिले में लोगों को घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ता है। ऐसे में प्राकृतिक हाजिर आने पर लोगों के पास खुले में जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।
क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की उदासीनता
स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस गंभीर जनसमस्या पर क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि भी पूरी तरह आंखें मूंदे बैठे हैं। चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करने वाले नेता आज जनता की इस बुनियादी और सम्मान से जुड़ी समस्या पर मौन हैं। क्षेत्र के जागरूक नागरिकों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों की इस उदासीनता के कारण ही बैंक प्रबंधन के हौसले बुलंद हैं और वे जनता की सहूलियत को लेकर लापरवाह बने हुए हैं।
उठ रही है तत्काल निर्माण की मांग
बैंक आने वाले उपभोक्ताओं और स्थानीय ग्रामीणों ने बैंक के उच्च अधिकारियों और जिला प्रशासन से मांग की है कि कुसमुंडा आदर्श नगर एसबीआई परिसर में महिलाओं और पुरुषों के लिए तत्काल सर्वसुविधायुक्त पृथक शौचालय की व्यवस्था की जाए। यदि जल्द ही इस दिशा में कदम नहीं उठाए गए, तो स्थानीय स्तर पर बैंक प्रबंधन के खिलाफ आक्रोश भड़कना तय है।





