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CG Crime News : सटोरियों को पकड़ने दूध वाला, सब्जीवाला बनकर पुणे पहुंची रायपुर पुलिस, सात दिन तक बिछाया जाल और फिर 26 को दबोचा

रायपुर : महाराष्ट्र पुणे के भारती विद्यापीठ क्षेत्र और राजदीप अपार्टमेंट में दो फ्लैट किराए पर लिए गए थे। अपार्टमेंट के तीसरे फ्लोर पर सट्टे का संचालन चल रहा था। सभी पैनल रायपुर के पप्पू जेठवानी द्वारा संचालित किया जा रहा था। वह फरार है। पतासाजी की जा रही है। जहां सट्टा चल रहा था, वहां नौ फ्लोर होने की वजह से पुलिस को आरोपितों को पकड़ना मुश्किल हो रहा था। सात दिनों तक पुलिस कर्मियों ने दूधवाला-सब्जीवाला और ड्राई क्लीनर्स बनकर फ्लैट की रेकी की। 10 से 12 फ्लैट में किसी न किसी बहाने पुलिस ने प्रवेश किया। इसके बाद जब आधी रात को दोनों फ्लैट में दबिश देकर दबोचा। एसएसपी संतोष सिंह का कहना है कि कई और लोगों का नाम चला है, जिनकी पतासाजी में पुलिस की टीमें लगी हुई हैं। मिले बैंक खातों की डिटेल निकाली जा रही है।




फ्लैट के बाहर केवल पब जाने के लिए निकलते थे

पुलिस ने जिन 26 सटोरियों को गिरफ्तार किया है, उन्होंने पूछताछ में पुलिस को बताया कि वो फ्लैट के बाहर सिर्फ पब जाने और पार्टी करने के लिए निकलते थे। इसके अलावा खाने-पीने और शापिंग से जुड़ी सभी चीजें फ्लैट के दरवाजे पर ही आर्डर से मंगा ली जाती थी। आरोपितों ने तीन कुक भी रखे थे, जो इन सटोरियों को मनपसंद खाना बनाकर देते थे। यही बाहर जाकर भी जरूरी चीजें ले आया करते थे।

पुलिस की कार्रवाई पर रहती है नजर

पैनल के संचालकों द्वारा लगातार पुलिस की कार्रवाई पर नजर रखी जाती है। पिछले दिनों रायपुर पुलिस ने गोवा से आठ आरोपितों को गिरफ्तार किया था, जिसके बाद संचालक द्वारा न्यू पेपर पर नजर रखी जा रही थी। पुलिस क्या कर रही, इस पर ध्यान था। कार्रवाई के बाद कुछ दिनों तक किसी भी नए व्यक्ति को टीम में शामिल नहीं किया जाता गया।

गिरफ्तार आरोपित दुबई में ले चुका है ट्रेनिंग

गिरफ्तार आरोपितों में से वैशाली नगर थाना जिला दुर्ग निवासी सौरभ शुक्ला (27) दुबई में ट्रेनिंग ले चुका है। वह पैसे के ट्रांजेक्शन की तीन महीने की ट्रेनिंग लेकर दुबई से लौटा था। उसे पुलिस तीन बार गिरफ्तार कर चुकी है। इससे पहले ओडिशा से गिरफ्तार किया गया था। उस दौरान उसने बताया था कि वहां 70 से ज्यादा लोग दुबई में ट्रेनिंग ले रहे हैं।

20 से 25 हजार रुपये वेतन

गिरफ्तार आरोपितों ने बताया कि तीन शिफ्ट में काम चलता था। सभी का काम बंटा हुआ था। महीने में 20 से 25 हजार वेतन मिलता था। किसी को भी बाहर जाने की अनुमति नहीं थी। फोन पर स्वजन को भी बताने से पहले ही मना कर दिया जाता था। पहले एक पैनल चलता है जब लोग बढ़ते हैं तो संचालक द्वारा उसे बढ़ा दिया जाता है।

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70 हजार रुपये के किराए में फ्लैट

पुणे दो फ्लैट किराए पर लिए गए थे। 70-70 हजार रुपये फ्लैट का किराया था। लगभग छह महीने से ये लोग यहां रह रहे थे। वहीं से संचालक कर रहे थे।

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