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न दशहरे पर रावण जलता है, न होली पर होलिका! छत्तीसगढ़ के इस गांव की अनोखी मान्यता जानकर रह जाएंगे हैरान

धमतरी : भारत में दशहरा और होली जैसे त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक माने जाते हैं। दशहरे पर रावण दहन और होली से पहले होलिका दहन की परंपरा देशभर में निभाई जाती है। लेकिन छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में एक ऐसा गांव है, जहां इन दोनों परंपराओं का पालन नहीं किया जाता। इतना ही नहीं, गांव की सीमा के भीतर किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर उसका अंतिम संस्कार भी नहीं किया जाता। तेलीनसत्ती गांव में सदियों से चली आ रही इस अनूठी परंपरा के पीछे सत्ती माता से जुड़ी एक मान्यता है।

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करीब 800 साल पुरानी मान्यता से जुड़ी है कहानी

ग्रामीणों और बुजुर्गों के अनुसार, तेलीनसत्ती गांव की यह परंपरा लगभग 800 साल पुरानी है। मान्यता है कि प्राचीन समय में गांव में पानी का गंभीर संकट पैदा हो गया था। गांव के तालाब का मिट्टी से बना बांध टूटने लगा था और पानी तेजी से बाहर निकल रहा था। ऐसी स्थिति में एक व्यक्ति ने बांध को बचाने के लिए मिट्टी के साथ खुद को उसके सामने लगा दिया। इस प्रयास के दौरान उसकी मृत्यु हो गई।

कहा जाता है कि पति की मौत की खबर सुनकर उसकी पत्नी ने भी अपने प्राण त्याग दिए थे। ग्रामीणों की मान्यता के अनुसार, महिला सती हो गई थीं। इसके बाद उन्हें गांव की आराध्य देवी के रूप में पूजा जाने लगा। स्थानीय परंपरा के मुताबिक, उन्हीं के नाम पर गांव का नाम तेलीनसत्ती पड़ा और लोग उन्हें सत्ती माता के रूप में पूजते हैं।

गांव की सीमा के भीतर नहीं जलती चिता

तेलीनसत्ती गांव की सबसे खास परंपराओं में से एक यहां अंतिम संस्कार से जुड़ी है। ग्रामीण मान्यता के अनुसार, गांव की सीमा के भीतर किसी व्यक्ति की चिता नहीं जलाई जाती। किसी की मृत्यु होने पर शव को सम्मानपूर्वक पड़ोसी गांव की सीमा तक ले जाया जाता है, जहां अंतिम संस्कार किया जाता है।

ग्रामीणों का विश्वास है कि गांव की सीमा के भीतर आग जलाने से सत्ती माता नाराज हो सकती हैं। बुजुर्गों के अनुसार, अतीत में इस परंपरा का उल्लंघन करने पर कुछ लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा था। हालांकि, इन घटनाओं और उनसे जुड़ी मान्यताओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

रावण दहन और होलिका दहन से भी परहेज

तेलीनसत्ती गांव में धार्मिक परंपराओं के तहत सार्वजनिक रूप से अग्नि प्रज्वलित करने से परहेज किया जाता है। इसी मान्यता के चलते यहां दशहरे पर रावण दहन और होली से पहले होलिका दहन नहीं किया जाता। ग्रामीण इन परंपराओं को सत्ती माता के प्रति अपनी आस्था और सम्मान से जोड़कर देखते हैं।

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आज भी कायम है सदियों पुरानी परंपरा

आधुनिक दौर में भी गांव के लोग अपनी इस मान्यता का पालन करते आ रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, शुभ कार्यों की शुरुआत सत्ती माता का आशीर्वाद लेकर की जाती है। तेलीनसत्ती की यह परंपरा छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति, धार्मिक आस्था और ग्रामीण जीवन से जुड़ी मान्यताओं की एक अलग तस्वीर पेश करती है। करीब आठ शताब्दियों से चली आ रही इस परंपरा के पीछे की कहानी आज भी गांव के लोगों की आस्था का अहम हिस्सा बनी हुई है।

Preeti Singh

Priti Singh is a senior journalist at INN24 News with extensive experience covering crime, governance, public policy, and regional affairs in Chhattisgarh Her reporting focuses on factual accuracy, administrative accountability, and issues of public interest. Areas of Expertise • India and Chhattisgarh politics and governance • State and regional affairs (Chhattisgarh) • Public administration • Investigative reporting Editorial Responsibility Priti Singh follows strict fact-checking and editorial standards and adheres to INN24 News’ Editorial Policy. 📧 Contact: manni200390@gmail.com Profile Last Updated: 20 January 2026