भाजपा-कांग्रेस ने नही दिया है अपने ही कई उम्मीदवारों को बी-फार्म.. चुनावों में क्या होता है "बी-फार्म"?.. पढ़े रोचक बातें. || INN24

भाजपा-कांग्रेस ने नही दिया है अपने ही कई उम्मीदवारों को बी-फार्म.. चुनावों में क्या होता है "बी-फार्म"?.. पढ़े रोचक बातें.

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यह कोई टिकट नहीं होकर चुनाव आयोग का फॉर्म बी है. फॉर्म बी में कोई भी पार्टी चुनावों में जिसे उम्मीदवार बनाती है,

चुनाव हो तो टिकट की बात शुरू हो जाती है. टिकट की दावेदारी, टिकट की मारामारी जैसी बातें सुनने को मिलती हैं. ये टिकट होता क्या है?

दरअसल, यह कोई टिकट नहीं होकर चुनाव आयोग का फॉर्म बी है. फॉर्म बी में कोई भी पार्टी चुनावों में जिसे उम्मीदवार बनाती है, उसका नाम और एक वैकल्पिक उम्मीदवार का नाम पता लिखा जाता है. उसके नीचे पार्टी के अध्यक्ष के हस्ताक्षर होते हैं, यही पार्टी का टिकट है.


आपको बता दे कि फॉर्म बी के साथ फॉर्म ए भी होता है, जिसमें पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रदेशाध्यक्ष को उम्मीदवार नामांकित करने के लिए अधिकृत करता है. आम बोलचाल में टिकट कहे जाने वाले फॉर्म बी के साथ फॉर्म ए को भी नामांकन भरते समय रिटर्निंग ऑफिसर को जमा करवाना होता है. दोनों फॉर्म एक साथ नामांकन भरने की अंतिम तारीख तक दोपहर बाद तीन बजे तक जमा करवाने होते हैं.

लगती है पार्टी की सील.

फॉर्म बी पर पार्टी के चुनाव चिह्न का ठप्पा लगता है और प्रदेश अध्यक्ष के हस्ताक्षर के नीचे पार्टी की सील लगती है. पार्टियां चुनावों में उम्मीदवार तो घोषित कर देती हैं, लेकिन फॉर्म बी व ए ऑब्जर्वर के साथ नामांकन के एक-दो दिन पहले भिजवाती हैं.

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