
Hindi Diwas 2026 Famous women authors: हिंदी सिर्फ एक भाषा नहीं, एक सांस्कृतिक चेतना है। इस चेतना को गढ़ने में जिन हाथों की स्याही सबसे गहरी रही, उनमें महिला लेखिकाओं का योगदान अक्सर कम आंका गया। विश्व हिंदी दिवस 2026 के मौके पर यह जरूरी है कि हम उन महिलाओं को याद करें, जिन्होंने हिंदी साहित्य को घर-आंगन से उठाकर वैश्विक मंच तक पहुंचाया। इन लेखिकाओं ने कभी कविता के जरिए, कभी कहानी में स्त्री का सच उकेरकर, तो कभी उपन्यासों में समाज से सीधा सवाल पूछकर हिंदी साहित्य पर अपनी अमिट छाप डाली। विश्व हिंदी दिवस पर भारत की इन महिलाओं के बारे में विस्तार से जानते हैं जो अपने कुशल हिंदी लेखन के माध्यम से युग निर्माता बन गईं।
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महादेवी वर्मा
महादेवी वर्मा हिंदी साहित्य की वह स्तंभ हैं, जिनके बिना छायावाद अधूरा है। उन्होंने स्त्री की पीड़ा को करुणा नहीं, चेतना बनाया। महादेवी वर्मा ने नीहार, रश्मि और यामा जैसी रचना से हिंदी साहित्य को समृद्धि बनाया। उन्हें पद्म भूषण और ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। महादेवी वर्मा ने अपने कुशल लेखन से हिंदी कविता को आत्मा दी। महादेवी जी ने स्त्री को दया की पात्र नहीं, संवेदनशील और स्वतंत्र इकाई के रूप में स्थापित किया।
सुभद्रा कुमारी चौहान
साहित्य में राष्ट्रवाद की मशाल सुभद्रा कुमारी चौहान ने जलाई थी। उन्हें खूब लड़ी मर्दानी जैसी कविता लिखी। हालांकि ये सिर्फ एक कविता नहीं है, भारत की आत्मा है। सुभद्रा कुमारी चौहान ने हिंदी साहित्य को देशभक्ति और स्त्री-शौर्य से जोड़ा। उनकी रचनाओं में झांसी की रानी और वीरों का कैसा हो वसंत शामिल है। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भागीदारी निभाई और सरल भाषा में गहरा संदेश दिया। उन्होंने साबित किया कि हिंदी साहित्य सिर्फ भावुक नहीं, क्रांतिकारी भी हो सकता है।
मन्नू भंडारी
मन्नू भंडारी ने हिंदी कथा साहित्य में वह लिखा, जिसे समाज बोलने से डरता था। वह स्त्री के अंतर्मन की सच्ची कथाकार थीं। उनके प्रमुख कृतियों में आपका बंटी और महाभोज का नाम शामिल है। उन्होंने विवाह, मातृत्व, अकेलेपन और स्त्री की पहचान को बिना सजावट के पेश किया। उनकी लेखनी ने बताया स्त्री का संघर्ष निजी नहीं, सामाजिक है।
महाश्वेता देवी
महाश्वेता देवी का साहित्य व्यवस्था से टकराया। हालांकि उन्होंने बांग्ला में भी लिखा, लेकिन हिंदी अनुवादों ने उन्हें जन-जन तक पहुंचाया। अपने लेखन के जरिए वह आदिवासी और हाशिए के समाज की आवाज बनीं। उन्होंने साहित्य को एक्टिविज़्म बनाया और सत्ता के खिलाफ निर्भीक लेखन किया। महाश्वेता देवी ने दिखाया कि साहित्य का काम सिर्फ सुंदर होना नहीं, सच बोलना भी है।
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कृष्णा सोबती
कृष्णा सोबती ने हिंदी को उसकी परंपरागत मर्यादा से बाहर निकाला और भाषा की स्वतंत्रता की प्रतीक बनीं। उनकी प्रमुख कृतियां हैं, मित्रो मरजानी और जिंदगीनामा। उन्होंने स्त्री की देह, इच्छा और स्वाभिमान को बिना झिझक शब्द दिए। उनकी लेखनी ने समाज को असहज किया और यही साहित्य का असली काम है।
चित्रा मुद्गल
चित्रा मुद्गल स्त्री और श्रमिक वर्ग की आवाज बनीं। चित्रा मुद्गल ने हिंदी साहित्य में कामकाजी स्त्री और मजदूर वर्ग की सच्ची तस्वीर रखी। उन्होंने आवां और पोस्ट बॉक्स नंबर 203 जैसी कृतियों से लेखन को आंदोलन बना दिया।





