Chhattisgarh News : छत्तीसगढ़ सरकार ने अवैध कॉलोनियों पर कसा शिकंजा, अब उल्लंघन करने वालों को 3 से 7 साल की सजा

Chhattisgarh News : अवैध कॉलोनी निर्माण और अवैध प्लॉटिंग पर अब कड़ा शिकंजा कसने की तैयारी है। शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने इस संबंध में सभी नगर निगम आयुक्तों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। आदेश में कहा गया है कि नगर पालिका अधिनियम 1956 की धारा 292(ग)(3) के तहत अवैध कॉलोनी निर्माण करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। जारी निर्देशों के अनुसार, जो भी व्यक्ति अवैध कॉलोनी निर्माण या इसके लिए प्रेरित करेगा, उसे न्यूनतम तीन वर्ष से अधिकतम सात वर्ष तक के कारावास की सजा दी जा सकती है।
1 लाख जुर्माना और..
साथ ही कम से कम एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया जाएगा। इतना ही नहीं, न्यायालय दोषी व्यक्ति को संबंधित नगर निगम को प्रतिकर (क्षतिपूर्ति) राशि देने का आदेश भी दे सकेगा। यह राशि अवैध कॉलोनियों के विकास पर होने वाले संभावित खर्च को ध्यान में रखते हुए तय की जाएगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि अधिनियम की धारा 396 के तहत अभियोजन की प्रक्रिया का कड़ाई से पालन किया जाए। किसी भी मामले में न्यायालय तभी सुनवाई करेगा, जब नगर निगम आयुक्त या उनके द्वारा अधिकृत अधिकारी की विधिवत हस्ताक्षरित शिकायत प्रस्तुत की जाएगी। अन्य किसी प्रकार की शिकायत पर संज्ञान नहीं लिया जाएगा।
अवैध प्लॉटिंग से राजस्व का नुकसान भी
एक तरफ सरकार कस्बाई क्षेत्रों से लेकर शहरों के मास्टर प्लान सुधारने की कोशिश में जुटी है तो दूसरी तरफ अवैध प्लाटिंग ने प्रदेश की सूरत बिगाड़ दी है। राजधानी से लेकर दुर्ग-भिलाई, जगदलपुर, बिलासपुर,राजनांदगांव, धमतरी, कर्वधा, रायगढ़, कोरबा, अंबिकापुर आदि जिलों में अवैध प्लॉटिंग का बोलबाला है। नियमों के बाद भी अब तक नगरीय निकायों ने न्यायलय को जमीन का गोरखधंधा करने वालों का काला चिट्ठा नहीं दिया है। राज्य सरकार ने अब नगरीय प्रशासन के माध्यम से सभी कमिश्नरों को फटकार लगाते हुए इस पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
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सख्त कार्रवाई के निर्देश
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने सभी नगर निगम आयुक्तों को निर्देशित किया है कि अवैध कॉलोनी निर्माण के मामलों में त्वरित जांच कर नियमानुसार अपराध दर्ज करें और दोषियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित करें। सरकार के इस कदम को शहरी क्षेत्रों में अवैध प्लॉटिंग और अनियंत्रित कॉलोनियों पर रोक लगाने की दिशा में बड़ा निर्णय माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इस सख्ती से न केवल अवैध निर्माण पर लगाम लगेगी, बल्कि शहरों के नियोजित विकास को भी मजबूती मिलेगी।





