
स्विफ्ट डिजायर फर्जी नामांतरण मामले में आज दिनांक तक किसी भी प्रकार की कार्रवाई देखने को नहीं मिली है क्या यह पूरा एक सिंडिकेट चल रहा है जिससे शासन को राजस्व का चूना लगाया जाता है आइए समझते हैं क्या कुछ चल रहा है।
कोरबा क्योंकि औद्योगिक क्षेत्र है यहाँ कमर्शियल गाड़ियों की बिक्री पूरे छत्तीसगढ़ में सर्वाधिक होती है चाहे वह मालवाहक हो चाहे प्राइवेट टैक्सी दोनों की बिक्री कोरबा जिला में ज्यादा देखने को मिलती हैं, इसलिए तमाम फाइनेंस कंपनी अपना व्यापार करने के लिए कोरबा में कार्यरत है चोलामंडलम जोकि एक निजी कंपनी है गाड़ी के फाइनेंस एवं इंश्योरेंस में चोलामंडलम का एक प्रतिष्ठित नाम है।
गाड़ी की खरीदी बिक्री के बाद पैसों का रिकवरी एक बहुत बड़ा टास्क कंपनी के लिए होता है कई मामले रिकवर कर लिए जाते हैं कई मामलों में गाड़ी को सीज या सरेंडर करवाया जाता है तब इन सब मामलों में सरकारी दफ्तर के चक्कर न काटने पड़ें इसीलिए तमाम फाइनेंस कंपनी किसी न किसी आरटीओ एजेंट से अपने सभी कामों को निपटा लिया करते हैं। स्विफ्ट नामांतरण मामले में चोलामंडलम ने एजेंट संतोष राठौर को इस नामांतरण की प्रक्रिया को पूर्ण कराने की जिम्मेदारी दी क्योंकि यह व्यापार है और काम निजी कंपनी का है उन परिस्थितियों में संतोष राठौर ने भी एक अच्छी खासी रकम चोलामंडलम से ली होगी और सरकारी झंझट में ना उलझे और काम को बड़े ही सरल तरीके से निपटा देने के लिए चोलामंडलम ने संतोष राठौर को एक अच्छी रकम दी होगी, उसके बाद चालू हुआ फर्जी नामांतरण की प्रक्रिया के लिए आरसी बुक की ओरिजिनल प्रति अनिवार्य रूप से कार्यालय में प्रस्तुत करनी पड़ती है इस प्रक्रिया में एक फर्जी आवेदन कोरिया जिला के चर्चा थाना में दिया गया जिसमें पूर्व वाहन स्वामी के फर्जी हस्ताक्षर एवं दस्तावेजों का उपयोग कर आरसी बुक की डुप्लीकेट प्रति प्राप्त कर ली गई और उसके बाद नामांतरण की प्रक्रिया में भी जहां पर पूर्व वाहन स्वामी भागीरथी यादव को स्वयं प्रस्तुत होकर दस्तावेजों पर साइन करना होता है उन जगहों पर भी उनकी सहमति के बगैर एवं उनकी अनुपस्थिति में उनके हस्ताक्षर एवं उनके दस्तावेजों का उपयोग कर एजेंट संतोष राठौर ने अधिकारी एवं कर्मचारियों से नजदीकी का फायदा उठाकर इस पूरे प्रकरण को मलाई की तरह निपटा दिया।
क्या होनी थी प्रक्रिया
गाड़ी का नामांतरण भागीरथ यादव के बाद चोलामंडलम को अपने कंपनी के नाम से गाड़ी की आरसी बुक को रजिस्टर करा कर रखना था उसके बाद वाहन की बिक्री उपरांत चोलामंडलम अपने नाम से क्रेता के नाम से वाहन के नाम का ट्रांसफर करती, पर इन सब प्रक्रिया में चोलामंडलम को अधिक पैसे खर्च करने पड़ते चोलामंडलम में कार्यरत कोरबा शाखा के अधिकारियों ने सरकार को राजस्व की हानि पहुंचाने के इरादे से इस प्रक्रिया को निपटाने के लिए एजेंट संतोष राठौर को इस पूरे नामंत्रण को निपटाने की जिम्मेदारी थी जिसे संतोष राठौर ने अधिकारी एवं कर्मचारियों से नजदीकी का फायदा उठाकर इस पूरे मामले को बड़े ही शांति के साथ निपटा दिया।
क्या चोलामंडलम जो कि एक प्रतिष्ठित फाइनेंस कंपनी है हमेशा इसी तरीके से अपने फाइलों को एजेंटों द्वारा निपटा लिया करती है? यह अब एक जांच का विषय है।
एजेंट और फाइनेंस कंपनी द्वारा शासन से निर्धारित प्रक्रिया का पालन ना कर शासन को क्या राजस्व की हानि पहुंचाते आ रहे हैं इस पूरे मामले में कोरबा परिवहन अधिकारी का मौन व्रत कई सारे प्रश्नों को जन्म दे रही है।