विकासनगर दुर्गा पूजा पंडाल में उमड़ी सुहागिनें: सिंदूर खेला की पारंपरिक रस्म से मां दुर्गा को दी गई भावुक विदाई
सतपाल सिंह

विकासनगर दुर्गा पूजा पंडाल में उमड़ी सुहागिनें: सिंदूर खेला की पारंपरिक रस्म से मां दुर्गा को दी गई भावुक विदाई.. 
कोरबा – विजयदशमी के पावन अवसर पर कुसमुंडा के विकासनगर स्थित मां दुर्गा पूजा पंडाल में आस्था और परंपरा का एक अनोखा नजारा देखने को मिला। शारदीय नवरात्र के समापन और माता रानी की विदाई की बेला पर पंडाल में पारंपरिक सिंदूर खेला उत्सव का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें क्षेत्र की सैकड़ों सुहागिन महिलाओं ने हिस्सा लिया। पूजा समिति के पदाधिकारियों की मौजूदगी में सुबह से ही पंडाल में महिलाओं का तांता लगा रहा।
विधि-विधान से पूजन और दर्पण दर्शन
दशमी की पूजा संपन्न होने के बाद, सभी समाज के स्थानीय महिलाओं ने मां दुर्गा को पान के पत्ते, मिठाई और सिंदूर अर्पित किया। इसके बाद महिलाओं ने जल में रखे दर्पण में देवी के प्रतिबिंब के दर्शन कर श्रद्धापूर्वक प्रणाम किया। इस दौरान महिलाओं ने माता रानी से अपने परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और अखंड सौभाग्य (पति की लंबी आयु) की कामना की।
सिंदूर की होली में सराबोर हुआ पंडाल
माता की आराधना और विदाई गीत के बाद पंडाल में ‘सिंदूर खेला’ की शुरुआत हुई। पारंपरिक लाल पाड़ वाली सफेद साड़ियों और पारंपरिक आभूषणों में सजी महिलाओं ने सबसे पहले मां दुर्गा को सिंदूर लगाया और फिर एक-दूसरे के माथे, गालों और शंखा-पला (पारंपरिक चूड़ियों) पर स्नेहपूर्वक सिंदूर लगाया। पूरा पंडाल परिसर लाल रंग के सिंदूर और ‘जोय मां दुर्गा’ के जयकारों से गूंज उठा।
विदाई की बेला में भावुक हुईं सुहागिनें
मान्यता के अनुसार, मां दुर्गा अपने मायके (धरती) से वापस कैलाश पर्वत (ससुराल) लौटती हैं। इसी वजह से एक बेटी की विदाई की तरह सुहागिनों ने नम आंखों से माता रानी को विदा किया। महिलाओं ने बताया कि सिंदूर खेला केवल एक रस्म नहीं है, बल्कि यह नारी शक्ति और आपसी भाईचारे का प्रतीक है। इस आयोजन ने पंडाल में मौजूद सभी श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। अंत में सभी को प्रसाद वितरित किया गया और माता की प्रतिमा को विसर्जन यात्रा के लिए रवाना किया गया।





