13 करोड़ मतदाताओं के नाम काटे जाने और निर्वाचन आयोग की आंतरिक अनियमितताओं पर महामहिम राष्ट्रपति को ज्ञापन: जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी (JCP) ने की SIT जांच और डिजिटल फॉरेंसिक ऑडिट की मांग
सतपाल सिंह
13 करोड़ मतदाताओं के नाम काटे जाने और निर्वाचन आयोग की आंतरिक अनियमितताओं पर महामहिम राष्ट्रपति को ज्ञापन: जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी (JCP) ने की SIT जांच और डिजिटल फॉरेंसिक ऑडिट की मांग
कोरबा/रायपुर, 28 सितंबर 2026:
जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी (JCP) के कोरबा जिलाध्यक्ष जैनेन्द्र कुर्रे ने भारत की महामहिम राष्ट्रपति को एक विस्तृत एवं अति-संवेदनशील संवैधानिक अभ्यावेदन (पत्र) प्रेषित कर देशव्यापी मतदाता सूची संशोधन (SIR) प्रक्रिया, करोड़ों मतदाताओं के नाम हटाने और भारत निर्वाचन आयोग के भीतर उपजे अभूतपूर्व संस्थागत संकट पर सुप्रीम कोर्ट के सेवारत या सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र SIT जांच की मांग की है।
पत्र के प्रमुख बिंदु एवं उठाए गए गंभीर विषय:
* 13 करोड़ मतों का अनधिकृत विलोपन: 25 सितंबर 2026 को सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, SIR की आड़ में देश भर में लगभग 13 करोड़ पात्र नागरिकों के नाम बिना कानूनी प्रक्रिया के मतदाता सूची से हटाए गए हैं, जो संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 का सीधा उल्लंघन है।
* CEC की एकतरफा कार्यप्रणाली: मुख्य निर्वाचन आयुक्त द्वारा ‘Chief Election Commissioner Act, 2023’ की धारा 18 (जिसके तहत आयोग को सामूहिक निकाय के रूप में फैसला लेना अनिवार्य है) का उल्लंघन कर एकतरफा आदेश लागू किए गए।
* दो निर्वाचन आयुक्तों की 14 लिखित आपत्तियां: आयोग के दो शीर्ष निर्वाचन आयुक्तों—श्री सुखबीर सिंह संधू एवं श्री विवेक जोशी—द्वारा पिछले 10 महीनों में दर्ज की गई कम-से-कम 14 लिखित असहमति व आपत्तियों (जैसे फॉर्म-6 में अवैध संशोधन, IT प्रणालियों में एकतरफा बदलाव और अनधिकृत फैसले) की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
* डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर (ERONet/ECINet) का अनधिकृत केंद्रीकरण: कानूनन मतदाता नामावली बनाने का अधिकार केवल Electoral Registration Officers (EROs) का है, लेकिन डिजिटल पोर्टल्स के बैकएंड में बदलाव कर EROs के अधिकार छीने गए और ऑटोमेटेड डिलीशन (Automated Deletion) किया गया।
* छत्तीसगढ़ का विशेष संदर्भ: राज्य के 33 जिलों एवं 90 विधानसभा क्षेत्रों में SIR के दौरान बड़े पैमाने पर जनजातीय, ग्रामीण व वंचित वर्ग के नागरिकों के नाम काटे जाने पर जिलावार व बूथवार विशेष ऑडिट कराने की मांग की गई है।
महामहिम राष्ट्रपति से प्रेषित प्रमुख संवैधानिक मांगें:
* स्वतंत्र SIT जांच: SIR प्रक्रिया, 13 करोड़ मतों के विलोपन और अधिकारियों की भूमिका की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के जज की अध्यक्षता में विशेष जांच दल (SIT) गठित किया जाए।
* डिजिटल फॉरेंसिक ऑडिट: ECINet, ERONet के सर्वर लॉग्स, क्रेडेंशियल्स, यूजर एक्सेस और सॉफ्टवेयर कोड बदलावों का देश की शीर्ष फॉरेंसिक एजेंसी से ऑडिट हो।
* साक्ष्यों का तत्काल संरक्षण: आयोग की मूल फाइलों, नोटिंग्स, दोनों आयुक्तों द्वारा लिखे गए पत्रों एवं इलेक्ट्रॉनिक डेटाबेस को तुरंत सील व सुरक्षित किया जाए।
* आपराधिक दायित्व व FIR: ‘लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950’ की धारा 32 के उल्लंघन और आपराधिक लापरवाही पर दोषी अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की जाए।
* पात्र नागरिकों की पुनर्बहाली: प्रक्रियात्मक या सॉफ्टवेयर त्रुटि के कारण हटाए गए सभी पात्र नागरिकों के नाम तत्काल मतदाता सूची में पुनः जोड़े जाएं।
> “छत्तीसगढ़वासियों एवं देश के नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए यह अभ्यावेदन भेजा गया है। यदि किसी नागरिक का वोट बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के किसी डिजिटल सिस्टम या प्रशासनिक तानाशाही से काटा जा सकता है, तो लोकतंत्र की नींव ही खतरे में पड़ जाएगी। हमारा उद्देश्य किसी संस्था को नीचा दिखाना नहीं, बल्कि सत्य और संविधान की पुनः स्थापना करना है।”
> — जैनेन्द्र कुर्रे, जिलाध्यक्ष, जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी (JCP), कोरबा
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जारीकर्ता:
देवनाथ हंस
जिला मंत्री, जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी (JCP)
जिला- कोरबा (छ.ग.)





