*अशासकीय विद्यालय प्रबंधक कल्याण संघ ने किया शिक्षकों का सम्मान*
बच्चों को पाठ्यक्रम पढ़ाने के साथ संस्कारवान बनाएं : अधिवक्ता चितरंजय पटेल

जिला रिपोर्टर सक्ती- उदय मधुकर
सक्ती। शिक्षक दिवस के अवसर पर अशासकीय विद्यालय प्रबंधक कल्याण संघ, सक्ती द्वारा होटल स्वाद महल के सभागार में शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में संघ से संबद्ध निजी विद्यालयों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले शिक्षक-शिक्षिकाओं को अभिनंदन पत्र एवं लेखनी भेंट कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि जिला शिक्षा अधिकारी कुमुदिनी बाघ द्विवेदी ने शिक्षकों को विद्यार्थियों का शिल्पकार और राष्ट्र निर्माता बताते हुए कहा कि शिक्षक बच्चों के भविष्य निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने शिक्षकों से विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर प्रयास करने का आह्वान किया।
समारोह की अध्यक्षता करते हुए अशासकीय विद्यालय प्रबंधक कल्याण संघ छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष एवं उच्च न्यायालय अधिवक्ता चितरंजय पटेल ने कहा कि संघ से संबद्ध निजी विद्यालयों में विपरीत परिस्थितियों के बावजूद शिक्षक ‘विद्यादान महादान’ के ध्येय के साथ शिक्षा के क्षेत्र में अपना योगदान दे रहे हैं। विद्यालयों के विकास में शिक्षकों की सहभागिता और समर्पण के प्रति सम्मान व्यक्त करना संगठन का दायित्व है।
उन्होंने कहा कि शिक्षकों को विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम की शिक्षा देने के साथ-साथ संस्कारवान बनाने की दिशा में भी कार्य करना चाहिए, ताकि विद्यार्थी समाज में सकारात्मक योगदान देते हुए राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभा सकें।
विकासखंड शिक्षा अधिकारी दिलीप पटेल ने वर्तमान इंटरनेट एवं सोशल मीडिया के दौर में शिक्षकों की बढ़ती जिम्मेदारियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आधुनिक दौर में बच्चों को भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जोड़े रखना चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में भारतीय संस्कारों एवं परंपराओं के संरक्षण में शिक्षकों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
डा. रविन्द्र द्विवेदी ने भारतीय संस्कृति में गुरु-शिष्य परंपरा की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरु दक्षिणा के रूप में शिष्यों का समर्पण भारतीय संस्कृति का अविस्मरणीय हिस्सा रहा है। शिक्षक का दायित्व केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को सद्मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करना भी है।
संघ के जिलाध्यक्ष दुलीचंद साहू ने स्वागत भाषण में कहा कि शिक्षा के साथ संस्कार का समन्वय ही सशक्त एवं जिम्मेदार समाज का निर्माण कर सकता है। जिला सचिव सरोज महंत ने आभार प्रदर्शन करते हुए कबीर के दोहे के माध्यम से गुरु की महत्ता को रेखांकित किया तथा गुरु एवं माता-पिता को जीवन में ईश्वर तुल्य बताया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में स्कूल संचालक पुरुषोत्तम चंद्रा, पुष्पेंद्र राठौर, अजीत चौहान, गेंदराम प्रधान एवं नकुल भारद्वाज सहित अन्य पदाधिकारियों एवं सदस्यों की सक्रिय सहभागिता रही। कार्यक्रम का सफल संचालन किशोर न्याय बोर्ड सदस्य सुरेश जायसवाल ने किया।
शिक्षक-शिक्षिकाओं की भारी उपस्थिति के बीच समारोह गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर संघ की ओर से गुरु-शिष्य परंपरा, भारतीय संस्कार एवं संस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास करने का संकल्प व्यक्त किया गया।






