*आलस्य मनुष्य का सबसे बड़ा निकटवर्ती मीठा शत्रु तथा परिश्रम सबसे बड़ा कड़वा मित्र : संत श्री असंग देव*

जिला रिपोर्टर शक्ति उदय मधुकर
*पूर्व जिला पंचायत सदस्य रामकुमार गबेल व श्रीमती गीता गबेल के आयोजकत्व में डोंगिया_सुलौनी में सम्पन्न हुआ सुखद सत्संग अमृत कथा का आयोजन*
*हजारों की तादाद में कथा श्रवण करने पहुंचे भक्तजन*
सक्ती सरल स्वभाव भगवान का स्वभाव है। हमें भगवान से स्वभाव भी सीखना चाहिए क्योंकि मनुष्य की कीमत उनके गुणों से होती है। कांच व हीरा की पहचान कराते हुए संत असंग देव जी ने कहा जो बात बात में गर्म हो जाते हैं वो कांच और जो ठंडे अर्थात सहनशील बने रहते हैं वो हीरा कहे जाते हैं। उक्त बातें राष्ट्रीय संत श्री असंग देव ने डोंगिया -सुलौनी में सुखद सत्संग अमृत कथा के आयोजन में भक्तजनों को कथा श्रवण कराते हुए कही। राष्ट्रीय संत असंग साहेब ने इस मौके पर आलस्य को मनुष्य का सबसे बड़ा निकटवर्ती मीठा शत्रु बताया तो वहीं परिश्रम को मनुष्य का सबसे बड़ा कड़वा मित्र कहा। इस प्रकार मनुष्य को मेहनती बनने की शिक्षा दी। विदित हो कि सक्ती जिले के मालखरौदा विकासखंड के ग्राम डोंगिया- सुलौनी में 10 से 12 फरवरी तक तीन दिनों तक पूर्व जिला पंचायत सदस्य श्रीमती गीता गबेल व रामकुमार गबेल के आयोजकत्व में सुखद सत्संग अमृत कथा की अविरल धारा बहती रही । जहां राष्ट्रीय संत श्री असंग देव जी ने अपने मुखारबिंद से भक्तजनों को अमृत कथा का रसपान कराया। 10 फरवरी से 12 फरवरी तक आयोजित इस महाविशाल भक्तिमय आयोजन में जिले भर से पहुंचे हजारों भक्तजनों ने अमृत कथा का श्रवण किया। इस आयोजन को लेकर क्षेत्र में तीन दिनो तक भक्तिमय उल्लास के बीच उत्साह का माहौल बना रहा।
इस आयोजन में शाम 7:00 बजे तीनों दिन आयोजकों की तरफ से विशाल भंडारा प्रसाद का भी आयोजन किया गया। 12 फरवरी , गुरूवार को महाआरती के साथ इस भक्तिमय आयोजन का समापन हुआ। बात करें राष्ट्रीय संत असंग देव की तो वे भारतवर्ष के एक सुप्रसिद्ध आध्यित्मक गुरू हैं जो कि सुखद सत्संग के माध्यम से नशामुक्ति व पारिवारिक खुशहाली का संदेश जनसाधारण को देते हैं। इधर डोंगिया – सुलौनी में तीसरे व अंतिम दिन इस भक्तिमय आयोजन में अमृतकथा का श्रवण करने भाजपा नेत्री बहुरानी श्रीमती संयोगिता -युद्धवीर सिंह जूदेव, श्रीमती नंदनी राजवाड़े , राजा धर्मेन्द्र सिंह, पं. देवेन्द्र नाथ अग्निहोत्री, साधेश्वर गबेल सहित जिले भर से हजारों की संख्या में भक्तजन पहुंचे हुए थे। जहां उन्होंने न केवल अमृत रूपी कथा का श्रवण किया साथ ही राष्ट्रीय संत गुरू असंग साहेब से आशीर्वाद भी प्राप्त किया।





