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Indian First Woman Spy: भारत की पहली महिला जासूस, नेताजी की रक्षा के लिए किया पति का बलिदान

नीरा आर्य: साहस और बलिदान की मिसाल, जिन्होंने व्यक्तिगत खुशियों की बजाय देश की आज़ादी को चुना

  • भारत की पहली महिला जासूस: नीरा आर्य

  • नेताजी की रक्षा के लिए किया बड़ा बलिदान

  • अंग्रेजों की जेल में भी राज नहीं खोला

India First Woman Spy: भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की कहानी अक्सर कुछ बड़े नामों के इर्द-गिर्द घूमती है, लेकिन इतिहास की असली रीढ़ वे महिलाएं हैं, जिनका साहस किताबों के हाशिये में दबा रह गया। नीरा आर्य उन्हीं में से एक नहीं, बल्कि भारत की पहली महिला जासूस थीं, ऐसी योद्धा, जिसने ऐशो-आराम, परिवार, विवाह और अंततः अपना शरीर तक देश की आज़ादी पर न्योछावर कर दिया। उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र  बोस की रक्षा के लिए अपने पति को  भी मार डाला। जेल में अंग्रेजों की यातनाएं सहींं लेकिन राज नहीं खोला। आइए जानते हैं देश की पहली महिला जासूस नीर आर्य के बारे में।

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कौन हैं नीर आर्या?

उत्तर प्रदेश के एक संपन्न परिवार में जन्मी नीरा आर्य के सामने सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन था। लेकिन उन्होंने सुविधा नहीं, स्वतंत्रता चुनी। वे नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़ीं और आज़ाद हिंद फौज की पहली महिला रेजीमेंट का हिस्सा बनीं। पर्दे के पीछे रहकर उन्होंने जासूसी का जोखिमभरा काम किया, जहाँ एक गलती की कीमत जान होती है।

राष्ट्र के लिए परिवार का बलिदान

उनकी निजी ज़िंदगी भी संघर्ष का मैदान बन गई। उनका विवाह एक ब्रिटिश इंडियन आर्मी अधिकारी से हुआ, जो गुप्त रूप से अंग्रेज़ों के लिए काम करता था। एक दिन उसने नीरा का पीछा करते हुए नेताजी की बैठक पर हमला किया, जिसमें नेताजी के ड्राइवर की मृत्यु हो गई। नेताजी और आंदोलन को बचाने के लिए नीरा ने अपने ही पति को मार दिया। यह फैसला किसी पत्थर दिल का नहीं, बल्कि राष्ट्र को परिवार से ऊपर रखने वाली स्त्री का था।

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अंग्रेजों ने दी जेल मे यातनाएं

इसके बाद जेल, यातनाएं और अमानवीय अत्याचार आए। अंग्रेज़ अफसरों ने उनसे आज़ादी के सेनानियों के रहस्य उगलवाने की कोशिश की। भयानक शारीरिक यातनाओं के बावजूद नीरा आर्य ने एक शब्द नहीं कहा। उनकी आवाज में दर्द था, चीख थी, लेकिन देशद्रोह नहीं।

1947 में आज़ादी मिली। नीरा आर्य जेल से रिहा हुईं पर न सम्मान मिला, न पदक और ही ना ही कोई पेंशन। वे हैदराबाद की सड़कों पर फूल बेचकर जीवन चलाने को मजबूर हुईं। 1998 में वे चुपचाप इस दुनिया से चली गईं। नीरा आर्य ने कुछ मांगा नहीं। उन्होंने सिर्फ दिया, अपना जीवन, अपना सुख और अपना भविष्य।

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Preeti Singh

Priti Singh is a senior journalist at INN24 News with extensive experience covering crime, governance, public policy, and regional affairs in Chhattisgarh Her reporting focuses on factual accuracy, administrative accountability, and issues of public interest. Areas of Expertise • India and Chhattisgarh politics and governance • State and regional affairs (Chhattisgarh) • Public administration • Investigative reporting Editorial Responsibility Priti Singh follows strict fact-checking and editorial standards and adheres to INN24 News’ Editorial Policy. 📧 Contact: manni200390@gmail.com Profile Last Updated: 20 January 2026