अघोरेश्वर महाप्रभु राम के महापरिनिर्वाण दिवस पर अघोरपीठ जनसेवा अभेद आश्रम द्वारा बोईरडीह गांव के गरीब व जरूरतमंदों को बांटी गई कंबल
जातिवाद समाज व राष्ट्र के लिए घातक, इसे हृदय में जगह न दें : पुनीत शाही बाबा अघोर गुरू

जिला रिपोर्टर शक्ति उदय मधुकर
सक्ती अघोर पीठ जनसेवा अभेद आश्रम बोईरडीह-जैजैपुर में 29 नवंबर को अघोरेश्वर भगवान राम के महापरिनिर्वाण दिवस के मौके पर विविध आयोजन किए गये। इस मौके पर अघोर पीठ आश्रम की साफ-सफाई किया गया। इसके पश्चात पूजन, आरती सफल योनी पाठ का आयोजन हुआ। वहीं दोपहर में भक्तों ने भंडारा प्रसाद ग्रहण किया । जबकि शाम को अघोर पीठ आश्रम की ओर से बोईरडीह गांव में गरीब व जरूरतमंद लोगों के घर-घर जाकर कंबल बांटे गए। इस अवसर पर अघोर शक्ति पीठ बोईरडीह के अघोर गुरू बाबा पुनीत शाही ने अपने उद्बोधन में अघोरेश्वर महाप्रभु को महामानव बताते हुए उनके द्वारा मानव समाज के कल्याण निमित्त दिये शिक्षाओं को आत्मसात करने की बात कही। बाबा पुनीत शाही ने कहा हमने मनुष्य योनि तो प्राप्त कर लिया है लेकिन मनुष्य नहीं बन पा रहे हैं। इसके लिए उन्होंने अच्छी जीवनशैली अपनाने की बात कही। यहां बाबा पुनीत शाही ने मनुष्य बनने से आशय समझाते हुए कहा कि हमारे मन में किसी प्रकार का भेदभाव, ऊंच-नीच, छोटे -बड़े जैसे भाव न हो बल्कि उसके स्थान पर हमारे मन में एक दूसरे के प्रति प्रेम, सौहार्द और मैत्री तथा सहयोग का भाव होना चाहिए और इसी भाव के साथ जीवन भी जीने चाहिए ।

इस दौरान शाही बाबा ने जातिवाद को राष्ट्र के लिए अभिशाप बताते हुए कहा कि जातियों में बंटकर हम अपने साथ अपना व राष्ट्र का नुक़सान ही करेंगे इसलिए ऐसी बातों को मन में कतई जगह न दें। इधर देर शाम अघोरेश्वर महाप्रभु के महापरिनिर्वाण दिवस के मौके पर आघोर आश्रम की तरफ से बोईरडीह गांव में निवासरत गरीब व जरूरतमंद लोगों को कंबल बांटे गए। गौरतलब हो कि अघोरपीठ जनसेवा अभेद आश्रम बोईरडीह-जैजैपुर अपनी स्थापना के से ही जनसेवा के अनेक कार्यों से जुड़ा हुआ है। जिसमें स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, नशा उन्मूलन आदि प्रमुखता से शामिल हैं। इसी के तहत आश्रम में समय-समय पर इस तरह सेवाभावी कार्यों के आयोजन होते रहते हैं। विदित हो कि अघोरेश्वर महाप्रभु भगवान राम 20वीं सदी के एक महान अघोरी संत थे। जिन्होंने अघोर परंपरा को आम लोगों तक पहुंचाया और गरीबों, दलितों तथा दीन दुखियों की सेवा में अपना जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने मानवता ही हमारा धर्म है का संदेश दिया और श्री सर्वेश्वरी समूह की स्थापना भी की थी।





