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केसीसी में अदृश्य मोबाइल रेडिएशन के गंभीर परिणाम पर सेमिनार आयोजित हुआ (मोबाइल रेडिएशन से कैंसर तक की बीमारी बचना /जरूरी)

कोरबा कंप्यूटर महाविद्यालय में मोबाइल रेडिएशन पर सेमिनार आयोजित किया गया, जिसमें महाविद्यालय के निर्देशक श्री राजेश अग्रवाल जी द्वारा दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम की शुरुआत की गई, कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए महाविद्यालय के निर्देशक श्री राजेश अग्रवाल जी ने कहा कि आज की इस आधुनिक दौर में मोबाइल फोन लैपटॉप डिजिटल वॉच और अन्य डिजिटल उपकरण समाज के लिए उपयोगी है उतने ही हानिकारक है, हमें वास्तविक और भौतिक जीवन में सामंजस्य बैठा कर आगे बढ़ना चाहिए। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में कोलकाता से आए पूर्वी क्षेत्र के प्रमुख श्री मीर हक के द्वारा मोबाइल रेडिएशन के दुष्प्रभावो के बारे में बताया गया कि रेडिएशन ना केवल मोबाइल वा वरन जमीन/भूगर्भीय वस्तुओं से भी हो रहा है जिसको लैक्टिक एंटीना मीटर जैसे यंत्र से उनके घातक स्वरूप की गंभीरता को मापा जा सकता है। यह एक तरह का इलेक्ट्रॉनिक प्रदूषण है मोबाइल टावर/ घर/ कार्यालय में स्थित राउटर Wi-Fi से इलेक्ट्रोस्मोक निर्मित हो रहा है, रेडिएशन हमारे चारों तरफ अदृश्य रूप से व्याप्त है तथा यह किस गंभीर हद तक हमारे जीवन को प्रभावित कर चुका है, रेडिएशन से कई प्रकार के पक्षियों चिड़ियों का अस्तित्व मिट गया अथवा अस्तित्व संकट में आ गया है यह लोगों के दिल और दिमाग पर बहुत नकारात्मक प्रभाव छोड़ रहा है इससे लोग कई गंभीर बीमारियों जैसे चिड़चिड़ापन, एकाग्रता की कमी, सिरदर्द ,गुस्सा, डिप्रेशन, ब्रेन ट्यूमर कैंसर,तनाव, नींद ना आने की समस्या से बच्चों और युवाओं को जकड़ता जा रहा है।

वही कोरबा प्रमुख श्रीमती मनीषा साहू इसके हानिकारक प्रभाव से बचने के तरीकों को विस्तार से छात्रों, स्टाफ को बताया कि उपकरणों का किस प्रकार,कैसे और कितना उपयोग करना चाहिए, जिनमें मुख्यतः हमें मोबाइल का उपयोग 5 मिनट से अधिकतम 30 मिनट तक और मोबाइल शरीर से दूर लैपटॉप शरीर से लगभग 2 से 2.5 फीट दूर रखना चाहिए, इनसे बचने के लिए बाजार में मोबाइल रेडिएशन को कम करने वाले माइक्रोचिप एवं अन्य उपकरण उपलब्ध है, जिनका उपयोग कर इसके दुष्प्रभावों से बचा जा सकता है।

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