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भूविस्थापित बेरोजगार उतरे गेवरा खदान में, 3 घंटे काम रहा बंद, रोजगार देने के आश्वासन के बाद खत्म हुआ प्रदर्शन..

कोरबा – (ओ म ग वे ल) – हमारे जिले की खदानों से निकलने वाले कोयला से देश दुनिया जहान में बिजली जल रही है रोशनी फैल रही है परंतु इन सब के बीच एक बड़ी विडंबना यह है कि जिनकी जमीन से यह काला सोना निकाला जा रहा है उनके हाथ अभी भी खाली है, उनका परिवार गरीबी में जीवन यापन कर रहे हैं, बेरोजगारी का दंश एक अभिशाप बनकर उनके जीवन को निगल रहा है । इसे एसईसीएल प्रबंधन की नाकामी कहिए या उदासीनता, प्रबंधन में शीर्ष स्तर पर बैठे इन्हीं अधिकारियों की वजह से जिले की खदानों में आए दिन आंदोलन देखने को मिलता है। बात करें गेवरा खदान में हुए आज बुधवार को आंदोलन की तो……आउट सोर्सिंग कंपनियों में 100% रोजगार की मांग को लेकर भूविस्थापित बेरोजगारों ने तीन घंटे गेवरा खदान में ओवरबर्डन एवं कोल डिस्पैच का काम बंद कर ।

छत्तीसगढ़ किसान सभा के नेतृत्व में गेवरा खदान से प्रभावित नरईबोध-गंगानगर गांव के बेरोजगारों ने खदान के अंदर कार्य कर रही आऊट सोर्सिंग कंपनियों में 100% रोजगार विस्थापित गांव के बेरोजगारों को देने और प्रशिक्षण कैम्प लगाने की मांग को लेकर सैकड़ों बेरोजगारों ने तीन घंटे तक गेवरा खदान के ओबी और कोयले के उत्पादन को ठप्प कर दिया। जिससे एसईसीएल और आऊट सोर्सिंग कंपनी को करोड़ों का नुकसान हुआ है। इस आंदोलन की चेतावनी किसान सभा ने एक सप्ताह पूर्व ही प्रबंधन और प्रशासन को दे दी थी, इसके बावजूद एसईसीएल प्रबंधन विस्थापन प्रभावित गांव के बेरोजगारों को रोजगार मुहैया कराने के प्रति उदासीन रहा जिससे आक्रोशित सैकड़ों बेरोजगारों ने गेवरा खदान का उत्पादन बंद कर दिया। प्रदर्शनकरियों को खदान के अंदर घुसने से रोकने के लिए बड़ी संख्या में सीआईएसएफ बल लगाये गए थे , लेकिन प्रदर्शन कर रहे बेरोजगार खदान के अंदर घूसकर खदान बंद कराने में सफल हो गए। आंदोलन की सूचना मिलते ही दर्री नगर पुलिस अधीक्षक सुश्री लितेश सिंह,दीपका थाना प्रभारी अनिल पटेल, कुसमुंडा थाना प्रभारी नवीन देवांगन एवं हरदी बाजार चौकी प्रभारी मयंक मिश्रा पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे । एसईसीएल गेवरा के अधिकारी अमिताभ तिवारी ने आंदोलन कर रहे बेरोजगारों को 16 जुलाई से कैम्प लगाने का आश्वासन दिया और निकाले गए ड्राइवर को वापस रखने एवं अनुभवी ड्राइवरों को 15 जुलाई तक काम पे रखने का आश्वासन दिया। तब तीन घंटे बाद खदान बंद आंदोलन समाप्त हुआ और उत्पादन शुरू हो सका।

किसान सभा के जिला सचिव प्रशांत झा ने कहा कि गेवरा खदान के कारण नरईबोध गंगानगर सहित दर्जनों गांव खनन परियोजना से प्रभावित है अपने जमीनों से हाथ धो चुके परिवार आजीविका के साधनों के अभाव में बेरोजगारी का दंश सहने को मजबूर है लेकिन अब प्रभावित गांव के बेरोजगार अपने रोजगार के अधिकार के लिए एसईसीएल के खिलाफ संघर्ष का बिगुल फूंक दिए हैं प्रभावित गांव के बेरोजगारों को रोजगार उपलब्ध नहीं कराने पर किसान सभा हजारों बेरोजगारों को लामबंद कर एसईसीएल के कोयला उत्पादन और परिवहन दोनों को बंद करेगी अगर किये गए आश्वासन से प्रबंधन मुकरेगी तो आगे और उग्र आंदोलन होगा।
किसान सभा के जिलाध्यक्ष जवाहर सिंह कंवर, दीपक साहू, जय कौशिक, नौजवान सभा के दामोदर श्याम ने कहा कि प्राथमिकता के साथ एसईसीएल के अधीनस्थ कार्य कर रही कंपनियों में विस्थापित गांव के बेरोजगारों को रोजगार उपलब्ध कराया जाये। उनका आरोप है कि विस्थापन प्रभावित गांव के बेरोजगारों को रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है, रोजगार उपलब्ध कराने की नैतिक जिम्मेदारी एसईसीएल की है जो रोजगार की मांग कर रहे हैं अगर खदान में कार्य के लिये बेरोजगार प्रशिक्षित नहीं है तो कैम्प लगाकर प्रशिक्षण दिया जाये और फिर उनके रोजगार की व्यवस्था की जाये। किसान नेता दीपक साहू ने खदान के अंदर आऊट सोर्सिंग कंपनियों में कार्य कर रहे कर्मचारियों का पुलिस वेरिफिकेशन कराने की भी मांग की।
किसान सभा ने कहा कि सभी गांव के बेरोजगारों को एकजुट करके बड़ी आंदोलन की तैयारी की जा रही है।
खदान बंद आंदोलन में प्रमुख रूप से जय कौशिक, दामोदर, रेशम, रघु,मोहन कौशिक, दीना, अनिल,हेमलाल, होरी,सुमेन्द्र सिंह, लंबोदर,पंकज,माखन यादव, विजय दास, दिलहरण चौहान, उमेश पटेल,मुरली मनोहर, जयपाल, उजाला, इंदल,श्याम रतन, मुखी,सहदेव, अरविंद, चम्पा बाई, अघन, लता, गीता, बृहस्पति, नीरा, लक्षमनिया, गंगा, रमिला,पूर्णमा के साथ बड़ी संख्या में विस्थापन प्रभावित गांव के बेरोजगार शामिल थे।

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