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कोरबा – वर्षो पुराने एक विशालकाय पेड़ को गिरने से बचाने पार्षद व मुहहले वालो ने 30 हजार रुपये किये खर्च, 10 फिट ऊंचे व 3 फिट मोटे कांक्रीट का बनवाया पिल्हर… आस्था व बचपन की यादों से जुड़े भावनाओं सहेजने किया गया अनूठा कार्य….

एको वृक्षो हि यो ग्रामे भवेत् पर्णफलान्वितः।
चैत्योंभवती निज्र्ञातिरर्चनीयः सुपूजितः – अर्थात पत्तो और फलों से समन्वित कोई भी सुन्दर वृक्ष इतना सजीव एवं जीवंत हो उठता है कि वह पूजनीय हो जाता है।

कोरबा – आपने लोगों को पौधे लगाते हुए तो बहुत बाहर देखा होगा परंतु बिना किसी सरकारी सहायता के स्वयं के द्वारा हजारो रुपये खर्च कर विशालकाय पेड़ को बचाने के लिए अनूठे प्रयास से आप शायद ही रूबरू हुये होंगे।

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वर्तमान में आधुनिकता की अंधी दौड़ में एक ओर जंहा चौड़े चौड़े सड़क, रेल मार्ग, खदान, हाईटेंशन विधुत इत्यादि विस्तार करने, घर मकान भवन व संस्थान बनाने लाखों पेड़ो की बलि ले ली जा रही है और नए पौधों लगाने के नाम पर केवल कागजो में खानापूर्ति की जा रही है, जिससे ना सिर्फ वातावरण गर्म हो रहा है बल्कि आम जनजीवन हलकान है,ऐसे में फिर से नए पौधे लगाकर एवम पौधों से बने पेड़ो को बचाकर ही प्रकृति को बचाया जा सकता है,कुछ इसी तरह से प्रकृति को बचाने के उद्देश्य से अनूठा कार्य कोरबा जिले के कुसमुंडा क्षेत्र अंतर्गत विकास नगर पार्षद व मुहहले वासियो ने किया है, जँहा कई दशक पूर्व बढ़े एक विशालकाय पेड़ को गिरने से बचाने के उद्देश्य के साथ साथ पेड़ो को संरक्षित करने में अपनी अहम भूमिका निभाते हुए समाज में पेड़ो के महता के प्रति सभी जनो को जागरूक करने एक मिशाल कायम की गयी है।

घोड़ापाठ ग्राम देवता परिसर में लगे पेड़ को बचाने बनाया गया कॉन्क्रीट का पिल्हर…

दरअसल कुसमुंडा क्षेत्र में विकास नगर कॉलोनी को बनने से पूर्व घोड़ा पाठ के नाम से जाना जाता रहा है, आज भी पुराने लोग इस नगर को घोड़ा पाठ ही कहते है जिसके पीछे एक बड़ी वजह यह बतायी जाती है कि बीते कई दशक पूर्व यंहा खुदाई के दौरान घोड़ा नुमा एवम कुछ दैवीय स्वरूप पत्थर की बनी आकृतिया मिली थी, जिन्हें मंदिर में स्थापित कर आज भी उनकी पूजा अर्चना की जाती है, उस समय लोगो ने जमीन से निकले घोड़ा देवता के नाम पर इस इस क्षेत्र का नामकरण घोड़ापाठ कर दिया, आज भी किसी प्रकार के शादी व्याह मांगलिक कार्य मे घोडा देवता की सर्वप्रथम पूजा की जाती है। इसी घोड़ादेवता मंदिर के पास उस समय का ही एक वर्षो पुराना वृक्ष है जो एक ओर झुक कर गिरने की कगार पर पंहुच चुका है, चूंकि यह पेड़ घोड़ादेवता मंदिर परिसर में है तो आसपास रहने वाले लोगो का इससे एक आस्था के रुप मे जुड़ाव है वही दूसरी तरफ़ इस पेड़ के छांव के नीचे कई पीढ़ियों ने अपना बचपन खेल कर बुढापा किस्से कहानी सुनाकर व अपना दुख सुख बांट कर बिताया है, ऐसे में इस पेड़ को गिरते देख उसे सुरक्षित करने के लिए क्षेत्र के पार्षद व जागरूक लोगो ने एक उपाय ढूंढा, जिसके तहत उन्होंने जिस दिशा में पेड़ झुक रहा है उस स्थान पर कॉन्क्रीट की एक पिल्हर खड़ी कर दी जिसके सहारे पेड़ टिकी रहे और अधिक दिन तक वह क्षेत्रवासियों को अपनी छांव के साथ साथ उससे जुड़ी यादो को जीवंत रखे।

पिल्हर बनाने लगभग 30 हजार रुपये का हुआ खर्च..

इस कार्य में क्षेत्र के पार्षद अमरजीत सिंह के साथ मुख्य सहयोगी रहे शेलेन्द्र कुमार बताते हैं कि यह पेड़ हमारे हमारे परिवार का सदस्य ही है पेड़ की छांव में पूरा मोहल्ला पला बड़ा हुआ है हम इस पेड़ को ऐसे गिरते हुए नहीं देख सकते थे इसलिए हम सभी ने मिलकर क्षेत्र के पार्षद एवं सभी ने आर्थिक रूप से सहयोग देकर इस पेड़ को बचाने के लिए सीमेंट स्टील मिलाकर एक मजबूत पिल्हर के सहारे इस पेड़ को गिरने से बचाने एक जुगत लगाई है,अब तक इसे बनाने लगभग ₹ 30000 रुपयेखर्च हुए हैं,खर्च का कोई परवाह नहीं है क्योंकि जब परिवार का कोई सदस्य बीमार पड़ता है तब पैसे नहीं देखे जाते हैं तब उसे स्वस्थ करने के लिए जो बन पड़ता है,वह सब करते हैं हमने भी अपने परिवार के सदस्य को बचाने के लिए वही कार्य किया है।

“निश्चित रूप से यह कार्य अत्यंत सराहनीय है हम अपने चैनल के माध्यम से क्षेत्र के पार्षद एवं जागरूक जनों को बहुत-बहुत धन्यवाद एवं साधुवाद प्रेषित करते हैं।

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