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पराक्रम दिवस: ‘नेताजी बोस’ की 125वीं जयंती आज, जानें उनके जीवन से जुड़ीं खास बातें

‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा…’ का नारा देने वाले नेताजी सुभाष चंद्र बोस (Netaji Subhash Chandra Bose) की आज 125वीं जयंती (Netaji 125th Birth Anniversary) है. इस अवसर पर केंद्र सरकार ने आज के दिन को पराक्रम दिवस (Parakram Diwas 2022) के रूप में मनाने का ऐलान किया. देश को आजाद कराने में बोस का अहम योगदान रहा, उनकी जयंती के अवसर पर जानें उनके जीवन से जुड़ीं कुछ खास बातें.

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आज 125वीं जयंती है। 23 जनवरी 1897 को ओडिशा के कटक में एक बांग्ला परिवार में जन्मे सुभाष अपने देश के लिए हर हाल में आजादी चाहते थे। उन्होंने अपना पूरा जीवन देश के नाम कर दिया और अंतिम सांस तक देश की आजादी के लिए संघर्ष करते रहे। आज देशवासी कृतज्ञतापूर्वक उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं। आज दिल्ली में फुल ड्रेस रिहर्सल परेड भी निकलेगी। इसके साथ ही आज पीएम मोदी नेताजी की होलोग्राम प्रतिमा का अनावरण करेंगे।

Netaji Subhas Chandra Bose's 125th Birth Anniversary Today President Kovind  And PM Modi Tweeted Tribute | Netaji Subhas Chandra Bose की 125 वीं जयंती  आज, राष्ट्रपति कोविंद और पीएम मोदी ने ट्वीट

  • 23 जनवरी 1897 को ओडिशा के कटक में नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्म हुआ. 
  • बोस के 14 भाई-बहन थे, वह अपनी मां के 9वें बच्चे थे. 
  • बोस के पिता जानकीनाथ शहर के फेमस वकीलों में से एक थे. 
  • नेताजी ने कलकत्ता यूनिवर्सिटी से बीए की डिग्री हासिल की. 
  • 1920 में नेताजी ने इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस एग्जाम में चौथी रैंक हासिल की थी. 
  • स्वामी विवेकानंद व आजादी में अपना योगदान दे रहे अन्य नेताओं से इंस्पायर हो कर नेताजी ने अंग्रेजों की नौकरी से इस्तीफा दे दिया था. 
  • महात्मा गांधी को ‘राष्ट्रपिता’ के रूप में पहली बार नेताजी ने ही संबोधित किया था. 
  • भगत सिंह की फांसी के बाद नेताजी और गांधीजी में आपसी मतभेद शुरू हो गए थे. 
  • बोस को ‘नेताजी’ कहकर सबसे पहले जर्मनी के तानाशाह अडोल्फ हिटलर ने पुकारा था. 
  • नेताजी ने 1943 में करीब 40000 भारतीयों के साथ ‘आजाद हिंद फौज’ बनाई, जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ महत्त्वपूर्ण लड़ाइंया लड़ीं. 
  • माना जाता है कि 18 अगस्त 1945 को ताइवान में एयर प्लेन क्रैश में उनकी मौत हो गई. हालांकि कई राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि नेताजी की मौत एक साजिश के तहत हुई, जिसका खुलासा नहीं हो सका. 

 

 

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