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Fingerprints क्यों होते हैं अलग, फिंगरप्रिंट का इस्तेमाल पासवर्ड की तरह

हर इंसान के हाथ की स्किन दो लेयर से बनती है. पहली लेयर है एपिडर्मिस और दूसरी लेयर है डर्मिस. दोनों लेयर एक साथ बढ़ती हैं. इन्‍हीं दोनों लेयर से मिलकर हमारे हाथों के स्किन पर फिंगरप्रिंट के उभार बनते हैं. क्या आप जानते हैं कि फिंगरप्रिंट के उभार इतने पावरफुल होते हैं, जिससे उसका इस्‍तेमाल पासवर्ड की तरह होता है.

हाथ जलने पर भी नहीं बदलता है निशान
हमारे स्मार्टफोन आजकल फिंगरप्रिंट के इस्तेमाल से खुलते हैं. हमारे अटेंडेंस के लिए भी फ‍िंगरप्रिंट का ही इस्‍तेमाल सबसे असरदार माना जाता है. क्या आप जानते हैं कि आपका हाथ जल जाए या इस पर एसिड गिर जाए तब भी आपके हाथ का फिंगरप्रिंट बदलता नहीं है. यहां तक कि कोई घाव होने के बाद भी आपके हाथ का फिंगरप्रिंट वैसा ही रहता है.

आपको जानकर हैरानी होगी कि दुनिया की इतनी बड़ी आबादी है लेकिन इसमें किसी भी इंसान का फिंगरप्रिंट किसी दूसरे इंसान से मैच नहीं करता है. यहां तक कि एक बार इंसान का फ‍िंगरप्रिंट बनने के बाद जीवनभर वैसा ही फिंगरप्रिंट रहता है. यह इतना यूनिक होता है कि किसी दूसरे इंसान के फ‍िंगरप्रिंट से कभी मैच नहीं करता.
इसके पीछे इंसान के जीन्‍स, एन्‍वॉयर्नमेंट जैसे फैक्टर जिम्मेदार होते हैं. एक्‍सपर्ट्स के अनुसार, बच्‍चा जब गर्भ में पल रहा होता है, उसी दौरान उसके फिंगरप्रिंट तैयार होने लगते हैं. वहीं अगर हाथों में किसी तरह की दिक्‍कत आती है और फिंगरप्रिंट गायब हो जाते हैं तो कुछ ही महीनों के अंदर फिर से उसी पोजिशन पर आ जाते हैं. हाथ जलने के महीनेभर के भीतर उसी तरह के फिंगरप्रिंट आ जाते हैं.
उम्र बढ़ने के साथ इंसान के फिंगरप्रिंट में कोई बदलाव नहीं आता है. हालांकि कम उम्र में फिंगरप्रिंट में एक लचीलापन जरूर होता है और जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है. यह लचीलापन खत्म होकर सख्‍त होता जाता है, लेकिन इंसान के फिंगरप्रिंट की संरचना में जीवनभर कोई बदलाव नहीं होता है.

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