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इंसानों की तरह जानवर भी करते हैं सुसाइड, जानिए वजह?

जिंदगी से हारकर कई लोग आत्महत्या कर लेते हैं, लेकिन क्या आपको पता है सुसाइड की ये भावना इंसानों के साथ जानवरों में भी होती है। वे भी अपने साथी के गम एवं अन्य कारणों से खुद की जान ले लेते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार जानवरों का सुसाइड करना भी उनके व्यवहार का एक हिस्सा होता है। हालांकि उनमें ये चीज इंसानों के मुकाबले काफी कम होती है।

1. वैज्ञानिकों के मुताबिक जब जानवर के मालिक या उसके साथी की मौत होती है तब जानवर सबसे ज्यादा दुखी होते हैं। ऐसे में कई बार वे खाना-पीना भी छोड़ देते हैं। ज्यादा दिनों तक भूखा रहने की वजह से उनकी मौत हो जाती है।

2. आत्महत्या की प्रवृत्ति कुत्ते और बिल्लियों में सबसे ज्यादा देखने को मिलती है। वे अपने मालिक से खास लगाव रखते हैं। उनके चले जाने या उन्हें छोड़ देने से ये बहुत दुखी हो जाते हैं।

3. चूंकि जानवर अपने दुख को बोलकर जता नहीं सकते हैं, इसलिए उनकी आत्महत्या करने की इस आदत को सभी जानवरों से जोड़कर नहीं देखा जा सकता है। हालांकि एक रिसर्च के मुताबिक सुसाइड करने वाले जानवरों में सबसे ज्यादा संख्या मैमल्स की होती है।

4. जानवरों के सुसाइड करने का ऐसा ही मामला जिम्बाब्बे के एक नेचुरल रिसर्व में भी देखने को मिला था। इसमें नर शेर के मारे जाने के अगले ही दिन मादा शेर का भी शव मिला था। खोजकर्ताओं के मुताबिक मादा शेर अपने सहयोगी की मौत से आहत थी। जिसके चलते उसने अपने प्राण त्याग दिए।

5. इंल्यूस्ट्रेटेड लंदन न्यूज के मुताबिक जानवर भी डिप्रेशन का शिकार होते हैं। ऐसे में वे असमान्य बर्ताव करने लगते हैं। ऐसी ही एक घटना के तहत एक कुत्ता परेशान होकर सुसाइड करने की कोशिश कर रहा था। वो बार-बार खुद को स्विमंगपूल में गिराकर डूबो रहा था। उसे बचाया जा रहा था। मगर आखिर में वो मर गया।

6. शोध के मुताबिक जब जानवर अपने घर को छोड़ते हैं, तब भी इससे आहत होकर कई जानवर खुद की जान ले लेते हैं। इसलिए मरने वालों में अप्रवासी जानवरों एवं पक्षियों की तादात ज्यादा होती है।

7. कई जानवर बीमार होने की वजह से भी खुद को मारने की कोशिश करते हैं। इंसानों की तरह उन्हें भी लगता है कि उनके ऐसे रहने से उनका कोई अस्तित्व नहीं बचा है। इससे उनके साथियों को भी परेशानी हो रही है।

8. जानवरों की तरह पक्षी भी आत्महत्या करते हैं। ये घटना असम के जटिंगा गांव में बहुत देखने को मिलती है। यहां पक्षी मानसून के महीने में खुद की जान ले लेते हैं। हालांकि वैज्ञानिक इसे वातावरण में पक्षियों के खुद को न ढ़ाल पाने की बात कहते हैं। जबकि वहां के स्थानीय लोग इसे आध्यात्मिक शक्ति का प्रकोप बताते हैं।

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