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धन के लिए धर्म को नहीं छोड़ना चाहिए उदय चंद शास्त्री, बालिका मंडल द्वारा घूमर नृत्य की प्रस्तुति दी गई, समाज के 15 वर्ष तक के बालक एवं बालिकाओं का संस्कार किया गया

INN24 अकलतरा- जैन धर्म के पर्वराज पर्यूषण पर्व के नोवे दिवस उत्तम आकिंचन धर्म के अवसर पर सागर से आए हुए प्रतिष्ठाचार्य उदय चंद शास्त्री द्वारा मंत्रोचार के साथ भगवान की शांति धारा करवाई गई, शांति धारा करने का सौभाग्य रमेश जैन, मोनू जैन, सोमू जैन, उदय चंद्र शास्त्री, रवि जैन, पंकज जैन, संध्या जैन दीपा जैन , जयकुमार जैन, ऊषा जैन, अमित जैन, अंकित जैन परिवार को प्राप्त हुआ। बालिका मंडल द्वारा घूमर डांस की प्रस्तुति दी गई घूमर डांस में समाज के लोगों की खूब तालियां बटोरी। इंदौर से आए हुए सुनील जैन द्वारा प्रश्न मंच प्रस्तुति के माध्यम से जैन धर्म के संबंध में सवाल पूछने के साथ-साथ सवाल के जबाव की विस्तृत व्याख्या करने के साथ-साथ सवाल का सही उत्तर देने वालों को अपनी ओर से पुरस्कृत भी किया गया। जैन मंदिर में प्रतिष्ठा चार्य उदय चंद्र शास्त्री द्वारा समाज के 15 वर्ष तक के बालक एवं बालिकाओं का धर्म का संस्कार करने के साथ-साथ बालक एवं बालिकाओं से सामूहिक पूजा अर्चना करवाने के साथ-साथ संस्कार का महत्व समझाया गया बालकों द्वारा भगवान का जलाभिषेक एवं पूजा अर्चना भी की गई ।

पर्यूषण पर्यूषण पर्व के अवसर पर धर्म सभा को संबोधित करते हुए प्रतिष्ठाचार्य उदय चंद्र शास्त्री ने कहा कि हम बचपन से ही अपने बच्चों को धर्म की शिक्षा दें हम बच्चों को स्कूल भेजने के साथ- साथ लौकिक शिक्षा तो प्रदान करते हैं लेकिन धर्म की शिक्षा प्रदान करने भूल जाते हैं बच्चों को बचपन से ही धर्म की शिक्षा देकर उन्हें संस्कारित करने के साथ-साथ धर्म की रक्षा करने का संकल्प दिलाया जाए बच्चे ही देश के साथ-साथ समाज का भविष्य है। कुछ लोग भारत भूमि को छोड़कर धन के लिए विदेश चले जाते हैं लेकिन भारत को देवताओं की भूमि कहा जाता है धन के लिए हमें देश तथा धर्म नहीं छोड़ना चाहिए। धन के लिए परिवार व धर्म को छोड़ना अशुभ है धर्म के लिए धन का त्याग करें। दान एवं धर्म का महत्व बताते हुए कहा कि दान भूख से पहले करें खाने के पहले खेती के लिए बीज निकाला जाता है खाने के बाद नहीं पहले रोटी बना कर दान करें बाद में बची हुई रोटी दान नहीं भी कहलाती है दान देना तपस्या का प्रतीक होता है।

हमें अपने जीवन में बुराइयों का त्याग करके अच्छाइयों को ग्रहण करना चाहिए हमें सर्वप्रथम अपना घर नहीं बना कर भगवान के लिए भव्य मंदिर एवं पाठशाला का निर्माण कार्य जीवन में अवश्य करना चाहिए। समाज एवं जीवन में हमें संगठित होकर एक माला एवं गुलदस्ते की तरह रहना चाहिए अकेले एक फूल की तरह नहीं।

जीवन में हम संपूर्ण परिग्रह का त्याग करके अकिंचन धर्म को प्राप्त कर सकते हैं कार्यक्रम में जैन समाज के अध्यक्ष सुशील जैन, उपाध्यक्ष राजकुमार जैन, सचिव दीपक जैन, सह सचिव सौरभ जैन, वीरेंद्र जैन, सुभाष जैन, प्रफुल्ल जैन , प्रकाश जैन विमल जैन, शरद जैन, निर्मिश जैन, विजय किशोर जैन, रूपेश जैन, सुनील जैन, सुबोध जैन, कमल जैन, राजू जैन, संजय जैन, प्रवीण जैन, राकेश जैन, नितिन जैन, सक्षम जैन, विपुल जैन, देवांश जैन, स्कूल जैन एवं समाज के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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