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कोरोना के B.1.617 वैरिएंट के खिलाफ कुछ ही एंटीबॉडी बना रहीं कोविशील्‍ड-कोवैक्सिन, लेकिन दूसरों पर प्रभावी

नई दिल्‍ली : कोरोना वायरस (Coronavirus) को लेकर अब भी बड़ी संख्‍या में शोध चल रहे हैं. वायरस भी अपना रूप बदलकर और जानलेवा होता जा रहा है. ऐसे में दुनियाभर में बनाई गई वैक्‍सीन (Corona Vaccine) के इन वैरिएंट (Coronavirus Variants) पर प्रभावीकरण को भी परखा जा रहा है. इस बीच इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के वैज्ञानिकों ने अपने शोध की अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट्स में जानकारी दी है कि भारतीय वैक्‍सीन कोविशील्‍ड (Covishield) और कोवैक्सिन (Covaxin) कोरोना वायरस के बी.1.617 वैरिएंट के खिलाफ कुछ ही एंटीबॉडी तैयार कर पा रही हैं, लेकिन ये वैक्‍सीन कोरोना के अन्‍य वैरिएंट पर प्रभावी हैं.

कोरोना वायरस का बी.1.617 वैरिएंट पहली बार महाराष्‍ट्र में पाया गया था. आईसीएमआर और नेशनल इंस्‍टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) के वैज्ञानिक कोरोना पॉजिटिव मरीजों के सैंपल एकत्र कर रहे थे. इसके बाद उन्‍होंने इन सैंपल को जनवरी से लेकर अब तक कोरोना वायरस के विभिन्‍न वैरिएंट बी.1.1.7 (ब्रिटेन), बी.1.351 (दक्षिण अफ्रीका), पी 2 वैरिएंट (ब्राजील) और बी.1.617 वैरिएंट पर जांचा. इस समय भारत में बी.1.617 वैरिएंट बड़ी संख्‍या में बढ़ता दिख रहा है.

भारत में इस समय दो वैक्‍सीन लगाई जा रही हैं- कोविशील्‍ड और कोवैक्‍सिन. यह कोरोना वायरस के बी1 वैरिएंट के ब्‍लूप्रिंट पर डिजाइन की गई हैं. पिछले साल अप्रैल में बी1 देश में फैला सर्वाधिक स्‍ट्रेन था.

पूरी दुनिया में वैक्‍सीन ट्रायल पर सामने आईं रिपोर्ट से जानकारी मिलती है कि वायरस में हो रहे विभिन्‍न म्‍यूटेशन उसे शरीर में इम्‍यून सिस्‍टम और एंटीबॉडी से बच निकलने में मदद करते हैं. कई लैब इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्‍या वैक्‍सीन विभिन्‍न वैरिएंट पर प्रभावी हैं या नहीं.

एनआईवी के वैज्ञानिकों ने कोवैक्सिन की दो डोज ले चुके लोगों के खून के सीरम से निकाले गए एंटीबॉडी पर कोरोना वायरस के बी.1.617 म्‍यूटेशन के साथ टेस्‍ट किया. उनमें बी.1 के खिलाफ उत्पन्न एंटीबॉडी की तुलना में लगभग 55 फीसदी कम एंटीबॉडी पाई गईं. कोविशील्ड के मामले में, बी.1.617 के लिए एंटीबॉडी का स्तर 21.9 फीसदी था जबकि बी.1 वैरिएंट के लिए यह 42.92 फीसदी था.

रिपोर्ट में कहा गया है कि जब एंटीबॉडी के स्तर की तुलना बी.11.7 (ब्रिटिश स्ट्रेन) से की गई, तो केवल 6 फीसदी की कमी देखी गई, जबकि ब्राजीलियाई स्ट्रेन (पी2) के खिलाफ भी कमी देखने को मिली.

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