CG NEWSCGMP LATEST NEWSChhattisgarhExclusiveKORBA LATEST NEWSKORBA LOCAL NEWSLATEST NEWSSECL UPDATES

गेवरा दीपका खदान में बिट सप्लाई का खेल, एसईसीएल को करोड़ों का चूना, कोयला उत्पादन भी हो रही प्रभावित

कोरबा : एसईसीएल की सर्वाधिक कोयला उत्पादन करने वाली गेवरा और दीपिका खदान में कोयला उत्खनन कार्य में पिटवाइपर मशीन का इस्तेमाल किया जा रहा है, आपको बता दे कि पुरे एशिया में सिर्फ 6 मशीन उपलब्ध है, जोकि सभी मशीन गेवरा दीपका खदान में प्रचलन में है. प्रत्येक मशीन की लागत तकरीबन 60 करोड़ रूपये अनुमानित है. मशीन में 15 इंच का बीट का इस्तेमाल किया गया है. इस बीट के सप्लाई में करोड़ों रुपए का खेल चल रही है, इससे एसईसीएल की दोनों खदानों का कोयला उत्पादन प्रभावित हो रही है. लेकिन एसईसीएल के अधिकारी आंख बंद कर गोरखधंधे को प्रोत्साहित कर रहे हैं.file image

बताया जाता है कि बीट की सप्लाई पूर्व में विदेशी कंपनी जोकि पिटवाइपर मशीन का निर्माण करता था उसके द्वारा ही बीट की सप्लाई की जाती थी लेकिन एसईसीएल ने टेंडर आमंत्रित कर लोकल सप्लायर को बीट सप्लाई कार्य सौंप दिया है. लोकल सप्लायर का दर कम होने का दुहाई देकर कार्य आवंटित कर दिया गया है. लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि इस गोरखधंधे में गुणवत्ता को नजरअंदाज किया जा रहा है. साथ ही रेट में काफी अंतर भी बताया जा रहा है इसका फायदा लोकल सप्लायर को हुआ है, इस टेंडर में समयावधि में बीट सप्लाई कर भुगतान का प्रावधान किया गया है.

सूत्रों से जानकारी मिली है कि सप्लायर अपने निजी वाहन को प्रतिदिन गेवरा और दीपिका खदान में मेंटेनेंस का कार्य कराने की आड़ में प्रवेश कर रहे हैं. जबकि खदान प्रवेश के लिए बीटीसी की पात्रता होना अनिवार्य है, लेकिन सप्लायर के वाहन चालक और तकनीकी जानकर व्यक्ति के पास बीटीसी नहीं होने के बाद भी खदान में प्रवेश कर रहे हैं उनके द्वारा बीट की जांच करने के आड़ में खदान का प्रवेश किया जा रहा है, लेकिन अवैध खदान प्रवेश की जानकारी अधिकारियों को नहीं है. आखिर यह सवाल उठता है कि सप्लायर खदान प्रवेश का गेट पास क्यों बनवाया है और उसको इसकी क्या जरुरत है, जबकि वर्क आर्डर में बिट की साप्लाई एसईसीएल कोरबा सेंट्रल वर्कशॉप में करके पेमेंट प्राप्त करना है.

INN-24 ने अधिकारियों से पूछा, तो उनका कहना था कि बीट का उत्खनन क्षमता निश्चित होती है, इसका अभी परीक्षण हो रहा है वही सप्लायर से उनका पक्ष जानने से पूछने पर बताया कि एसईसीएल को जानकारी उपलब्ध कराने का बाध्यता है, लेकिन आपसे किसी भी तरह की बातचीत नहीं करेंगे. बताया जाता है कि एसईसीएल चालू वित्तीय वर्ष में अपने कोयला उत्पादन लक्ष्य से काफी पीछे चल रही है, कम कोयला उत्पादन की वजह भारी वर्षा ,कोरोना संक्रमण बताई जाती है कि लेकिन या अभी प्रमुख कारण है कि बीट की कार्य क्षमता कम होने से कोयला उत्पादन प्रभावित हुई है, यह जांच का विषय है।

Show More

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!