Chhattisgarh

गोबर बेचकर जिले के 11 हजार 121 लोगों ने कमाये एक करोड़ 75 लाख रूपए से अधिक की राशि.

छत्तीसगढ़/कोरबा : कोरोना काल में लाॅकडाउन के दौरान एक ओर जहां पूरा देश ठप पड़ गया था तथा देश के लोग आर्थिक समस्याओं से जूझ रहे थे। वहीं दूसरी ओर प्रदेश के मुखिया भूपेश बघेल प्रदेश के जनता के लिए आय का अतिरिक्त जरिया सृजित करने की योजना को मूर्तरूप देने में लगे हुए थे। सरकार ने प्रदेश की जनता के लिए अतिरिक्त आमदनी कमाने का रास्ता खोला है। अब तक अमूल्य समझे जाने वाले गोबर को खरीदकर लोगों को आर्थिक सहयोग देने की मुख्यमंत्री की सोच ने निश्चित ही जनता में खुशहाली का द्वार खोल दिया है। 20 जुलाई 2020 को हरेली पर्व के दिन गोधन न्याय योजना की शुरूआत ने लोगों को गोबर बेचकर आय कमाने का रास्ता दिखाया। गोधन न्याय योजना शुरू होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने शासन का यह प्रयास ग्रामीणों के लिए निश्चित ही लाभप्रद रहा। गोबर संग्राहकों द्वारा शासन को गोबर बेचकर अपनी घरेलू आवश्यकता की चीजों की पूर्ति भी कर पा रहे है। प्रदेश के गोबर संग्राहकों के साथ-साथ जिले के गोबर संग्राहकों ने भी खूब लाभ कमाए हैं।

जिला पंचायत के सीईओ श्री कुंदन कुमार ने बताया कि जिले में गोधन न्याय योजना सफलता पूर्वक संचालित हो रही है। गोबर बेचकर जिले के लोगों को गोधन न्याय योजना अंतर्गत खूब आमदनी भी हो रही है। जिले के गोबर संग्राहक गौठान में दो रूपए प्रति किलो के हिसाब से गोबर बेच रहे हैं। अब तक जिले के  लोगों ने एक करोड़ 75 लाख 73 हजार 823 रूपए की आय गोबर बेचकर अर्जित की है। जिले के 200 गौठानों के माध्यम से गोबर खरीदी की जा रही है। गौठानों में गोबर क्रय केन्द्र स्थापित किया गया है जहां गोबर संग्राहक गाय-भैंस के गोबर को बेच रहे हैं। जिला पंचायत के सीईओ ने बताया कि गोबर बेचने के लिए अभी तक जिले के 11 हजार 121 गोबर संग्राहकों ने अपना पंजीयन कराया है। जिले में अब तक पंजीकृत गोबर संग्राहकों से 87 लाख 86 हजार 911  किलो गोबर की खरीदी की जा चुकी है और इन गोबर संग्राहकों को एक करोड़ 75 लाख से अधिक की राशि का भुगतान भी किया जा चुका है। जिला पंचायत सीईओ ने बताया कि हर 15 दिन में गोबर विक्रेताओं को गोबर विक्रय की राशि का भुगतान किया जा रहा है। आय का अतिरिक्त जरिया सृजित होने से जिले की जनता गोधन न्याय योजना में सक्रिय रूप से भागीदारी कर रही है। निश्चित समयावधि में बेचे गये गोबर का पैसा मिलने से गोबर संग्राहक खुश हैं तथा पशुपालन करने के लिए जिले के लोग आगे आ रहे हैं।

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