Chhattisgarh

कोरबा : दुर्गा पंडालों का स्वरुप बदला लेकिन नहीं टुटा 62 वर्ष पुरानी परम्परा.

छत्तीसगढ़/कोरबा : कोरोना संक्रमण की वजह से इस बार जिले में गिने चुने स्थान पर दुर्गा माता की प्रतिमा स्थापित की गई है। जिस वजह से पिछले साल जैसा रौनक इस बार नही देखने को मिल रहा है। इस बार के नवरात्रि में कलेक्टर के दिशा निर्देशों का खासा ध्यान दिया जा रहा। इस बार नवदुर्गा समिति के लोग को ही माता के दर्शन करने की अनुमति है।

कोरोनकाल प्रोटोकॉल के तहत समिति से बाहर के लोगो का माता के दर्शन के लिए मना है। उनका बॉयोडाटा लिखा जा रहा है। लोगों के हाथ सेनेटाइज कर उनके चढ़ावे को मातारानी को चढ़ाने के लिए जमा लिया जा रहा है। उसके बाद श्रद्धालुओं को गेट से घर जाने को कह दिया जा रहा है। कलेक्टर के दिशा-निर्देश के अनुसार श्रद्धालु माता जी पूजा नही कर पाएंगे। उन्हें पंडालो के अंदर जाने की अनुमति नही है। लोगो में माता रानी का दर्शन नही करने से नाराजगी है।

बता दे कि केंद्र सरकार लोगो से त्योहारो के समय कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करने की अपील की है साथ ही सतर्क रहने को कहा है। केंद्र सरकार के मुताबिक मार्च 2021 में कोरोन वैक्सीन को लांच करने की संभावना है। कोरोना संक्रमण रोकने के लिए जिला प्रशासन ने गाइडलाइन जारी किया है। इसकी वजह से विभिन्न दुर्गा पंडालों की रौनकता नजर नहीं आ रही है। दुर्गा पंडालों का साज-सज्जा नहीं किया गया है, साथ ही गरबा-डांडिया सहित अन्य कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया है इसके अलावा किसी भी पंडाल में भोग का आयोजन नहीं किया जा रहा है, वही दूसरी ओर आयोजकों द्वारा देवी दर्शन पहुंचने वाले श्रद्धालओं का रिकार्ड दर्ज किया जा रहा है. साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जा रहा है इसके अलावा सेनेटाइज़ की व्यवस्थता किया गया है।

औधोगिक नगरी की कोयला अंचल में सर्वप्रथम 1958 से जेपी कॉलोनी में दुर्गा पंडाल बनाकर पूजा की शुरुआत की गई थी। कोरोना संक्रमण के कारण 62 वर्ष पुरानी परम्परा टूटने की सम्भावना थी. लेकिन आयोजकों ने इस परम्परा का निर्वाहन करते हुए कोरोना गाइड लाइन का पालन कर रहे है अबकि मर्तबा ओल्ड पूजा पंडाल में देवी की आदमकद प्रतिमा स्थापित करने की बजाय चार फ़ीट उचाई प्रतिमा का स्थापना किया है साथ ही इस पंडाल में आने वाले देवी दर्शन करने वाले श्रद्धलुओं का नाम रजिस्टर दर्ज किया जा रहा है। जेपी कॉलोनी के अलावा शहीद भगत सिंह कॉलोनी सुभाष ब्लॉक मानिकपुर, पुराना बस स्टैंड, मुड़ापार, अमरैया पारा सहित अन्य स्थानों में पूजा पंडाल बनाकर देवी की पूजा की जा रही है। पूजा पंडाल का स्वरुप बदल गया है लेकिन पारम्परिक धार्मिक पद्धति से पूजा किया जा रहा है।

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