Chhattisgarh

पेरेटोनियल डायलिसिस के लिए अब देवभोग में ही उपलब्ध कराया जा रहा है फ्लूइड, सुपेबेड़ा के डायलिसिस वाले मरीजों को अब नहीं आना पड़ेगा रायपुर

छत्तीसगढ़/रायपुर: किडनी रोग से प्रभावित सुपेबेड़ा के लोगों को अब पेरेटोनियल डायलिसिस के लिए जरूरी फ्लूइड (Fluid) लेने रायपुर नहीं आना पड़ेगा। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की राज्य इकाई ने इसके लिए फ्लूइड अब देवभोग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ही उपलब्ध करा दिया है। नियमित पेरेटोनियल डायलिसिस कराने वाले सुपेबेड़ा के एक मरीज को इसके लिए फ्लूइड 17 अक्टूबर को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से दिया गया। देवभोग में ही फ्लूइड मिलने से कोरोना संक्रमण के खतरों के बीच अब मरीजों को डायलिसिस के लिए बार-बार रायपुर नहीं आना पड़ेगा। किडनी के मरीजों में कोरोना संक्रमण घातक होता है। स्थानीय स्तर पर फ्लूइड मिलने से मरीजों और उसके परिजनों के रायपुर आने-जाने में लगने वाले समय, श्रम और धन की बचत होगी।

स्वास्थ्य मंत्री श्री टी.एस. सिंहदेव की पहल पर सुपेबेड़ा के किडनी प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और एम्स रायपुर द्वारा पेरेटोनियल डायलिसिस के लिए पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है।इसके तहत डायलिसिस के लिए एम्स द्वारा मरीज और उनके परिजनों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। देवभोग स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टरों एवं स्टॉफ को भी किडनी रोग के इलाज के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। ये डायलिसिस वाले मरीजों की नियमित निगरानी कर उनका फालो-अप लेंगे। सुपेबेड़ा में डायलिसिस के लिए जरूरी फ्लूइड की आपूर्ति राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा की जा रही है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की संचालक डॉ. प्रियंका शुक्ला ने बताया कि सुपेबेड़ा के मरीजों के पेरेटोनियल डायलिसिस के लिए दो करोड़ 40 लाख रूपए का बजट स्वीकृत किया गया है। इसके अंतर्गत वहां 100 मरीजों के डायलिसिस का प्रबंध किया जाएगा। पायलट प्रोजेक्ट के परिणाम को देखते हुए जरूरत के अनुसार बजट बढ़ाया जाएगा। घर में किए जाने वाले पेरेटोनियल डायलिसिस के दौरान किसी तरह की समस्या आने पर मरीज को तुरंत उपचार के लिए देवभोग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया जा सकता है। गंभीर मरीजों को वहां से रायपुर भी रिफर किया जाएगा।

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