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कटघोरा: पहाड़ से उतरकर पानी पीने तालाब पहुंचे बेबी एलिफेंट की डूबने से मौत… CCF का बयान.. “सामान्य मौत, किसी तरह के जांच की जरूरत नहीं”… फसलों को भी पहुंचाया है भारी नुकसान.

सत्या साहू INN24

कटघोरा वनमंडल के केंदई वनपरिक्षेत्र अंतर्गत आने वाले लमना के जंगल में आज सुबह खेत की तरफ गए ग्रामीणों को तालाब के किनारे एक बेबी एलिफेंट का शव नजर आया. मृत हाथी की उम्र पांच वर्ष थी. वह 44 हाथियों के उस दल में शामिल था जो इस इलाके में पिछले दो महीने से डेरा जमाये हुए है. जानकारी के मुताबिक़ हाथियों का यह दल कल देर रात पहाड़ से नीचे उतरकर पास के ही तालाब में पानी पीने पहुँच हुआ था. इसी दौरान एक बेबी शावक गहराई में चला गया. बताया जा रहा है की मादा हाथी ने उसे बचाने की भरसक कोशिश की लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका. आज सुबह ग्रामीणों ने इसकी सूचना वन अमले को दी. हाथी की मौत की खबर पाकर सीसीएफ अनिल सोनी और वनमंडलाधिकारी शमां फारूकी, रेंजर अश्वनी चौबे और अन्य वनरक्षकों के साथ मौके पर पहुंचे. वैधानिक कार्रवाई व पोस्टमार्टम के बाद मृत बेबी शावक का तालाब के किनारे ही कफ़न दफन कराया गया. मौत की वजह को जानने के लिए उसके बिसरा भी प्रिजर्व कराये गये है.

सामान्य मौत, जांच की जरूरत नहीं.

सीसीएफ अनिल सोनी से इस सम्बन्ध में मीडिया से बात की है. उन्होंने बताया की गाँव के एलिफेंट ट्रेकर्स ने कल रात क्षेत्र में हाथियों की मौजूदगी की खबर दी थी लेकिन वह सभी तालाब के किनारे है यह जानकारी उन्हें नहीं थी. करीब 44 हाथियों का दल पानी पीने पहुंचा हुआ था. उन्होंने बताया की बेबी शावक का यह मौत सामान्य है और इस संबंध में किसी तरह के जांच की आवश्यकता नहीं. श्री सोनी के मुताबिक़ मृत हाथी शावक था जो की मादा के साथ था. चूंकि हाथियों का पूरा दल आसपास मौजूद था लिहाजा यह कहना की हाथी को बचाया जा सकता था या नहीं यह जांच का विषय है. बेबी शावक की मौत अप्रत्याशित घटना नहीं है और ना ही यह मौत आसामन्य है. यदा-कदा इस तरह के मामले सामने आते रहते है. उन्होंने रायगढ़ में हुई हाथी की मौत का हवाला देते हुए कहा की अप्राकृतिक मौतों की पहचान की जाती है और दोषियों पर कार्रवाई भी होती है पर चूंकि यह सामान्य मौत का मामला है लिहाजा किसी तरह के जाँच की जरूरत वो नहीं समझते.

घर भी तोड़ा, फसलों को भी किया चट.

ग्रामीणों ने बताया की हाथियो का यह पूरा दल शुक्रवार की देर रात ढाई बजे पहाड़ से नीचे आया था. वे पूरी रात चिंघाड़ते रहे. उन्होंने घटनास्थल से दो-चार किलोमीटर एक किसान के घर पर भी धावा बोला था. इसके अलावा हाथियों ने आसपास के खेतो की फसलों को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया है. उनके पैरो के निशान वहां साफतौर पर देखे जा सकते है. ग्रामीणों ने यह भी बताया की तालाब की अधिकतम गहराई करीब पांच से सात फ़ीट तक है. सम्भवतः पानी पीने उतरा बेबी एलिफेंट गहराई में चला गया होगा. अमूमन हाथी बेहतर तैराक होते है लेकिन उथले पानी और कीचड़ में वह फंस गया और फिर बाहर नहीं निकल पाया. उन्होंने बताया की हाथियों का यह पूरा समूह करीब दो सालो से इलाके में उत्पात मचा रहा है. केंदई रेंज में लमना क्षेत्र अति हाथी प्रभावित क्षेत्र बन चुका है. पानी और खाने की कमी की वजह से हाथी अक्सर पहाड़ो से उतरकर रहवासी क्षेत्रो में आ धमकते है जो की हाथी-मानव द्वन्द का प्रमुख कारण भी है.

पिछले साल दिसंबर में हुई थी एक मौत.

पिछले वर्ष दिसंबर के आखिरी सप्ताह में भी एक केंदई वनपरिक्षेत्र के कुल्हरिया में भी एक मादा हाथी की मौत दलदल में फंसकर हुई थी. वन अमले ने हाथी को बचाने दो दिनों तक कड़ी म्हणत की थी लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिल सकी थी. शासन ने इस मामले में तात्कालिक डीएफओ डी डी संत को निलंबित कर दिया था. वही ठीक दस महीने बाद फिर से एक हाथी की मौत ने वनविभाग के कार्यशैली को सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है. देखना होगा की विभाग किन लोगो पर इस मौत की जवाबदेही तय करते हुए कार्रवाई करता है.

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