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यूनिवर्सिटी की ओर से अल्टीमेटम.. 40% छात्रों ने जमा नहीं किया आंसरशीट.. 5 अक्टूबर तक जमा नहीं करने वालों के परीक्षाफल पर लगेगी रोक.

हेमचंद यादव विश्वविद्यालय द्वारा फाइनल ईयर और प्राइवेट स्टूडेंट्स की परीक्षा ऑनलाइन के माध्यम से ली जा रही है। आंसरशीट जमा करने के लिए केवल अब एक दिन का ही समय बचा है। शनिवार को शहर के कॉलेजों में स्टूडेंट्स की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया गया। कॉलेजों में बिना मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग के स्टूडेंट्स लाइन में लगे मिले। कॉलेज कैंपस में भी स्टूडेंट्स बिना मास्क के घूम रहे थे। साइंस कॉलेज दुर्ग में सबसे ज्यादा अव्यवस्था दिखी। यहां सुबह से सड़कों पर स्टूडेंट्स की भीड़ जमा हो गई थी।

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यूनिवर्सिटी के कुलसचिव डॉ. प्रशांत श्रीवास्तव ने बताया कि अब तक केवल 60 से 70 प्रतिशत छात्रों ने ही आंसरशीट जमा की है। जिसमें सबसे ज्यादा आंसरशीट लगभग 20 हजार बच्चों ने साइंस कॉलेज में जमा की है। यूनिवर्सिटी की ओर से शनिवार को दोबारा अल्टीमेटम जारी किया है। जिसमें कहा है कि 5 अक्टूबर तक आंसरशीट जमा नहीं करने वालों के परीक्षाफल रोके जाएंगे। बता दें कि दुर्ग यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने वेबसाइट पर प्रश्न पत्र अपलोड किया था। परीक्षाफल के संबंध में शनिवार को ही यूनिवर्सिटी की ओर से अल्टीमेटम जारी किया गया है।

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आखिर क्यों जमा नहीं कर पाए आंसरशीट

फाइनल ईयर के छात्रों और प्राइवेट छात्रों के लिए 14 सितंबर से आयोजित हुई। आंसरशीट जमा करने के लिए 5 दिनों का समय दिया। इस बीच 20 सितंबर से जिले में लॉकडाउन लगा। स्टूडेंट्स 1 अक्टूबर से आंसरशीट जमा करने कॉलेज पहुंचे। तीन दिनों में 60% छात्रों ने तो आंसरशीट जमा कर दी। लेकिन अब केवल एक दिन में ही 40% छात्रों को आंसरशीट जमा करनी होगी। यह बड़ी चुनौती है। क्योंकि 5 अक्टूबर को भीड़ लगना तय है।

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यूनिवर्सिटी की सफाई, कहा- स्टूडेंट्स ने नहीं दिखाई इंटर्नल में गंभीरता, इसलिए कम नंबर

मूल्यांकन पद्धति से बीकॉम पार्ट-2 के विद्यार्थियों के अंक कम होने के मामले हेमचंद यादव विश्वविद्यालय ने शनिवार को अपना बयान जारी किया है। छात्रों की गंभीरता पर सवाल उठाया है। विवि ने कहा कि हाल ही में घोषित नियमित विद्यार्थियों के बीएचएससी प्रथम एवं द्वितीय वर्ष और बी.काॅम द्वितीय वर्ष के अनेक विद्यार्थियों के परीक्षा परिणाम विद्यार्थियों द्वारा इंटरनल टेस्ट गंभीरतापूर्वक न दिये जाने के कारण या इंटरनल टेस्ट में न बैठने के कारण प्रभावित हुए है।

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इंटर्नल के नंबर ने बिगाड़ दिया खेल

सेकंड ईयर के छात्रों ने परिणाम जारी होने के बाद शनिवार को दुर्ग यूनिवर्सिटी अपनी समस्या लेकर पहुंचे। जिले के एक छात्र ने बताया कि इंटर्नल में सभी कॉलेज के बच्चों को लगभग सामान अंक ही मिले है, लेकिन फिर भी साथियों के नंबरों में 10 से 20% तक का अंतर आया है। डीन डॉ. प्रशांत श्रीवास्तव के मुताबिक सभी बच्चों को कई बार सूचना भेजी गई थी।

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