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कोरबा: युकां महासचिव मधुसूदन दास के खिलाफ शिकायत… बिना सूचना धरना-प्रदर्शन करने और फिर खुद ही निरस्त करने से भड़के बड़े पदाधिकारी… लेटरहेड में भी खुद को बताया विधायक प्रतिनिधि… थमाया शोकॉज.

कोरबा जिले में कांग्रेस फिलहाल काफी मजबूत स्थिति में है. महज रामपुर विधानसभा के अलावा तीन सभी विधानसभाओं में उनके विधायक भी है जबकि सभी निकायों में उनके ही अध्यक्ष. जाहिर है इस मजबूती का फायदा संगठन को भी मिलता है लिहाजा संगठनात्मक गतिविधियों में भी कांग्रेस के दूसरे अनुषांगिक संगठन आगे रहते है. बात करे कांग्रेस के सबसे प्रमुख घटक युवा कांग्रेस की तो इस मजबूती के बावजूद कुछेक नेताओ की कार्यशैली से संगठन के कामकाज के तरीके पर सवाल उठने लगे है. यह सवाल हम नही बल्कि जिले के अध्यक्ष और कार्यकारी अध्यक्ष खुद उठा रहे है. जबकि सवाल जिला युकां के महासचिव मधुसूदन दास पर उठ रहे है. संगठन के बड़े नेताओं का आरोप है कि मधुसूदन दास ना सिर्फ अपने ओहदे का दुरुपयोग कर रहे है बल्कि किसी भी तरह की गतिविधियों से बड़े नेताओं को अवगत भी कराना जरूरी नही समझ रहे.

बीते दिनों उन्होंने राखड़ बांध मामले पर बाल्को प्रबधंन के खिलाफ प्लांट के घेराव का शंखनाद किया था. लेकिन इसकी सूचना ना तो उन्होंने अध्यक्ष द्वय को दी और ना ही प्रदेश संगठन को इस प्रदर्शन की रूपरेखा से अवगत कराया. इतना ही नही बल्कि उक्त प्रदर्शन को खत्म करने उन्होंने खुद ही प्रबंधन से वार्ता करते हुए इस कार्यक्रम को निरस्त कर दिया. इसकी सूचना जैसे ही जिलाध्यक्ष नितिन चौरसिया और कार्यकारी प्रमुख आकाश शर्मा को मिली उन्होंने प्रदेश के नेताओ से इसकी शिकायत की. प्रदेश बॉडी ने इस मामले पर मधुसूदन दास को नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब किया है. पूछा गया है कि इस तरह के पार्टीगत कार्यक्रमो की सूचना अपने उच्च पदाधिकारियों को क्यो नही दी जाती? दूसरा की वार्ता के दौरान भी बड़े नेताओं को सूचित क्यो नही किया जाता. नेताओ का आरोप है कि यह पहली दफा नही है जब संगठन के कार्यकर्ताओं को एकजुट कर मनमाने तरीक़े से कार्यक्रम आयोजित किये गए है. पहले भी हुए दूसरे आयोजनों में अध्यक्षो को सूचना नही दी गई जबकि नियमतः जिले के प्रभारी संकेत अध्यक्ष को साथ लेकर ही जनता के पक्ष में आवाज बुलंद की जाती रही है. इससे न सिर्फ संगठन की छवि धूमिल हो रही है बल्कि कार्यकर्ताओ का मनोबल भी टूट रहा है. ऐसी गतिविधियों से घटक के भीतर गुटबाजी और खेमेबाजी जैसे हालात पैदा होते है जिसका नुकसान समूचे पार्टी को उठाना पड़ता है.

इस पूरे मामले पर हमने जिला युकां के प्रभारी गौरव दुबे से भी बात की. उन्होंने शिकायतों की पुष्टि करते हुए बताया कि कोरबा जिला महासचिव मधुसूदन दास की कार्यप्रणाली विवादों में रही है. उनके काम करने के तरीके को देखते हुए उन्होंने खुद भी पूर्व में मौखिक समझाइस दी थी लेकिन इसका कुछ खास असर नही हुआ. इसके पश्चात बाल्को में भी राखड़ बांध मामले ओर उनकी मनमानी सामने आई जिसपर संज्ञान लेते हुए उन्हें शोकॉज नोटिस जारी किया गया था. इस नोटिस का जवाब उन्हें मिल गया है. जवाब की समीक्षा और मूल्यांकन के बाद ही उनपर संगठन फैसला करेगी. गौरव दुबे ने बताया कि कांग्रेस और इनके सभी घटकों में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का पूरा सम्मान किया जाता है. यही वजह है कि यहां पदाधिकारियों के अधिकारों में संतुलन रखा जाता है. इन्ही प्रोटोकॉल का पालन सभी कार्यकर्ताओं व पदाधिकारियों को करना होता है लेकिन मदूसूदन दास ने कई दफे इन नियमो की अवमानना की है. संगठन इस बार उनके सम्बन्ध में कोई निर्णायक व अंतिम फैसला लेगा.

“मधुसूदन दास के खिलाफ पहले भी इस तरह से संगठन के नाम का दुरुपयोग करने की शिकायतें मिलती रही है. इस बार भी उन्होंने नियम-कायदों को ताक पर रख कर कार्यक्रम आयोजित कराया था जिसकी जानकारी उन्होंने प्रदेश स्तर के पदाधिकारियों को दी थी. उन्हें नोटिस थमाया गया है. स्टेट बॉडी उनपर जल्द फैसला लेगी. वो जिले के अध्यक्ष है बावजूद उन्हें कार्यकर्मो की सूचना महासचिव द्वारा नही दी जाती”

-नितिन चौरसिया, जिला प्रमुख युवा कांग्रेस कोरबा.

मदूसूदन दास पर एक अन्य शिकायत भी हुई थी जिसमे वे खुद को एक विभाग का विधायक प्रतिनिधि बताते रहे है. पिछले साल दिसंबर में पाली-तानाखार विधायक मोहितराम केरकेट्टा ने उन्हें अपन प्रतिनिधि भी नियुक्त किया था लेकिन कुछ घन्टो में उन्होंने इस नियुक्ति को निरस्त कर दिया था. इसके पीछे वजह बताई गई थी कि वह कटघोरा विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस के कार्यकर्ता है. हालांकि संगठन के दूसरे नेता बताते है कि उन्हें क्षेत्रीय वजहों से नही बल्कि उनके विवादित कार्यशैली की वजह से के हटाया गया था. शिकायत यह भी है कि मधुसूदन दास अब भी अपने लेटर हेड में खुद के विधायक प्रतिनिधी होने की बात कहते है. बाल्को को दी गई चेतावनी में भी उन्होंने खुद के विधायक प्रतिनिधि होने का उल्लेख किया है. इस पर हमने विधायक मोहित केरकेट्टा से भी सम्पर्क करने का प्रयास किया लेकिन नही हो सका. हमने उनके प्रतिनिधि से इस पर राय जानी है.

“मधुसूदन दास को नियुक्ति के तत्काल बाद ही हटा दिया गया था. फिलहाल तो लेटर हेड के दुरुपयोग की सीधी शिकायत नही मिली है. कम्प्लेन मिलने पर पूछताछ और कार्रवाई भी की जाएगी.”

-दीपक सोनकर, विधायक प्रतिनिधि, विधायक श्री केरकेट्टा.

हमने इस मसले पर खुद मधुसूदन दास से चर्चा की है. उन्होंने मीडिया में कलिस सम्बन्ध में किसी तरह की प्रतिक्रिया देने से साफ इंकार कर दिया. हालांकि उन्होंने यह जरूर कहा कि उन्हें नोटिस मिला है और अगर किसी तरह की जानकारी चाहिए तो नोटिस देने वाले पदाधिकारियों से बात की जाए.

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