Chhattisgarh

कुसमुण्डा : 5 गार्ड, 50 चोरो पर पड़ रहे भारी.. बाकी सुरक्षा तंत्र कर रहे भीतर घात.. खदान में हो रही चोरी को लेकर एक विशेष रिपोर्ट.

रिपोर्ट : ओम गभेल

तू डाल डाल मैं पात पात की तर्क पर कुसमुण्डा खदान में विभागीय गार्ड और चोर एक दूसरे के हैं आमने सामने….

कुसमुण्डा खदान में जिले भर के चोरो के दिन फिर गए है। प्रतिदिन हजारो लीटर डीजल, हजारो किलो लोहे के समान, हजारो बोरी भर-भर के कोयले दिनदहाड़े चोरी किये जा रहे है। वही खदान की सुरक्षा के लिए तैनात SECL गार्ड की बात को अलग कर दिया जाए तो बाकी सभी तंत्र आंखों पर पट्टी बांधे कुर्सी पर गद्दे लगा कर बैठे हैं।

SECL सुरक्षा गार्डों की बात अलग इसलिए हैं क्योकि सुरक्षा गार्ड जो कि संख्या में तो एक हाथ की पांचों उंगलियों के ही बराबर है, फिर भी 50 से भी अधिक चोरो को पंजा मारने का माद्दा रखे हुए हैं, और निरतंर बिना थके अपनी ड्यूटी बड़ी ही मुस्तेदी के साथ कर रहे है।

दुसरीं तरफ जिन्हें हम चोर कह रहे वो डकैत से कम नही, धारदार हथियार से लेकर देशी कट्ठे तक साथ रख कर देर रात 50 से अधिक की संख्या में खदान अंदर प्रवेश करते है और बड़े ही बेखोफ तरीके से कबाड़ व डीजल की चोरी को अंजाम देते है।

खदान अंदर संसाधनों की सुरक्षा के लिए कई संवेदनशील जगहों पर मात्र 16 होमगार्ड की तैनाती की गई है। वे भी चोरी रोकने के बजाय चोरो से मिले हुए नजर आते हैं। जिसका प्रमाण खदान अंदर लगे कैमरे में रिकार्ड है। 3 नम्बर वर्कशॉप जो कि सबसे अधिक चोरो के निशाने में रहता है। वहां तैनात होमगार्ड देर रात चोरो से बात करते हुए एवम साथ मे घूमते हुए दिखाई देते है।

सीआईएसएफ भी SECL कर्मचारियों और एसईसीएल गार्डों की सूचना पर खदान अंदर नही आते। देर रात जब बड़ी संख्या में चोर चोरी करते है तो विभागीय गार्डों द्वारा सीआईएसएफ को मदद के लिए बुलाया जाता है। परंतु हर बार सीआईएसएफ टालमटोल करती है और पेट्रोलिंग टीम खदान आने के बजाय SECL द्वारा मिले पेट्रोलिंग वाहन में अपने दैनिक कार्य करती है। जिसकी पुष्टि स्वयं सुरक्षा विभाग ने की है। वही SECL के 5 सुरक्षा गार्ड जिसमे सरजू साय इंचार्ज, रामप्यारे हेड सिक्यूरिटी गार्ड, कन्हैया राम आर्म गार्ड, बलेन्द्र सिंह आर्म गार्ड वही एक महिला गार्ड श्रीमती श्याम कुंवर है। जिन्होंने फिलहाल तो मिलकर जिन-जिन जगहों से चोर घुसते है उन जगहों पर भारी भरकम मशीनों की मदद विशालकाय गड्ढा करवा दिया है, जंहा चोर खदान में चोरी करने कब बजाय गड्डो को पाटते नजर आते है। वही कई जगहों पर लोहे व सीमेंट के भारी भरकम खम्बो से चोरो द्वारा खदान में घुसने के रास्तों को बन्द कर दिया है। वही अंदर घुसे चोरो को मुस्तेदी के साथ खदेड़ने में लगे रहते है।

बीती रात 20 से 25 की संख्या में ईमली छापर फाटक से ठीक पहले दीवाल तोड़ कर कोल साइडिंग के रास्ते घुसते हुए नजर आए, इसके पहले जंहा से घुसते थे वँहा पर SECL के गार्डों द्वारा गड्ढे कराए जा चुके है। वही कल रात चोरो द्वारा घुसने वाले जगह पर आज फिर गार्डों की सूचना पर इस जगह पर गड्ढे किये जा रहे है।

इन सबके परे बिलासपुर विभाग में बैठे अधिकारियो का रवैया कुसमुण्डा परियोजना के लिए समझ से परे है, कोयला उत्पादन में नए कीर्तिमान गढ़ने वाली कुसमुण्डा खदान 50 मिलियन टन उत्पादन कर रही है, कुसमुण्डा प्रबन्धन द्वारा बार बार आग्रह पर भी नए गार्ड नही दिए जा रहे। प्रबन्धन के अधिकारियों का कहना है कि खदानो में हो रही इस बड़े पैमाने की चोरी को रोकने के लिए 180 सुरक्षाकर्मियों की जरूरत है पर वर्तमान में केवल 16 होमगार्ड और 5 सुरक्षा गार्ड है ।

आपको बता दें इन्ही 5 सुरक्षागार्डों की सक्रियता से खदान अंदर वर्कशॉप 3 में खड़ी डंफरो में लगाई गयी आग को समय रहे बुझा लिया गया था, अन्यथा करोड़ो रूपये के कई डम्फर स्वाहा हो जाते। प्रबन्धन को चाहिए ऐसे सुरक्षागार्डों का सम्मान करें, उनका मनोबल बढ़ाये, उनके लिए उनका ये प्रोत्साहन ही उन्हें भविष्य में सैकड़ो की संख्या में भी खदान में चोर डकैतों से लड़ने में सहायक होगा।

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