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50 फीसदी प्रभावी होने पर भी लोगों को लगाई जाएंगी कोरोना वैक्सीन..

अमेरिकी सरकार के कोरोना वायरस एडवाइजर और देश के प्रमुख संक्रामक रोग विशेषज्ञ एंथनी फाउची ने कहा है कि कोरोना वैक्सीन के पूरी तरह प्रभावी होने (जैसे कि 98 फीसदी) की संभावना बहुत कम है. हालांकि, उन्होंने कहा कि 50 फीसदी प्रभावी होने पर भी वैक्सीन स्वीकार्य की जाएगी. एंथनी फाउची ने कहा है कि साइंटिस्ट्स जिन वैक्सीन पर काम कर रहे हैं, उनको लेकर उम्मीद कर रहे हैं कि यह कम से कम 75 फीसदी प्रभावी हो. लेकिन 50 से 60 फीसदी प्रभावी होने पर भी वैक्सीन स्वीकार्य होंगी.

ब्राउन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के एक कार्यक्रम में हिस्सा लेते हुए फाउची ने कहा कि कोरोना वैक्सीन के 98 फीसदी प्रभावी होने की संभावना कम है. उन्होंने कहा कि आपको यह सोचना चाहिए कि वैक्सीन एक टूल है जिससे महामारी पर नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा. अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने कहा है कि अगर कोरोना की वैक्सीन सुरक्षित साबित हो जाती है और कम से कम 50 फीसदी भी प्रभावी रहती है तो उसे मंजूरी दी जाएगी. मंजूरी मिलने के बाद ही कोई भी वैक्सीन आम लोगों के लिए उपलब्ध होती है.

बता दें कि अमेरिका में कई वैक्सीन पर काम चल रहा है और कुछ वैक्सीन के तीसरे राउंड के ट्रायल हो रहे हैं जिनके नतीजे अच्छे आने पर वैक्सीन आम लोगों के लिए उपलब्ध हो सकती हैं. अमेरिका में Pfizer और Moderna तीसरे फेज के ट्रायल में करीब 30 हजार लोगों को शामिल कर रही हैं. कई एक्सपर्ट का कहना है कि इस साल के आखिर तक तीसरे राउंड के नतीजे सामने आ सकते हैं. वहीं, दूसरी ओर, रूस ने अपनी कोरोना वायरस वैक्सीन का ट्रायल पूरा कर लेने का ऐलान किया है. हालांकि, रूसी कोरोना वैक्सीन के बारे में सीमित जानकारी ही सामने आ सकी है.

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