Chhattisgarh

CG: राप्रसे पदों पर सीधी भर्ती और पदोन्नति के अनुपात को लेकर सरकार और प्रशासनिक सेवा संघ आमने-सामने… खत लिखकर फैसला वापिस लेने की मांग… विस्तार से पढ़े पूरे विवाद की वजह.

सत्या साहू INN24

राज्य प्रशासनिक सेवा अफसरों की सीधी भर्ती व प्रमोशन के बीच अनुपातिक अंतर को कम करने को लेकर राज्य सरकार व प्रशासनिक सेवा संघ आमने सामने आ गया है. तहसीलदार एवम नायब तहसीलदारो के प्रतिनिधि संगठन छग कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ ने राज्य सरकार को तीन पन्नो का खत लिखकर तत्काल इसपर प्रस्तावित संशोधन के फैसले को वापिस लेने की मांग की है. अपने खत में उन्होंने बिंदुवार तरीके से अपनी आपत्तियों को सामने रखा है. संघ के पदाधिकारियों ने सरकार को इस फैसले की बेहतरी के लिए कुछ अन्य रास्ते भी सुझाये है.

क्यो उपजा यह विवाद?

दरअसल छत्तीसगढ़ सरकार के नए फैसले के मुताबिक राज्य में डिप्टी कलेक्टरो के 60 फीसदी पदों पर अब सीधी भर्ती के माध्यम से नियुक्तियां होंगी. इससे पहले जो प्रावधान निर्देशित थे उसमे 50 प्रतिशत पद सीधी भर्ती और 50% पद पदोन्नति के माध्यम से भरे जाने का नियम था. प्रदेश सरकार ने डिप्टी कलेक्टरों के प्रमोटेड पोस्ट के लिए पात्र उम्मीदवार नहीं होने का हवाला देते हुए पदोन्नति के पदों में 10 फ़ीसदी की कटौती कर दी है जिसके बाद अब 50 फ़ीसदी की जगह 40 फ़ीसदी पद पदोन्नति के माध्यम से भरे जाएंगे वही 60%पदों में सीधी भर्ती की जाएगी. राज्य सरकार ने राज्य प्रशासनिक सेवा (वर्गीकरण भर्ती तथा सेवा की शर्ते) 1975 में संशोधन का फैसला लिया है. संघ ने इसी प्रस्तावित निर्णय पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है.

प्रदेश में कितने पद?

सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा उपलब्ध आंकड़ो के मुताबिक मौजूदा वक्त में प्रदेश में राज्य प्रशासनिक सेवा यानी डिप्टी कलेक्टर के 460 पद स्वीकृत है. इनमे अब भी करीब 100 पद रिक्त है. शासन के अनुसार योग्य उम्मीदवार नही मिलने की वजह से इन रिक्तियों को नही भर जा सका है. वही अब सरकार का प्रयास है कि पदोन्नति के माध्यम से पदों को पूरा करने के बजाए सीधी भर्ती की जाएं. इसके लिए ही सरकार संशोधन विधेयक प्रस्तुत करने की तैयारी में है. इस तरह नए नियम में यदि 10 फीसदी की बढ़ोत्तरी की जाती है तो रिक्तियों के 46 पदों को सीधी भर्ती के माध्यम से भरा जाएगा.

क्या है संघ की आपत्ति?

छग कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ की दलील है कि 60:40 के अनुपात से रिक्तियों की भर्ती पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा. प्रशासनिक दृष्टि से देखा जाए तो जो डिप्टी कलेक्टर लम्बे वक़्त से प्रमोशन की कतार में खड़े है उनके हितों की अनदेखी होगी. इस तरह 460 पदों में अब पदोन्नति के माध्यम से पहले जहां 230 पदों को भरा जाता रहा है वह कम होकर 184 रह जायेगा जबकि सीधी भर्ती से 276 पदों की रिक्तियां खत्म की जाएगी. संघ का मानना है कि प्रमोटेड पोस्ट में भर्तियां हमेशा से उपेक्षित रहा है. राज्य गठन के बाद से अबतक डिप्टी कलेक्टर के कुल 346 पदों पर भर्तियां हुई है. इनमे 122 प्रमोटेड थे जबकि शेष 224 पद प्रत्यक्ष प्रणाली से भरे गए थे. उनका कहना है कि किसी भी तरह की सीधी नियुक्तियों में शासन को दो वर्ष का समय लगता है जबकि प्रमोशन के माध्यम से पदों की पूर्ति जल्दी की जा सकती है. आंकड़े पेभ करते हुए उन्होंने बताया है कि फिलहाल राज्य में सेवारत 88 तहसीलदारो में से 19 तत्काल पदोन्नति के पात्र हैजबकी आगामी 2021 तक यह संख्या 69 होगी लिहाजा नए फैसले से उनके हितों की रक्षा बीबी सम्भव नही होगा. इसी तरह से उन्होंने बताया है कि शासन मितव्ययी प्रक्रिया को प्रोत्साहित कर रही है अतः इसलिए भी सीधी भर्ती में होने वाले चयन व प्रशिक्षण के खर्च को कम किया जा सकता है.

यह है प्रमुख मांगे.

छग कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ ने मांग की है कि पदों में भर्ती के अनुपात को 40:60 के बजाए 50:50 किया जाए. पात्र तहसीलदारो को अविलंब पदोन्नत किया जाए. डिप्टी कलेक्टरों की पदोन्नत्ति में निरन्तरता व समयबद्धता को ध्यान में रखा जाए. इसी तरह लम्बित प्रोमोशन की प्रकिया को आगे बढ़ाते हुए तत्काल तहसीलदारो को प्रमोट किया जाए तथा लोक सेवा आयोग द्वारा 2019 में पदोन्नत्ति द्वारा की गई भर्तियों को शामिल करते हुए पदों का समायोजन प्रोमोशन कोटा से किया जाये.

संघ ने राज्य शासन को अवगत कराया है कि वह इस नए फैसले का पांच दिवसीय सांकेतिक विरोध करेंगे. इस दौरान समस्त डिप्टी कलेक्टर, तहसीलदार व नायब तहसीलदार आगामी 25 जुलाई से 30 जुलाई तक काली पट्टी बांधकर कार्यस्थल पहुँचेंगे.

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