Chhattisgarh

सरकारी जमीन खरीदी बिक्री का मामला लंबित.. विभाग जाँच करने के बजाय सो रहा कुम्भकरण की नींद.. जाँच मे हो सकता है बड़ा खुलासा.. जिला प्रशासन कब दिलायेगी न्याय.. पढ़े पूरा मामला.

अगर आप कोरबा जिले अन्तर्गत अनुविभाग कोरबा तहसील कोरबा में सरकारी जमीन की हेरा फेरी कर बेच देते है तो डरना नही बल्कि विभाग को लेकर चलना फिर आपका कोई कुछ नही बिगड़ सकता और अगर लेकर नही चले तो कार्यवाही का डंडा आपके सर पर गिर सकता है ये INN24 न्यूज़ नही बल्कि खुद विभाग की कार्यशैली कह रही है और लेकर चलने का मतलब तो आप समझ ही गये होंगे।

उल्लेखनीय है कि सात से आठ माह पूर्व कोरबा जिले के अनुविभाग कोरबा तहसील कोरबा उप तहसील भैसमा रा. नि. मंडल पसरखेत प. ह. न. 37 अंतर्गत ग्राम रजगामार में पूर्व SECL कर्मी सत्यनारायण मिश्रा एवं तत्कालीन पटवारी दामोदर प्रसाद तिवारी ने मिलकर पटवारी रिकॉर्ड में नक्शा हेरफेर कर सरकारी जमीन को निजी भूमि बताकर कई लोगों को बेच दिया और पटवारी द्वारा दिये गए नजरी नक्शा एवं चौहद्दी के आधार पर बैनामा रजिस्ट्री करा लिया।रजिस्ट्री के आधार पर क्रेताओं ने उक्त जगह पर कब्जा करना शुरू कर दिया जिसकी जानकारी ग्रामीणों एवं आदिवासी समाज को हुई तब ग्रामीणों एवं आदिवासी समाज ने उनका विरोध किया तथा इसकी लिखित शिकायत दिनांक 06/12/2019 को किये लेकिन कोई भी कार्यवाही नही हुई तब ग्रामीणों ने दुबारी बार शिकायत मौखिक रूप से SDM कोरबा सुनील कुमार नायक को किये जिस पर SDM कोरबा ने जाँच के नाम पर खाना पूर्ति करने नायब तहसीलदार भैसमा सोनू अग्रवाल को मौका जाँच करने भेजा तब तक कोई भी निर्माण नही हुआ था लेकिन नायब तहसीलदार सोनू अग्रवाल के जाने के बाद दूसरे दिन से निर्माण होना शुरू हो गया और महज चार दिन में ही 3 मकान बनकर तैयार हो गए जिसे ग्रामीणों एवं समाज के लोगो ने रोकना चाहा लेकिन उन्हें कानून का डर दिखाकर उल्टे पाव लौटा दिया जो कि समझ से परे है।

जमीन का क्यों नही किया जा रहा सीमांकन

इस मामले में सबसे दिचस्प बात यह है कि ग्रामीणों एवं आदिवासी समाज के बार बार शिकायत करने के बाद भी विभाग उस जमीन का सीमांकन नही कर रहा है जो कि समझ से परे है जबकि किसी भी जमीन का जाँच करना होता है तो इसी विभाग के अधिकारी कर्मचारी सीमांकन करने का सलाह या आदेश देते है तो फिर इस मामले में ऐसी कौन सी वजह है कि जमीन का सीमांकन नही किया जा रहा है।

एस डी एम ने कहा था टीम बनाकर करेंगे जाँच

अनुविभागीय अधिकारी सुनील कुमार नायक ने ग्रामीणों एवं आदिवासी समाज को शिकायत पर आस्वत करते हुए सात माह पूर्व कहा था कि हम टीम बनाकर इसकी जांच कराएंगे जिसमे दो नायब तहसीलदार एवं तीन पटवारी को शामिल करने की बात कही थी जिसके लिए स्वयं मौका पहुँचकर जानकारी लिया था मगर वह भी धरा का धरा रह गया।आखिर ऐसी क्या वजह होगी कि SDM के खुद मौके पर पहुचने के बाद अपने ही निर्णय को वापस लेना पड़ा इसका जवाब सिर्फ SDM एवं विभाग के पास है जिसे आम जनता जानना चाहती है।

 

सत्यनारायण मिश्रा एवं उसके परिवार के नाम से 17.90 एकड़ भूमि का सरकारी पट्टा

सत्यनारायण मिश्रा SECL में नियमित कर्मचारी था जो कि शासकीय सेवक है फिर भी सत्यनारायण मिश्रा के नाम पर खसरा नंबर 93/8 रकबा 2.75 एकड़ भूमि, पत्नी सीता देवी के नाम पर खसरा नंबर क्रमशः 123/1/ङ रकबा 5.25 एकड़,खसरा नंबर 123/1/छ रकबा 4.90 एकड़ भूमि एवं पुत्री कुमारी प्रतिभा मिश्रा खसरा नंबर 123/1/च रकबा 5.0 एकड़ भूमि कुल 17.90 एकड़ भूमि का पट्टा दिया गया है जो कि नियम के विरुद्ध है जिसकी सम्पूर्ण जानकारी विभाग को होने पर भी चुप्पी साधे बैठी हुई है।

ग्रामीण जनता का जिला प्रशासन  पर सीधा सवाल

ग्रामीण जनता का जिला प्रशासन  से सीधा सवाल है कि आम जनता का कोई अधिकार है या नही अगर अधिकार है तो उसका मजाक क्यो बनाया जा रहा है और यदि मजाक बनाना है तो फिर दिखावा किस बात का है।

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