Chhattisgarh

कोरबा : कोयला उत्खनन में अमेरिका की बादशाहत कायम.. जर्मनी निर्मित सावेल भी SECL ने उतारा.

छत्तीसगढ़/कोरबा : SECL गेवरा में अमेरिकन की बादशाहत कायम है. जर्मनी ने SECL गेवरा खदान में सोलह क्यूबिक मीटर क्षमता वाले सावेल उतारा है जबकि अमेरिका से निर्मित 42 क्यूबिक मीटर क्षमता सावेल खदान में पहले ही उतारा है जर्मनी सावेल की लागत बीस करोड़ है जबकि अमेरिकी सावेल की लागत 98 करोड़ रूपए थी.

SECL की सर्वाधिक कोयला उत्पादन गेवरा खदान से किया जाता है इस खदान में आयातित मशीनो का इस्तेमाल किया जाता है. SECL ने पहले अमेरिका से दो नग सावेल ख़रीदा था इस सावेल की क्षमता 42 क्यूबिक मीटर की थी. SECL ने सोमवार को जर्मनी की कंपनी कायास्तु से इलेक्ट्रिकल हाइड्रोलिक सावेल खदान में उतारा है SECL देश का पहली कोयला कंपनी है जिसने कायास्तु की सावेल ख़रीदा है हालाकि पूर्व में ही SECL ने दक्षिण एशिया की पहली कंपनी थी जिसने भारी भरकम अमेरिकी सावेल उतारा था इस तरह से स्पष्ट होता है कि कोयला उत्खनन कार्य में अमेरिका का वर्चस्व बरक़रार है

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