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रेंजर-बीटगार्ड विवाद: विभागीय जांच पूरी… PCCF व CCF को भेजा गया रिपोर्ट… बीटगार्ड शेखर रात्रे पहले भी बदसलूकी के आरोप में हो चुका है निलंबित… विवाद पर DFO ने जताया खेद.

पिछले दिनों कटघोरा वनमण्डल के बांकीमोंगरा बीट में बांसों की अवैध कटाई को लेकर कटघोरा वनपरिक्षेत्राधिकारी व बीट गार्ड के बीच जोरदार विवाद हुआ था. बीटगार्ड शेखर रात्रे ने वनपरिक्षेत्राधिकारी मृत्युंजय शर्मा व दो अन्य वनकर्मियों के खिलाफ मामला भी कायम कर लिया था. बीटगार्ड और रेंजर के पूरे विवाद का वीडियो सबसे पहले INN24 ने प्रसारित करते हुए उच्चाधिकारियों का ध्यानाकर्षण कराया था.

पूर्व में डीएफओ सुश्री शमां फ़ारूक़ी ने इस मामले की जांच के लिए पाली के एसडीओ को निर्देशित किया था जिन्हें एक हफ्ते के भीतर रिपोर्ट सौंपनी थी. उन्होंने बताया कि सम्बंधित जांच अधिकारी के द्वारा जांच पूरी कर ली गई है जिसके पश्चात रिपोर्ट सीसीएफ व पीसीसीएफ को प्रेषित कर दिया गया है. रिपोर्ट के आधार पर जल्द फैसला लेंगे.

डीएफओ ने बताया कि जांच के लिए तीन महत्वपूर्ण बिंदु निर्धारित किये गये थे जिनमें पहला था कि क्या बांसों की कटाई अवैध थी? दूसरा क्या इस कटाई का मकसद किसी तरह की चोरी थी? व तीसरा की क्या बीटगार्ड का व्यवहार उचित था?

डीएफओ सुश्री फ़ारूक़ी ने बताया कि यह कटाई अवैध नही थी. ट्री गार्ड के लिए सूखे व टेढ़े बांसों की कटाई की जा रही थी.

उन्होंने बताया कि बीट गार्ड शेखर रात्रे का अपने उच्च अधिकारियों के साथ जो व्यवहार था वह पूरी तरह अनुचित व गैर पेशेवर था. शेखर रात्रे को चाहिए था कि मौके के हालात से एसडीओ अथवा उन्हें खुद अवगत कराया जाता. ताकि इसपर वे कोई फैसला ले पाते. उन्होंने यह भी बताया कि पूर्व में जब बीटगार्ड शेखर रात्रे कोरबा वनमण्डल में पदस्थ थे तब भी उनपर अनुशासनहीनता, कार्य मे लापरवाही व बदसलूकी के आरोप में निलम्बित भी हो चुका है.

डीएफओ ने कर्मचारी के इस आशंका को भी सिरे से खारिज कर दिया है कि इस विवाद के बाद अफसरों के द्वारा कर्मचारियों को प्रताड़ित किया जाएगा. बकौल डीएफओ वे इस तरह के कर्मचारियों को सम्मानित करते है.

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